सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
महिला श्रम बल सहभागिता दर में वृद्धि जारी, बेरोजगारी दर में गिरावट आई
कुल श्रमिक जनसंख्या अनुपात में वृद्धि, स्वरोजगार में मामूली बढोतरी
प्रविष्टि तिथि:
10 FEB 2026 4:00PM by PIB Delhi
- 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए समग्र श्रम बल सहभागिता दर अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान बढ़कर 55 दशमलव 8 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 55 दशमलव 1 प्रतिशत थी।
- महिला श्रम बल सहभागिता दर (15 वर्ष और उससे अधिक आयु) में अक्टूबर-दिसंबर 2025 में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई जो 34 दशमलव 9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जबकि जुलाई-सितंबर 2025 के दौरान यह 33 दशमलव 7 प्रतिशत थी।
- 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए श्रमिक जनसंख्या अनुपात जुलाई-सितंबर 2025 में 52 दशमलव 2 प्रतिशत से बढ़कर अक्टूबर-दिसंबर 2025 में 53दशमलव 1 प्रतिशत हो गया।
- अप्रैल-जून 2025 से अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान दोनों लिंगों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए ग्रामीण श्रमिक जनसंख्या अनुपात में लगातार उर्ध्वतर रुझान जारी रहा।
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर (यूआर) में गिरावट आई है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार में जुटे श्रमिकों की हिस्सेदारी अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान बढ़कर 63 दशमलव 2 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 62 दशमलव 8 प्रतिशत थी।
- ग्रामीण रोजगार में कृषि क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी बनी रही। अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के नियोजित व्यक्तियों में से 58 दशमलव 5 प्रतिशत कृषि क्षेत्र से संबंधित हैं, जो जुलाई-सितंबर 2025 में 57दशमलव 7 प्रतिशत से अधिक है।
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प्रस्तावना
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा आयोजित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस), कार्यबल गतिविधियों में भागीदारी और रोजगार-बेरोजगारी की स्थिति पर आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत है। जनवरी 2025 से पीएलएफएस सर्वेक्षण पद्धति को संशोधित किया गया है ताकि वर्तमान साप्ताहिक नियोजन स्थिति (सीडब्ल्यूएस) ढांचे के तहत ग्रामीण और शहरी भारत दोनों के लिए श्रम बल संकेतकों के मासिक और त्रैमासिक अनुमान प्रदान किए जा सकें।
व्यापकता के साथ उच्च आवृत्ति के श्रम बल संकेतक की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की नमूना पद्धति को जनवरी 2025 से संशोधित किया गया। पुनर्रचित पीएलएफएस का उद्देश्य निम्नलिखित लक्ष्य प्राप्त करना है:
- अखिल भारतीय स्तर पर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए हर महीने रोजगार और बेरोजगारी के प्रमुख संकेतक वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) के तहत श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर), श्रमिक जनसंख्या अनुपात (श्रमिक जनसंख्या अनुपात) और बेरोजगारी दर (यूआर)
- त्रैमासिक पीएलएफएस परिणामों को ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित करना, जिससे सीडब्ल्यूएस ढांचे के तहत ग्रामीण और शहरी भारत दोनों के लिए श्रम बाजार संकेतकों के त्रैमासिक अनुमान तैयार किए जा सकें।
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए सामान्य स्थिति और वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) दोनों में प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों के वार्षिक अनुमान प्रदान करना।
इससे पूर्व दिसंबर 2024 तक जारी पीएलएफएस के त्रैमासिक बुलेटिनों में केवल शहरी क्षेत्रों के श्रम बाजार संकेतक प्रस्तुत किए जाते थे। अप्रैल-जून 2025 का बुलेटिन इस श्रृंखला का पहला बुलेटिन था जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के अनुमान प्रदान किए गए और अक्टूबर-दिसंबर 2025 का मौजूदा बुलेटिन इस श्रृंखला का तीसरा बुलेटिन है। इस त्रैमासिक बुलेटिन में, श्रमिकों की संख्या का पूर्ण अनुमान प्रदान करने का प्रयास किया गया है ।
यह त्रैमासिक बुलेटिन अखिल भारतीय स्तर पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग, वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) में प्रमुख श्रम बल संकेतकों – श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर), श्रमिक जनसंख्या अनुपात (श्रमिक जनसंख्या अनुपात), बेरोजगारी दर (यूआर), और व्यापक रोजगार स्थिति और कार्य उद्योग के अनुसार श्रमिकों के वितरण – के अनुमान प्रस्तुत करता है। इसके अतिरिक्त, चयनित राज्यों के लिए सीडब्ल्यूएस में एलएफपीआर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात और यूआर के राज्य-स्तरीय अनुमान भी प्रदान किए जाते हैं।
सीडब्ल्यूएस के बाद 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए प्रमुख निष्कर्ष:
- श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर) में मामूली वृद्धि देखी गई: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की समग्र एलएफपीआर अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान बढ़कर 55 दशमलव 8 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 55 दशमलव 1 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की एलएफपीआर इस तिमाही में बढ़कर 58 दशमलव 4 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई-सितंबर 2025 के दौरान 57 दशमलव 2 प्रतिशत। शहरी क्षेत्रों में इसी आयु वर्ग की एलएफपीआर अप्रैल-जून 2025 से अक्टूबर-दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान लगभग स्थिर रही।

- महिला श्रम बल सभागिता दर में वृद्धि का रुझान दिखा: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के महिला श्रम बल सभागिता दर (एलएफपीआर) में वृद्धि का रुझान रहा, जो पिछली तिमाही के 33 दशमलव 7 प्रतिशत से बढ़कर अक्टूबर-दिसंबर 2025 में 34 दशमलव 9 प्रतिशत हो गया। यह बढ़ोतरी ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम बल सभागिता दर में हुई वृद्धि के कारण हुई, जो जुलाई-सितंबर 2025 की तिमाही में 37 दशमलव 5 प्रतिशत से बढ़कर अक्टूबर-दिसंबर 2025 में 39दशमलव 4 प्रतिशत हो गया। हालांकि, शहरी क्षेत्रों में एलएफपीआर स्थिर रहा।

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महिला एलएफपीआर में वृद्धि का रुझान देखा गया, जो जुलाई-सितंबर 2025 में 33 दशमलव 7 प्रतिशत से बढ़कर अक्टूबर-दिसंबर 2025 में 34 दशमलव 9 प्रतिशत हो गया।
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- कार्यबल में वृद्धि: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों का समग्र श्रमिक जनसंख्या अनुपात अक्टूबर-दिसंबर 2025 में बढ़कर 53 दशमलव 1 प्रतिशत हो गया, जबकि जुलाई-सितंबर 2025 में यह 52 दशमलव 2 प्रतिशत था। यह वृद्धि मुख्य तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यबल में व्यक्तियों की बढ़ती भागीदारी से हुई। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं का समग्र श्रमिक जनसंख्या अनुपात अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही के दौरान पिछली दो तिमाहियों की तुलना में लगातार बेहतर हुआ है, जो कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी में सकारात्मक परिवर्तन दर्शाता है।
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15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों की कुल कार्य प्रतिशत दर अक्टूबर-दिसंबर 2025 में बढ़कर 53 दशमलव 1 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 52 दशमलव 2 प्रतिशत थी।
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बेरोजगारी दर में गिरावट: ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की बेरोजगारी दर अक्टूबर-दिसंबर 2025 में घटकर 4दशमलव 0 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 4 दशमलव 4 प्रतिशत थी। यह गिरावट ग्रामीण पुरुष और महिला दोनों की बेरोजगारी दर में कमी के कारण हुई। शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की बेरोजगारी दर पिछली तिमाही के 6 दशमलव 9 प्रतिशत की तुलना में घटकर 6 दशमलव 7 प्रतिशत हो गई। यह गिरावट शहरी पुरुषों की बेरोजगारी दर में कमी के कारण हुई, जो जुलाई-सितंबर 2025 में 6दशमलव 2 प्रतिशत से घटकर चालू तिमाही में 5दशमलव 9 प्रतिशत हो गई।

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अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में कमी आई।
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- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वरोजगार में बढ़ोतरी : ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के स्वरोजगार प्राप्त व्यक्तियों की संख्या अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान बढ़कर 63 दशमलव 2 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही जुलाई-सितंबर 2025 में दर्ज 62 दशमलव 8 प्रतिशत से अधिक है। शहरी क्षेत्रों में, इसी आयु वर्ग के स्वरोजगार व्यक्तियों की संख्या अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान 39 दशमलव 7 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि जुलाई-सितंबर 2025 के दौरान यह 39 दशमलव 3 प्रतिशत थी।


- प्राथमिक क्षेत्र में ग्रामीण कार्यबल और तृतीयक क्षेत्र में शहरी कार्यबल सघनता: ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व स्थिति रही, जहां अधिकांश श्रमिक कृषि क्षेत्र में कार्यरत थे। अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान इनकी संख्या 58 दशमलव 5 प्रतिशत रही, जो पिछली तिमाही के 57 दशमलव 7 प्रतिशत से अधिक है। शहरी क्षेत्रों में तृतीयक क्षेत्र स्थिर रहा और अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान 61 दशमलव 9 प्रतिशत श्रमिक इस क्षेत्र में कार्यरत थे।


स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुमानित जनसंख्या आंकड़ों का उपयोग करते हुए, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों की कुल संख्या का अनुमान लगाया गया है। 2025 की जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान, देश में औसतन 56 दशमलव 2 करोड़ व्यक्ति कार्यरत थे, जिनमें 39 दशमलव 6 करोड़ पुरुष और 16 दशमलव 6 करोड़ महिलाएं थीं। अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान यह संख्या बढ़कर 57 दशमलव 4 करोड़ हो गई, जिनमें से 40 दशमलव 2 करोड़ पुरुष और 17 दशमलव 2 करोड़ महिलाएं थीं।
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अखिल भारतीय स्तर पर, त्रैमासिक अनुमान कुल 5,61,108 व्यक्तियों के सर्वेक्षण से एकत्रित जानकारी पर आधारित हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वेक्षण किए गए व्यक्ति
3,21,040
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शहरी क्षेत्रों में सर्वेक्षण किए गए व्यक्ति
2,40,068
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अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के लिए त्रैमासिक बुलेटिन मंत्रालय की वेबसाइट (https://www.mospi.gov.in)पर उपलब्ध है।
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