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प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष (एएमएएसआर) अधिनियम के अंतर्गत प्रावधान

प्रविष्टि तिथि: 09 FEB 2026 3:51PM by PIB Delhi

प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 (एएमएएसआर अधिनियम) की धारा 20ए और 20बी के अनुसार, सभी संरक्षित स्मारकों और संरक्षित क्षेत्रों (स्थलों) के चारों ओर एक समान 100 मीटर निषिद्ध क्षेत्र और 200 मीटर विनियमित क्षेत्र निर्धारित किया गया है।

एएमएएसआर अधिनियम की धारा 20ई प्रत्येक संरक्षित स्मारक और संरक्षित क्षेत्र (स्थलों) के लिए विरासत उपनियम बनाने का प्रावधान करती है, ताकि निषिद्ध और विनियमित क्षेत्रों के भीतर तर्कसंगत और संदर्भ-विशिष्ट विरासत नियंत्रण निर्धारित किए जा सकें। ये नियंत्रण उनके महत्व और संवेदनशीलता पर आधारित हैं और विरासत संरक्षण के विकास की आवश्यकताओं और आस-पास के निवासियों की आजीविका के साथ संतुलित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

एएमएएसआर अधिनियम संरक्षित स्मारक और संरक्षित क्षेत्रों (स्थलों) के विनियमित क्षेत्र के भीतर स्थित किसी भी भवन या संरचना की मरम्मत या नवीनीकरण के लिए पूर्व अनुमति का प्रावधान करता है। ऐसे कार्य मौजूदा वैधानिक ढांचे के अंतर्गत शासित होते हैं।

राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण ऑनलाइन आवेदन  प्रणाली (एनओएपीएस) पोर्टल को आवेदनों के ऑनलाइन  के लिए 2015 में शुरू किया गया था। इसे 14 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के साथ एकीकृत किया गया है, जिसमें एकल खिड़की प्रणाली के अंतर्गत चार शहरी स्थानीय निकाय और गैर-एकल खिड़की प्रणाली के अंतर्गत 1,407 शहरी स्थानीय निकाय शामिल हैं।

यह पोर्टल इसरो के भुवान पोर्टल और (एसएमएआरएसी)  मोबाइल ऐप के साथ एकीकृत है, जिससे आवेदनों को ऑनलाइन जमा करने की प्रक्रिया सुगम हो जाती है। यह राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (एनएसडब्ल्यूएस) के साथ भी एकीकृत है और औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डी आई पी पी ) द्वारा अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने तथा आवेदनों के समयबद्ध प्रसंस्करण को सुनिश्चित करने के लिए मान्यता प्राप्त है।

यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एनकेएस/


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