भारी उद्योग मंत्रालय
ऑटोमोटिव और भारी इंजीनियरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देना
प्रविष्टि तिथि:
06 FEB 2026 5:44PM by PIB Delhi
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एस आई ए एम) से प्राप्त जानकारी के अनुसार ऑटोमोबाइल क्षेत्र देश के जीएसटी राजस्व संग्रह में लगभग 15% का योगदान देता है। यह क्षेत्र देश में एक महत्वपूर्ण रोजगार प्रदत्ता भी है। इसमें संपूर्ण ऑटोमोटिव मूल्य श्रृंखला में अनुमानित 300 लाख नौकरियां (प्रत्यक्ष: 42 लाख, अप्रत्यक्ष: 265 लाख) हैं। जनवरी से दिसंबर 2025 के दौरान भारत में ऑटोमोबाइल का उत्पादन, बिक्री और निर्यात इस प्रकार है: -
भारत में ऑटोमोबाइल का उत्पादन, बिक्री और निर्यात (जनवरी-दिसंबर 2025)
(लाख में संख्या) (स्रोत: एसआईएएम)
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श्रेणी
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उत्पादन
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बिक्री
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निर्यात
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यात्री वाहन
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53.8
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44.9
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8.6
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वाणिज्यिक वाहन
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11.1
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10.3
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0.9
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तीन पहिया वाहन
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12.2
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7.9
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4.3
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टू व्हीलर
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255.0
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205.0
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49.4
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इसके अलावा वर्तमान अनुमानों के अनुसार पूंजीगत वस्तु उद्योग सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 1.9% का योगदान देता है। यह क्षेत्र राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण से घरेलू विनिर्माण क्षमताओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए क्षेत्र के उत्पादन, आयात और निर्यात- आंकड़े निम्न हैं: -
(आंकड़े करोड़ रुपये में)
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क्रम संख्या
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पूंजीगत वस्तुओं के उप-क्षेत्र
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उत्पादन
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आयात
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निर्यात
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1
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मशीन टूल्स
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14,286
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18,686
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1,472
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2
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डाई, साँचे और प्रेस उपकरण
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18,400
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9,400
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2,300
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3
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कपड़ा मशीनरी
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10,461
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16,417
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2,242
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4
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मुद्रण मशीनरी
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29,716
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12,651
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2,584
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5
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अर्थमूविंग और माइनिंग मशीनरी
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80,750
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4,250
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6,800
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6
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प्लास्टिक प्रासेसिंग मशीनरी
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4,827
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4,405
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2,428
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7
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फूड प्रासेसिंग मशीनरी
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15,249
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10,850
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4,562
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8
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प्रक्रिया संयंत्र उपकरण
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31,505
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7,645
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10,968
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(स्रोत: उद्योग संघ अर्थात, आईएमटीएमए, टीएजीएमए, टीएमएमए, आईपीएएमए, आईसीईएमए, पीएमएमएआई, एएफटीपीएआई, पीपीएमएआई)
उद्योग राज्य का विषय है और केन्द्र सरकार राजस्थान राज्य सहित देश के किसी भी भाग में भारी उद्योगों के विकास से संबंधित नहीं है। इसके अलावा भारी उद्योग मंत्रालय की किसी भी योजना के अंतर्गत कोई राज्य-वार आबंटन नहीं किया गया है।
भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई योजनाएं लागू की हैं। विवरण नीचे दिया गया है:
- भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग (पीएलआई-ऑटो) के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना: सरकार ने 15.09.2021 को ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए 25,938 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (एएटी) उत्पादों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इस योजना को मंजूरी दी। इस योजना में न्यूनतम 50% घरेलू मूल्यवर्धन (डीवीए) के साथ एएटी उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और ऑटोमोटिव विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में निवेश को आकर्षित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन का प्रस्ताव है।
- 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ यह योजना ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू, ई-ट्रक, ई-एम्बुलेंस और ई-बसों के लिए अनुदान के लिए मांग प्रोत्साहन प्रदान करती है और चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देती है।
- भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए योजना (एस पी एम ई पी सी आई): भारत में इलेक्ट्रिक कारों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए इस योजना को 15.03.2024 को अधिसूचित किया गया था। इसके लिए आवेदकों को न्यूनतम 4150 करोड़ रूपये का निवेश करना होगा और तीसरे वर्ष के अंत में न्यूनतम 25% डीवीए और पांचवें वर्ष के अंत में 50% का डीवीए प्राप्त करना होगा।
- उन्नत रसायन विज्ञान सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए पीएलआई योजना: सरकार ने 12.05.2021 को 18,100 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ देश में एसीसी के निर्माण के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य एसीसी बैटरी के 50 गीगावॉट के लिए एक प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम स्थापित करना है।
पीएलआई ऑटो और ऑटो कंपोनेंट योजना को अखिल भारतीय आधार पर लागू किया गया है और राजस्थान राज्य में अनुमोदित आवेदकों द्वारा 8 विनिर्माण स्थानों की सूचना दी गई है।
पीएलआई एसीसी योजना एक राष्ट्रीय कार्यक्रम होने के कारण सेल विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए विशेष स्थानों को परिभाषित नहीं करती है। लाभार्थी फर्म रणनीतिक व्यावसायिक आवश्यकताओं, बुनियादी ढांचे और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर अपने पसंदीदा स्थानों का चयन कर सकती हैं। इससे पूरे भारत में सुविधाएं स्थापित करने में लचीलापन सुनिश्चित हो सकता है। वर्तमान में पीएलआई एसीसी योजना के अंतर्गत राजस्थान में कोई विनिर्माण इकाई नहीं है।
यह जानकारी भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2224796)
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