ग्रामीण विकास मंत्रालय
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डीएवाई-एनआरएलएम में ग्रामीण परिवारों का समावेशन

प्रविष्टि तिथि: 06 FEB 2026 6:05PM by PIB Delhi

दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) ने देश भर में 10.05 करोड़ ग्रामीण गरीब परिवारों को 90.90 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित किया है, जिसमें झारखंड ने 35.90 लाख ग्रामीण गरीब परिवारों को 2.92 लाख एसएचजी में संगठित किया है।

बैंक शाखाओं में बैंक सखियों की तैनाती से डीएवाई-एनआरएलएम के तहत बैंक ऋण तक पहुंच में वृद्धि हुई है। बैंक सखियों द्वारा सामान्यतः निम्नलिखित गतिविधियां की जाती हैं:

(i) बैंक सखी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और स्वयं सहायता समूह के व्यक्तिगत सदस्यों के बचत बैंक खाता खोलने के लिए दस्तावेजीकरण संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करने में सहायता करती है।

(ii) बैंक सखियां बैंक लिंकेज के लिए पात्र स्वयं सहायता समूहों की सूची तैयार करती हैं और ऋण आवेदनों को जमा करने में सुविधा प्रदान करती हैं, जिसमें ऋण के लंबित आवेदनों की समीक्षा/सुधार और अनुवर्ती कार्रवाई शामिल है।

(iii) बैंक सखियां बैंक ऋणों के नियमित पुनर्भुगतान को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और स्वयं सहायता समूह बैंक लिंकेज में एनपीए को कम करने में मदद करती हैं।

अब तक देश में 50,548 बैंक सखियों को तैनात किया जा चुका है, जिन्होंने 2013-14 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक महिला स्वयं सहायता समूहों को 12.18 लाख करोड़ रुपये के बैंक ऋण तक पहुंच प्राप्त करने में मदद की है।

दिसंबर 2025 तक, डीएवाई-एनआरएलएम के तहत उद्यम प्रोत्साहन के लिए समर्पित उप-योजना, स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (एसवीईपी) के अंतर्गत 5.88 लाख उद्यमों को सहायता प्रदान की गई है।

ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज राज्यसभा में लिखित उत्‍तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एसकेएस/केके


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