इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
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केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने बेंगलुरु में क्वालकॉम में 2 एनएम सेमीकंडक्टर चिप का शुभारंभ किया।


जैसे-जैसे पाँचवीं औद्योगिक क्रांति उभर रही है, यह महत्वपूर्ण है कि सरकार, उद्योग और शैक्षणिक क्षेत्र मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करें जहाँ गहन प्रौद्योगिकीय नवाचार भारत से उत्पन्न हो

प्रविष्टि तिथि: 07 FEB 2026 7:39PM by PIB Delhi

हमारा पहला फोकस डिज़ाइन कंपनियों और स्टार्टअप्स पर होगा। दूसरा फोकस पूरे इकोसिस्टम को भारत में लाने पर होगा। तीसरा फोकस उच्च क्षमताओं के साथ टैलेंट बेस को मज़बूत करने पर होगा।

माननीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, श्री अश्विनी वैष्णव ने क्वालकॉम 2 एनएम सेमीकंडक्टर चिप का शुभारंभ किया, जो उन्नत सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और वैश्विक इंजीनियरिंग संचालन में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका का प्रतीक है। माननीय मंत्री ने मुख्य संभाषण दिया और कहा – “मैं इस प्रगति को देखकर बहुत खुश हूँ। हमारे देश में विशाल प्रतिभा होने के कारण पूरा विश्व हमारी तरफ़ आशा से देख रहा है। अगली स्तर की उपलब्धियाँ भारत से ही आएँगी।”

श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “हम पूरे वैश्विक समुदाय में बड़ा अंतर ला सकते हैं। हम ऐसा देश हैं जो सह-निर्माण और सह-विकास में विश्वास रखता है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री के निर्णायक नेतृत्व ने हमारे देश में सेमीकंडक्टर मिशन का यह नया अध्याय हमें दिया है।” यह कहानी बहुत पहले 1960 के दशक में शुरू हुई थी, जब इंटेल की उत्पत्ति, फेयरचाइल्ड समूह ने भारत में सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित करनी चाही। लेकिन उस समय की सरकार ने सेमीकंडक्टर चिप्स के महत्व को वास्तव में समझा ही नहीं।

हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने महत्व को समझा और पहली सेमीकंडक्टर मशीन की शुरुआत की। हमने पहले कुछ यूनिट्स को चालू करने का एक व्यवस्थित कार्यक्रम अपनाया और कम से कम एक सेमीकंडक्टर फैब स्थापित किया। हमने 28 नैनोमीटर से शुरुआत की क्योंकि यह लगभग 75% आवश्यकताओं को कवर करेगा, जिसमें ऑटोमोटिव, टेलीकॉम, पावर मैनेजमेंट और रणनीतिक आवश्यकताएँ शामिल हैं।

मंत्री महोदय ने आगे कहा, हमने अच्छी प्रगति की है – 10 यूनिट्स निर्माणाधीन हैं। इनमें से 4 ने हाल ही में प्रायोगिक उत्पादन शुरू किया है। ये ग्राहकों से अपने उत्पादों की योग्यता साबित करवा रही हैं और उन्‍हें मान्य करवा रही हैं। जल्द ही हमारी पहली यूनिट वाणिज्यिक उत्पादन के साथ तैयार होगी।

 

साल 2022 से अब तक की  एक संक्षिप्त समयावधि में, हमारे पास ऐसे 315 विश्वविद्यालय हो गए हैं जहाँ साइनोप्सिस, कैडेंस या सीमेंस के सभी महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल्स छात्रों द्वारा चिप्स डिज़ाइन करने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। दूरदराज के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र चिप्स डिज़ाइन कर रहे हैं और उन्‍हें वास्तविक कार्यशील प्रक्रिया के अनुसार मान्य करवाने के लिए टेप आउट करवा रहे हैं। एक विशाल टैलेंट पाइपलाइन तैयार हो रही है, जो हमें वह महत्वपूर्ण शक्ति और लाभ प्रदान करेगी, जिसके लिए हमारा देश जाना जाता रहा है।

आगे बढ़ते हुए, हम इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 को एक अलग दृष्टिकोण के साथ शुरू करेंगे। आईएसएम 1.0 में, फोकस पहले कुछ सेमीकंडक्टर असेम्बली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) सुविधाओं को स्थापित करने, इकोसिस्टम तैयार करने और टैलेंट पाइपलाइन शुरू करने पर था। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 में, पहला फोकस डिज़ाइन कंपनियों और स्टार्टअप्स पर होगा जो एक उत्पाद डिज़ाइन कर सकें और उसे बाजार में उतार सकें। दूसरा फोकस पूरे इकोसिस्टम, जिसमें उपकरण निर्माता, रसायन और गैस निर्माता, और मान्यता व परीक्षण शामिल हैं, को भारत में लाने पर होगा। तीसरा फोकस टैलेंट बेस को मज़बूत करने पर होगा। अब जब टैलेंट पाइपलाइन व्यापक हो गई है, हमारा फोकस विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी करके विभिन्न क्षेत्रों में समाधान विकसित करने पर होगा।

 

मंत्री महोदय ने कहा, “जैसे-जैसे पाँचवीं औद्योगिक क्रांति उभर रही है, यह महत्वपूर्ण है कि सरकार, उद्योग और शैक्षणिक क्षेत्र मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार करें जहाँ गहन प्रौद्योगिकीय नवाचार भारत से उत्पन्न हो। हमें पूरी दुनिया को अधिक मूल्य प्रदान करने में सक्षम होना चाहिए। तब हमारी वह शक्ति, जो कई वर्षों से मौज़ूद रही है, बड़ी शक्ति के रूप में बनी रहेगी।”

इसके लिए, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों और कर्मचारियों को वे सही कौशल प्राप्त हों जो दुनिया को समाधान प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं। उद्योग और शैक्षणिक क्षेत्र को प्रासंगिक पाठ्यक्रम विकसित करने चाहिए और कर्मचारियों की अपस्किलिंग और रीस्किलिंग की जानी चाहिए। इससे हमारे देश के लिए नए अवसर उत्पन्न होंगे।

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पीके/केसी/पीके


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