वस्त्र मंत्रालय
वस्त्र उद्योग पर प्रभाव
प्रविष्टि तिथि:
10 FEB 2026 1:51PM by PIB Delhi
घरेलू वस्त्र एवं परिधान उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए किए गए कई सुधारों की वजह से, रेडीमेड गारमेंट्स समेत वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में भारत की आयात पर निर्भरता अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 13.9% कम हुई है। इस अवधि के दौरान, बांग्लादेश से रेडीमेड गारमेंट्स समेत वस्त्र एवं परिधान का भारत का इम्पोर्ट 705.4 मिलियन अमरीकी डॉलर का था।
वर्ष 2024 में भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा वस्त्र एवं परिधान का निर्यातक रहा। भारत ने अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान 27312.7 मिलियन अमरीकी डॉलर का निर्यात किया है। इस दौरान भारतीय वस्त्र एवं परिधान के निर्यात में आयातक स्थानों की संख्या बढ़ी और यह 100 से ज़्यादा दर्ज की गई, जो विश्व बाजार में भारत की बढ़ती हुई पहुंच और निर्यात में विविधता को दिखाता है। भारत सरकार ने टेक्सटाइल और कपड़ों के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा देने के लिए कई विशेष नीतियों और कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है।
भारत ने विभिन पक्षों के साथ 16 मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें हाल ही में किया गया इंडिया-ओमान मुक्त व्यापार समझौता भी शामिल है, और न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार पर बातचीत पूरी कर ली है। इन मुक्त व्यापार समझौतों का उद्देश्य शुल्क और गैर शुल्क की रुकावटों को कम करना, व्यापार प्रक्रिया को आसान बनाना और ढांचागत समस्याओं को दूर करना है, जिससे बाजार बेहतर हो और साझेदार बाजारों में भारत का निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी हो।
वस्त्र क्षेत्र के लिए जो बड़ी योजनाएं और पहल शुरू की गईं उनमें शामिल हैं पी एम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन्स एंड अपैरल (पी एम मित्र) पार्क्स स्कीम, ताकि एक आधुनिक, एकीकृत, विश्व स्तरीय अवसंरचना बनाया जा सके; प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पी अल आई) स्कीम जो एम एम एफ वस्त्र, एम एम एफ परिधान और टेक्निकल टेक्सटाइल पर फोकस करती है ताकि बड़े पैमाने पर विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके; नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन जो अनुसंधान नवाचार और विकास, प्रोत्साहन और बाजार विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है; समर्थ – वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए योजना जिसका उद्देश्य मांग आधारित, प्लेसमेंट पर आधारित, कौशल कार्यक्रम देना है; सेरीकल्चर वैल्यू चेन के समग्र विकास के लिए सिल्क समग्र-2; हैंडलूम सेक्टर को शुरू से अंत तक सपोर्ट देने के लिए राष्ट्रीय हैंडलूम विकास कार्यक्रम। कपड़ा मंत्रालय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम और व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना भी लागू कर रहा है। सरकार ने निर्यातकों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (सी जी एस ई) को मंजूरी दे दी है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एन सी जी टी सी) सदस्य ऋण संस्थानों (एम अल आई) को 100% क्रेडिट गारंटी कवरेज प्रदान करेगी, ताकि एम एस एम ई सहित योग्य निर्यातकों को अतिरिक्त क्रेडिट सुविधाएं दी जा सकें।
यह जानकारी कपड़ा राज्य मंत्री श्री पवित्रा मार्गेरिटा ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/डीटी
(Lok Sabha US Q1686)
(रिलीज़ आईडी: 2225883)
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