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पावरलूम उद्योग के आधुनिकीकरण की योजनाएं

प्रविष्टि तिथि: 06 FEB 2026 3:17PM by PIB Delhi

देश के संपूर्ण पावरलूम क्षेत्र, जिसमें भिवंडी, इचलकरंजी और मालेगांव के क्षेत्र भी शामिल हैं, के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा कई पहलें की गई हैं:

(i) व्यापक पावरलूम क्लस्टर विकास योजना (सीपीसीडीएस): मौजूदा (ब्राउनफील्ड) पावरलूम क्लस्टरों के समग्र सुधार के उद्देश्य से, सरकार प्रत्येक स्वीकृत पावरलूम मेगा क्लस्टर परियोजना के लिए अधिकतम 50 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह योजना अब वस्त्र क्लस्टर विकास योजना (टीसीडीएस) के अंतर्गत समाहित कर ली गई है और सहायता केवल प्रतिबद्ध देनदारियों को पूरा करने के लिए चल रही परियोजनाओं को पूरा करने हेतु प्रदान की जाती है। व्यापक पावरलूम क्लस्टर विकास योजना के अंतर्गत, इचलकरंजी पावरलूम मेगा क्लस्टर को वर्ष 2012 में स्वीकृत किया गया था। भारत सरकार द्वारा इचलकरंजी पावरलूम मेगा क्लस्टर को वित्तीय सहायता के रूप में 44.85 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

(ii) पॉवरटेक्स इंडिया योजना: विकेंद्रीकृत पॉवरलूम क्षेत्र की क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से, पॉवरटेक्स इंडिया योजना अखिल भारतीय स्तर पर शुरू की गई थी, जिसका परिव्यय वर्ष 2017-20 की अवधि के लिए 487 करोड़ रुपये था, जिसे वर्ष 2021 तक बढ़ाया गया था। यह योजना अब वस्त्र क्लस्टर विकास योजना (टीसीडीएस) के अंतर्गत समाहित है और केवल प्रतिबद्ध देनदारियों को पूरा करने के लिए चल रही परियोजनाओं को पूरा करने हेतु सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत इचलकरंजी क्लस्टर, भिवंडी क्लस्टर और मालेगांव क्लस्टर में पॉवरलूम इकाइयों को क्रमशः 11.58 करोड़ रुपये, 58.08 करोड़ रुपये और 12.28 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

(iii) संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (एटीयूएफएस): इस योजना के अंतर्गत, देश भर में स्थित इकाइयों को वस्त्र क्षेत्र के विभिन्न खंडों (कताई को छोड़कर) में मानकीकृत मशीनरी की खरीद के लिए ऋण-आधारित पूंजी निवेश सब्सिडी (सीआईएस) प्रदान की जाती है। इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और लघु वस्त्र निर्माण इकाइयां शामिल हैं। योजना की वैधता 31 मार्च, 2022 तक थी। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत केवल प्रतिबद्ध देनदारियों का ही प्रावधान है। इस योजना के अंतर्गत इचलकरंजी, भिवंडी और मालेगांव में 1234 इकाइयों को 262.04 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।

(iv) वस्त्र क्लस्टर विकास योजना (टीसीडीएस):- इस योजना के अंतर्गत वस्त्र अनुसंधान संघों (टीआरए) और राज्य सरकार के एकीकृत वस्त्र एवं परिधान विकास केंद्रों (आईटीएडीएसी) - पूर्ववर्ती पॉवरलूम सेवा केंद्र) को अनुदान सहायता प्रदान की जाती है। भिवंडी क्लस्टर में दो वस्त्र एवं परिधान विकास केंद्रों और इचलकरंजी एवं मालेगांव क्लस्टर में एक-एक वस्त्र एवं परिधान विकास केंद्र हैं। ये वस्त्र एवं परिधान विकास केंद्रों इन क्लस्टरों में पॉवरलूम उद्योग को परीक्षण, तकनीकी परामर्श और समस्या निवारण सेवाएं प्रदान करते हैं। पिछले तीन वर्षों में इन क्लस्टरों में 1433 बुनकरों को प्रशिक्षण दिया गया है।

(v) इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र सरकार महाराष्ट्र प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (एमएएचए_टीयूएफएस) लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य महाराष्ट्र में पावरलूमों को, जिनमें भिवंडी, इचलकरंजी और मालेगांव शामिल हैं, निर्दिष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए पात्र इकाइयों को विभिन्न प्रोत्साहनों के माध्यम से निवेश, उत्पादकता, गुणवत्ता, रोजगार और निर्यात बढ़ाने में सुविधा प्रदान करना है।

वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एचएन/एमपी

 


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