महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
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किशोर न्याय अधिनियम संकटग्रस्त परिस्थितियों में बच्चों का समग्र कल्याण सुनिश्चित करने हेतु सेवा-प्रदाय संरचनाओं का एक सुरक्षा तंत्र उपलब्ध कराता है


महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इस अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय है

प्रविष्टि तिथि: 06 FEB 2026 3:42PM by PIB Delhi

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के क्रियान्वयन हेतु नोडल मंत्रालय है, जो देश में बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण के लिए प्राथमिक विधिक ढांचा है। यह अधिनियम संकटग्रस्त परिस्थितियों में बच्चों का समग्र कल्याण सुनिश्चित करने हेतु संस्थागत एवं गैर-संस्थागत देखभाल सहित सेवा-प्रदाय संरचनाओं का एक सुरक्षा तंत्र उपलब्ध कराता है। इस अधिनियम का क्रियान्वयन राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के दायित्व में निहित है।

किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 107 के अंतर्गत, प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को प्रत्येक ज़िले एवं शहर में विशेष किशोर पुलिस इकाई (स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट—एसजेपीयू) का गठन करना अनिवार्य है, जिसका प्रमुख पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) से नीचे के पद का नहीं होना चाहिए। साथ ही, प्रत्येक पुलिस थाने में एक अधिकारी, जो पद में सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) से नीचे नहीं होना चाहिए, को बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के रूप में नामित किया जाना अनिवार्य है।

इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को प्रत्येक ज़िले एवं शहर में विशेष किशोर संरक्षण इकाई (स्पेशल जुवेनाइल प्रोटेक्शन यूनिट—एसजेपीयू) की स्थापना हेतु परामर्श जारी किया है। ज़िलों में स्थापित विशेष किशोर संरक्षण इकाइयों (एसजेपीयू) से संबंधित आँकड़ों का केंद्रीय स्तर पर संधारण नहीं किया जाता है।

यह जानकारी केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी द्वारा आज लोक सभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।

 

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पीके/केसी/पीके

 


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