विधि एवं न्‍याय मंत्रालय
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सरकार ने दिव्यांगजनों सहित आम आदमी को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और त्वरित कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए

प्रविष्टि तिथि: 06 FEB 2026 1:31PM by PIB Delhi

सरकार ने दिव्यांगजनों सहित आम जनता को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और त्वरित कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई उपाय किए हैं। विधि सेवा प्राधिकरण (एलएसए) अधिनियम, 1987 दिव्यांगजनों सहित समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क और सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करता है । एलएसए अधिनियम, 1987 की धारा 12(डी) के अनुसार, दिव्यांग व्यक्ति कानूनी सेवाओं का हकदार है।

एनएएलएसए दिव्यांगजनों के लिए ‘एनएएलएसए (मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों को कानूनी सेवाएं) योजना, 2024’ नामक एक विशेष योजना चला रहा है। यह योजना झारखंड के दुमका लोकसभा क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और ओडिशा के जनजातीय क्षेत्रों सहित पूरे देश में लागू की जा रही है। दिव्यांग बच्चों के लिए झारखंड राज्य में दुमका लोकसभा क्षेत्र सहित दो बार विशेष अभियान चलाए गए - एक 13 जुलाई, 2024 से 26 अगस्त, 2024 तक और दूसरा 6 जुलाई, 2025 से 20 जुलाई,2025 तक।

एनएएलएसए के अधिदेश के अनुरूप जम्मू-कश्मीर विधिक सेवा प्राधिकरण ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (डीएलएसए), पैनल अधिवक्ताओं, पैरा-लीगल स्वयंसेवकों (पीएलवी) और विशेष विधिक सेवा इकाइयों के माध्यम से दिव्यांगजनों के लिए कानूनी सहायता प्रदान करने हेतु अधिकार-आधारित और समावेशी दृष्टिकोण अपनाया है। वर्ष 2025 के दौरान जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में विभिन्न प्रकार की कानूनी सेवाओं के माध्यम से कुल 468 दिव्यांग व्यक्तियों को लाभ प्राप्त हुआ। कुल 144 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 7,211 व्यक्तियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, जमीनी स्तर पर दिव्यांग व्यक्तियों और उनके परिवारों तक पहुंचने के लिए पैरा-लीगल स्वयंसेवकों द्वारा 121 डोर-टू-डोर (घर-घर जाकर) जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

ओडिशा राज्य में आवेदन प्राप्त होने पर जनजातीय क्षेत्रों के लोगों, जिनमें दिव्यांग भी शामिल हैं, को कानूनी सहायता सेवाएं प्रदान करने के लिए ओडिशा उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति (ओएचसीएलएससी), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और तालुक विधिक सेवा समितियां (टीएलएससी) द्वारा तत्काल कदम उठाए जाते हैं। केंद्र/राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए, विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए, कानूनी साक्षरता/जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। कोरापुट, मलकानगिरी, क्योंझर, मयूरभंज, फूलबन, रायगढ़ा और सुंदरगढ़ जैसे जनजातीय क्षेत्रों में ‘ग्राम कानूनी देखभाल और सहायता केंद्र’ भी कार्यरत हैं। इसके अलावा, जागरूकता पैदा करने के लिए उपर्युक्त जिलों के जनजातीय क्षेत्रों में ‘मोबाइल कानूनी सहायता वैन’ भी तैनात की जा रही हैं।

एनएएलएसए (मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवाएं) योजना, 2024 के खंड 5.1 के अनुसार, ओडिशा राज्य के सभी 30 जिलों और तालुका स्तर पर मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों के लिए विधिक सेवा इकाइयां ‘मनोन्याय’ गठित की गई हैं। ओडिशा राज्य में आयोजित 65 कानूनी जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के 8,870 से अधिक व्यक्तियों को लाभ प्राप्त हुआ है।

सरकार जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के लिए बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विकास हेतु एक केंद्र प्रायोजित योजना को लागू कर रही है। इस योजना के तहत राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के संसाधनों को बढ़ाकर न्यायालय भवन, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयां, वकीलों के हॉल कक्ष, डिजिटल कंप्यूटर कक्ष और शौचालय परिसरों का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रस्तावित बुनियादी ढांचे का डिज़ाइन ‘दिव्यांग-अनुकूल’ हो। भवन का डिज़ाइन केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय द्वारा समय-समय पर निर्धारित आवश्यक मानदंडों/पहुंच मानकों के अनुरूप होता है।

ई-कोर्ट्स परियोजना के तीसरे चरण के अंतर्गत 24 घटक हैं, जिनमें दिव्यांगजनों सहित नागरिकों के लिए एक मजबूत और सुलभ डिजिटल अवसंरचना के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय किए गए हैं। दिव्यांगजनों को उन्नत सुलभ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सुविधाएं प्रदान करने के लिए 27.54 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, 752 न्यायालयों (उच्च न्यायालयों सहित) की वेबसाइटों को S3WaaS प्लेटफॉर्म (सुरक्षित, स्केलेबल और सुगम्य वेबसाइट एक सेवा के रूप में) पर स्थानांतरित किया गया है, जो वेबसाइट को दिव्यांगजनों के लिए अनुकूल बनाता है। S3WaaS प्लेटफॉर्म में आंशिक और पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित नागरिकों के लिए सामग्री की आसान दृश्यता की विशेषताएं मौजूद हैं।

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने यह जानकारी आज लोकसभा में दी।

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पीके/केसी/आईएम/एसके

                                                           


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