विधि एवं न्‍याय मंत्रालय
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कानूनी सहायता एवं नालसा योजनाओं का कार्यान्वयन

प्रविष्टि तिथि: 06 FEB 2026 1:39PM by PIB Delhi

राष्‍ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा कानूनी सहायता योजनाओं के रूप में स्प्रुहा, 2025; वीर परिवार सहायता योजना, 2025; जागृति 2025; और मानव-वन्यजीव संघर्ष पीड़ित योजना जैसी योजनाएं लागू की जाती हैं, जबकि न्याय विभाग की केंद्रीय क्षेत्र योजना 'डिजाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशन फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस (दिशा)' के अंतर्गत टेली-लॉ एक कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से अब तक 1.12 करोड़ लाभार्थियों को मुकदमा करने से पहले सलाह प्रदान की गई है।

नालसा स्प्रुहा (अदृश्य, पिछड़े और प्रभावित लोगों की क्षमता एवं लचीलेपन का समर्थन) योजना, 2025, कैदियों, विचाराधीन कैदियों और उनके आश्रितों को व्यापक कानूनी एवं सामाजिक सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई एक नयी पहल है, जिसमें पुनर्वास और समाज में पुनः एकीकरण पर विशेष बल दिया गया है। यह निःशुल्क कानूनी सहायता, परामर्श, जमानत और पैरोल सहायता, कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ाव, जेल और जिला अधिकारियों के साथ समन्वय, कानूनी जागरूकता तथा रिहाई के बाद सहायता के माध्यम से कानूनी, सामाजिक एवं आर्थिक कमजोरियों को समाप्त करती है, ताकि अपराध की पुनरावृत्ति में कमी लायी जा सके और सामाजिक पुनर्एकीकरण को बढ़ावा दिया जा सके।

जुलाई 2025 में शुरू की गई नालसा वीर परिवार सहायता योजना, 2025 का उद्देश्य रक्षा कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को विशेष रूप से संपत्ति, परिवार, उपभोक्ता एवं उत्तराधिकार संबंधी मामलों में समय पर मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना है। जुलाई 2025 से सितंबर 2025 के बीच, जिला सैनिक बोर्डों के 417 कानूनी सहायता क्लीनिकों के माध्यम से 5,219 लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई। इस अवधि में, 525 पैरा लीगल स्वयंसेवकों और 355 पैनल वकीलों के समर्थन से 692 कानूनी सहायता एवं आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो तीव्र संचालन एवं विस्तारित आउटरीच को दर्शाता है।

नालसा (जागृति - जमीनी स्तर पर सूचना और पारदर्शिता पहल के लिए न्याय जागरूकता) योजना, 2025 का उद्देश्य कानूनी सेवा संस्थानों को स्थानीय स्वशासन निकायों और सामुदायिक अवसंरचना के साथ एकीकृत करके जमीनी स्तर पर कानूनी जागरूकता को मजबूत करना है। जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच 690 जिला इकाइयां और 2,129 तालुक इकाइयां स्थापित की गईं, और 35,000 से अधिक स्थायी कानूनी सहायता क्लीनिक स्थापित किए गए। कुल 35,24,711 लोगों को कानूनी सहायता एवं कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूक किया गया। यह योजना मुख्य रूप से महिलाओं एवंबच्चों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ, बाल विवाह और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों पर केंद्रित है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों के लिए नालसा योजना, 2025 का उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 21 और 48ए के अनुरूप कानूनी सहायता, जागरूकता, मुआवजा एवं संबद्ध राहत प्रदान करके वन-सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों में प्रभावित लोगों द्वारा सामना की जाने वाली कानूनी, सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का समाधान करना है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) के दौरान विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत गठित विभिन्न कानूनी सहायता सेवाओं एवं कार्यक्रमों को लागू करने के लिए सरकार द्वारा आवंटित निधियों का विवरण निम्नलिखित है:

करोड़ रुपये में

नालसा को अनुदान

नालसा द्वारा उपयोग किए गए अनुदान

200.00 (सहायता अनुदान)

144.65

195.84 (एलएडीसीएस योजना के अंतर्गत)

194.17

 

राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की स्थापना पूरे देश में कानूनी सहायता के कार्यान्वयन के समन्वय, निगरानी एवं सुदृढ़ीकरण के लिए कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत की गई।  नालसा 37 राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों (एसएलएसए), 707 जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों (डीएलएसए) और 2,440 तालुक कानूनी सेवा समितियों (टीएलएससी) से युक्त एक विकेन्द्रीकृत संस्थागत संरचना द्वारा संचालित होता है और सहकारी संघवाद की भावना से प्रेरित होकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ घनिष्ठ समन्वय के साथ काम करता है, जिससे कानूनी सहायता तक असमान पहुंच एवं देरी को संबोधित किया जा सके और विशेष रूप से समाज के हाशिए पर रहने वाले एवं कमजोर वर्ग के लोगों को कानूनी सेवाओं की एकसमान, समयबद्ध एवं न्यायसंगत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

नालसा द्वारा तैयार की गई सभी कानूनी सहायता गतिविधियां एवं योजनाएं कानूनी सेवा प्राधिकरण (एलएसए) अधिनियम, 1987 के प्रावधानों के अनुसार कार्यान्वित की जाती हैं। तदनुसार, अधिनियम के अंतर्गत सभी पात्र लाभार्थियों को नालसा द्वारा संचालित विभिन्न कानूनी सहायता कार्यक्रमों एवं गतिविधियों के माध्यम से न्याय तक पहुंच प्रदान की जाती है, जिसका उद्देश्य हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए न्याय तक पहुंच में आने वाली आर्थिक एवं सामाजिक बाधाओं को दूर करना है।

यह जानकारी केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोकसभा में दी।

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पीके/केसी/एके


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