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भारत में एआई अब सबके लिए
एआई पहुंच का राष्ट्रव्यापी विस्तार: संसाधन, कौशल और तकनीकी क्रांति
प्रविष्टि तिथि:
10 FEB 2026 2:25PM by PIB Delhi

प्रमुख बिंदु
- 38,000 से अधिक GPUs ₹65/घंटे की दर पर उपलब्ध, इससे किफायती एआई पहुँच को बढ़ावा मिला
- 5G अब 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध, पूरे भारत में स्केलेबल एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को नई शक्ति दे रहा है
- एआईकोश (AIKosh) साझा राष्ट्रीय संसाधन के रूप में 7,500+ डेटासेट और 273 मॉडल प्रदान करता है
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परिचय
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत की विकास यात्रा का एक केंद्रीय स्तंभ बन गया है। यह गवर्नेंस को सुदृढ़ कर रहा है, सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में सुधार ला रहा है और ऐसे समाधानों को सक्षम बना रहा है जो व्यापक स्तर पर नागरिकों तक पहुँच सकें। मानव प्रगति को हमेशा तकनीक ने आकार दिया है। बिजली ने दैनिक जीवन और कार्यशैली को बदला, कंप्यूटर ने सूचनाओं के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के तरीके को बदल दिया, इंटरनेट ने सीमाओं के पार लोगों और प्रणालियों को जोड़ा और मोबाइल फोन ने तकनीक को सीधे नागरिकों के हाथों में पहुँचा दिया। एआई इन्हीं आधारों पर निर्मित हुआ है और अब कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, मैन्युफैक्चरिंग, जलवायु संरक्षण और गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों को बदलने के लिए मनुष्यों के साथ मिलकर काम कर रहा है। भारत के लिए, एआई सबकी पहुँच में हो यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है कि इसके लाभ व्यापक रूप से साझा किए जाएँ और 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हों।
एआई को आम जन के लिए सुलभ कराना मुख्य रूप से कंप्यूटिंग शक्ति, डेटा रिपॉजिटरी और मॉडल इकोसिस्टम तक समान पहुँच पर निर्भर करता है। आज के समय में ये संसाधन ही यह तय करते हैं कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में कौन नवाचार कर सकता है, कौन प्रतिस्पर्धा में टिक सकता है और कौन प्रभावी ढंग से गवर्नेंस कर सकता है। भारत का विकास-केंद्रित दृष्टिकोण एआई रणनीति के मूल में इस सुलभता को रखता है, जिससे देश के विभिन्न क्षेत्रों के स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, सार्वजनिक संस्थानों और नवप्रवर्तकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है।
इसी विजन को आगे बढ़ाते हुए, 'इंडिया–एआई इम्पैक्ट समिट 2026' का आयोजन 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा। ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला यह पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन होगा। यह समिट वैश्विक लीडर्स, नीति निर्माताओं, टेक्नोलॉजी कंपनियों, नवप्रवर्तकों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा, ताकि समावेशी विकास, गवर्नेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर चर्चा और उसका प्रदर्शन किया जा सके।
एआई का डेमोक्रेटाइजेशन क्या है?
एआई के डेमोक्रेटाइजेशन का अर्थ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को उपयोगकर्ताओं के एक विस्तृत और विविध समूह के लिए सुलभ, किफायती और उपयोगी बनाना है। यह केवल बने-बनाए ऐप्स तक पहुँच प्रदान करने से कहीं आगे की बात है। इसमें एआई की बुनियादी निर्माण इकाइयों जैसे कि कंप्यूटिंग शक्ति, डेटासेट और मॉडल इकोसिस्टम तक पहुँच शामिल है। जैसे-जैसे ये संसाधन बड़े पैमाने पर उपलब्ध हो रहे हैं, व्यक्ति और संस्थान एआई के माध्यम से अपनी उपलब्धियों के दायरे का विस्तार कर रहे हैं।

डेमोक्रेटाइजेशन का मतलब आर्थिक मौकों को बढ़ाना भी है। यह गति भारत के कार्यबल में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहाँ तकनीकी और एआई इकोसिस्टम में 60 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। अक्टूबर 2025 में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट एआई फॉर इनक्लूसिव सोसाइटल डेवलपमेंट इस बात पर जोर देती है कि एआई सर्विसेज, मार्केट और वित्तीय प्रणालियों तक पहुँच बढ़ाकर भारत के 49 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों को सशक्त बना सकता है। यह दृष्टिकोण भारत के स्थापित डिजिटल सोच पर आधारित है। जिस तरह यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को खुला और समावेशी बनाया, आधार ने जनसंख्या के स्तर पर डिजिटल पहचान को सक्षम किया और स्वदेशी 4G एवं 5G स्टैक ने तकनीकी आत्मनिर्भरता को मज़बूत किया, अब एआई भी उसी पथ पर आगे बढ़ रहा है। खुलापन, सामर्थ्य और सुलभता ही नवाचार का मार्गदर्शन कर रहे हैं, ताकि प्रगति पूरे समाज का उत्थान कर सके।
जन-कल्याण के लिए एआई तकनीक को सुलभ बनाना
एआई का मूल्य तभी सिद्ध होता है जब वह व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचे। भारत का दृष्टिकोण विभिन्न क्षेत्रों में इसके व्यावहारिक उपयोग पर केंद्रित है, ताकि एआई दैनिक जीवन और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार ला सके। जिस तरह इंटरनेट और मोबाइल फोन ने व्यापक उपयोग के माध्यम से समाज को बदल दिया, अब एआई भी उसी मार्ग पर अग्रसर है। आसानी से उपयोग होने वाले और व्यापक रूप से सुलभ एप्लिकेशन को प्राथमिकता देकर, भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि एआई समावेशी और मापने योग्य सार्वजनिक प्रभाव पैदा करे।
प्रमुख क्षेत्रों में एआई एप्लीकेशन पहले से ही बदलाव ला रहे हैं। कृषि के क्षेत्र में, एआई मौसम का पूर्वानुमान लगाकर, कीटों के खतरों की पहचान कर और सिंचाई एवं बुआई के निर्णयों में मार्गदर्शन देकर किसानों की मदद कर रहा है। किसान ई-मित्र जैसे प्लेटफॉर्म सरकारी योजनाओं तक पहुँच को सरल बनाते हैं, जबकि नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम और क्रॉप हेल्थ मॉनिटरिंग उपग्रह और मौसम डेटा का उपयोग करके फसलों की रक्षा करते हैं और इनकम सिक्योरिटी में सुधार करते हैं। स्वास्थ्य सेवा में, एआई बीमारियों का जल्द पता लगाने में सक्षम बनाता है, मेडिकल इमेजरी (जैसे एक्स-रे, एमआरआई) के विश्लेषण में सहायता करता है और टेलीमेडिसिन सेवाओं को मजबूत करता है, जिससे ग्रामीण मरीजों को विशेषज्ञों से जोड़ा जा रहा है और इलाज की गुणवत्ता और पहुँच बेहतर हो रही है।
भाषिणी: एआई के माध्यम से भाषाई सुलभता का सशक्तिकरण
भाषिणी एक एआई संचालित प्लेटफॉर्म है जो कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद और स्पीच सेवाएँ प्रदान करता है। यह उन नागरिकों को डिजिटल सेवाओं तक पहुँचने में मदद करता है जो पढ़ने या लिखने में सहज नहीं हैं। जुलाई 2022 में अपनी शुरुआत के बाद से, भाषिणी 12 लाख से अधिक डाउनलोड का आंकड़ा पार कर चुका है और अब यह 36 से ज्यादा भाषाओं को सपोर्ट करता है। यह प्लेटफॉर्म 350 से अधिक एआई मॉडल्स और 450 से ज्यादा एक्टिव कस्टमर्स को एक साथ जोड़ता है।
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एआई आपदा प्रबंधन और तैयारी को भी मजबूत कर रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग वर्षा, कोहरे और खराब मौसम का पूर्वानुमान लगाने के लिए एआई का उपयोग करता है, जबकि एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक जैसे उपकरण चक्रवात की तीव्रता के आकलन में सहायता करते हैं। इसके अतिरिक्त, रीयल-टाइम परामर्श प्रदान करने के लिए MausamGPT विकसित किया जा रहा है। एआई का यह व्यापक उपयोग भारत के नवाचार परिदृश्य में भी झलकता है। जनवरी 2026 तक, भारत दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स के साथ दुनिया के शीर्ष तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल है। अनुमान है कि इनमें से लगभग 90 प्रतिशत स्टार्टअप किसी न किसी रूप में एआई-संचालित हैं, जो यह दर्शाता है कि पूरे देश में नवाचार और समस्या-समाधान में एआई कितनी गहराई से समाहित हो चुका है।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तक सबकी पहुँच सुनिश्चित करना
एआई को डेमोक्रेटाइज के लिए यह आवश्यक है कि एआई को शक्ति देने वाला बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर खुला, किफायती और व्यापक रूप से सुलभ हो। भारत का दृष्टिकोण इसके पूर्ण एआई स्टैक द्वारा निर्देशित है, जो एप्लिकेशन, मॉडल्स, कंप्यूट, इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी तक फैला हुआ है और इन लेयर्स को परस्पर जुड़ी राष्ट्रीय क्षमताओं के रूप में देखता है। मार्च 2024 में ₹10,371.92 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ पांच वर्षों के लिए अनुमोदित, इंडिया एआई मिशन पहुँच का विस्तार करके, डेटा की उपलब्धता को मजबूत करके और जनहित के लिए एआई के जिम्मेदार उपयोग को सक्षम बनाकर इस दृष्टिकोण की आधारशिला रख रहा है।


हाई-क्वालिटी डेटासेट और दोबारा इस्तेमाल होने वाले मॉडल्स तक पहुँच एआई के समान रूप से उपलब्ध होने का एक प्रमुख चालक है। राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म डेवलपर्स को शून्य से शुरुआत करने के बजाय तैयार डेटा और मॉडल संसाधनों के साथ काम करने में सक्षम बना रहे हैं। इस प्रयास को एआईकोश (AIKosh) का समर्थन प्राप्त है, जो एआई डेटासेट और मॉडल्स के लिए एक नेशनल प्लेटफॉर्म है। यह सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों से डेटासेट को एक साथ लाता है और उन्हें विभिन्न क्षेत्रों के लिए उपलब्ध कराता है। यह साझा पहुँच नवाचार को तेजी से आगे बढ़ने और उपयोगकर्ताओं के एक व्यापक समुदाय तक पहुँचने में मदद करती है।
एआईकोश: भारत का साझा एआई संसाधन मंच
फरवरी 2026 तक, एआईकोश (AIKosh) एक ही राष्ट्रीय मंच पर 20 क्षेत्रों से संबंधित 7,541 डेटासेट और 273 एआई मॉडल्स को एक साथ लेकर आया है। दिसंबर 2025 तक, इस पर 3.85 लाख से अधिक विज़िट्स, 11,000 पंजीकृत उपयोगकर्ता और 26,000 डाउनलोड दर्ज किए जा चुके थे।
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डेटा तक पहुँच के साथ-साथ, भारत भारतीय डेटा और भाषाओं पर प्रशिक्षित अपने स्वयं के लार्ज मल्टीमॉडल एआई मॉडल्स विकसित कर रहा है। यह दृष्टिकोण स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रासंगिकता सुनिश्चित करते हुए तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है। इंडिया एआई मिशन के तहत 500 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें से पहले दो चरणों में 12 स्टार्टअप्स का चयन किया गया। इनमें सर्वम एआई, सोकेट एआई, ज्ञानी एआई, गन एआई, अवतार एआई, आईआईटी बॉम्बे के नेतृत्व में भारतजेन, ज़ेंटिक, जेन लूप, इंटेलीहेल्थ, शोध एआई, फ्रैक्टल एनालिटिक्स और टेक महिंद्रा मेकर्स लैब शामिल हैं।
ऐतिहासिक रूप से, कंप्यूटिंग शक्ति तक सीमित पहुँच के कारण एआई का विकास केवल कुछ बड़े संस्थानों तक ही सीमित रहा है। इस बाधा को अब रियायती और साझा कंप्यूट संसाधनों के माध्यम से दूर किया जा रहा है। 'इंडिया एआई मिशन' के तहत, 38,000 से अधिक हाई-एंड GPU को इस व्यवस्था में शामिल किया गया है, जो मात्र ₹65 प्रति घंटे की दर पर उपलब्ध हैं—यह वैश्विक औसत लागत का लगभग एक-तिहाई है। इसके अतिरिक्त, 1,050 TPU को भी शामिल किया गया है ताकि उन्नत एआई प्रोसेसिंग क्षमताओं तक पहुँच का और अधिक विस्तार किया जा सके।
GPU या ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट एक शक्तिशाली कंप्यूटर चिप है, जो मशीनों को तेज़ी से सोचने, इमेज प्रोसेस करने, एआई प्रोग्राम चलाने और जटिल कार्यों को एक सामान्य प्रोसेसर की तुलना में अधिक कुशलता से संभालने में मदद करती है।
TPU या टेन्सर प्रोसेसिंग यूनिट, एक विशेष कंप्यूटर चिप है जिसे विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है। TPU को बड़ी मात्रा में डेटा को तेजी से प्रोसेस करने के लिए बनाया गया है, ताकि एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करने और उन्हें चलाने जैसे कार्यों को कुशलता से पूरा किया जा सके।
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नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन के माध्यम से हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को भी सुलभ बनाया जा रहा है। विभिन्न आईआईटी, आईआईएसईआर और अनुसंधान संस्थानों में 40 पेटाफ्लॉप्स से अधिक की क्षमता तैनात की गई है। परम सिद्धि-एआई और ऐरावत जैसे सिस्टम लैंग्वेज प्रोसेसिंग, मौसम के पूर्वानुमान और दवाओं की खोज जैसे अनुप्रयोगों के लिए साझा उपयोग का सपोर्ट करते हैं।
चिप्स और सेमीकंडक्टर क्षमताओं तक पहुँच
कंप्यूट का लंबे समय तक डेमोक्रेटाइजेशन घरेलू चिप क्षमताओं पर निर्भर करता है। भारत एआई वर्कलोड को सपोर्ट करने और बाहरी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने के लिए अपने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है। ₹76,000 करोड़ के परिव्यय वाला 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' विनिर्माण, डिज़ाइन और टैलेंट डेवलपमेंट में सहायता प्रदान करता है। दिसंबर 2025 तक, 6 राज्यों में लगभग ₹1.60 लाख करोड़ के संचयी निवेश के साथ 10 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी थी। भारत का चिप बाजार 2030 तक $100 से $110 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है, जो इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में तीव्र विकास को दर्शाता है।
केंद्रीय बजट 2026-27 ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा के साथ इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें उद्योग-आधारित अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर विशेष जोर दिया गया है। इस चरण का लक्ष्य तकनीकी विकास को और गहरा करना और भविष्य के लिए तैयार एक कुशल कार्यबल का निर्माण करना है, जिससे भारत में एक्सेसिबल और रेसिलिएंट एआई कंप्यूट की दीर्घकालिक नींव मज़बूत होगी।
डेटा सेंटर और कनेक्टिविटी तक पहुंच
एआई के व्यापक प्रसार के लिए स्केलेबल डेटा सेंटर और विश्वसनीय कनेक्टिविटी अनिवार्य हैं। पांचवीं पीढ़ी (5G) की मोबाइल सेवाएं अब 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध हैं, जो देश की 85 प्रतिशत आबादी को कवर करती हैं। अक्टूबर 2025 तक, देश भर में 5.08 लाख 5G बेस ट्रांससीवर स्टेशन स्थापित किए जा चुके थे।
बढ़ते डिजिटलीकरण, क्लाउड को अपनाने और सरकार व उद्योगों में एआई के उपयोग के कारण भारत का डेटा सेंटर इकोसिस्टम तेज़ी से विस्तार कर रहा है। वर्तमान में क्लाउड डेटा सेंटर की क्षमता लगभग 1,280 मेगावाट है, जो बैंकिंग, बिजली और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सहायता प्रदान करती है। इस क्षमता के 2030 तक 4 से 5 गुना बढ़ने की उम्मीद है।
बढ़ते मोबाइल कवरेज और डेटा सेंटर इकोसिस्टम के विस्तार से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले आम आदमी के लिए भी इन डेटा सेंटरों द्वारा समर्थित प्रणालियों और एप्लिकेशन का उपयोग करने और उन्हें बनाने में योगदान देने की संभावना के द्वार खुलेंगे।
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट से मजबूत होता भारत का एआई इकोसिस्टम
भारत का एआई इकोसिस्टम बड़े पैमाने पर वैश्विक निवेश को आकर्षित कर रहा है। गूगल विशाखापत्तनम में $15 बिलियन का एआई हब स्थापित कर रहा है, जबकि अमेजन वेब सर्विसेज महाराष्ट्र में डेटा सेंटर के लिए $8.3 बिलियन का निवेश कर रहा है।
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भारत दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत डेटा होस्ट करता है, जबकि इसकी डेटा सेंटर क्षमता वैश्विक कुल क्षमता का केवल तीन प्रतिशत है। मुंबई और नवी मुंबई सबसे बड़े केंद्र हैं, जिनके पास कुल लाइव क्षमता का 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। इसे घने सबसी केबल नेटवर्क और अनुकूल नीतियों का समर्थन प्राप्त है। बेंगलुरु और हैदराबाद दोनों देश की क्षमता का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। चेन्नई का योगदान लगभग 13 प्रतिशत है, जिसके बाद दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र 14 प्रतिशत पर है। पुणे और कोलकाता क्रमशः छह प्रतिशत और तीन प्रतिशत का योगदान देते हैं। भारत में डेटा सेंटर का परिदृश्य सभी क्षेत्रों में तेजी से और निरंतर विस्तार कर रहा है।
विश्वसनीय और सतत ऊर्जा तक पहुंच
विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति संपूर्ण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का आधार है। एआई डेटा सेंटर में बहुत ज़्यादा एनर्जी लगती है, जिससे सस्टेनेबिलिटी और स्थिरता अनिवार्य हो जाती है। भारत का क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन इस आवश्यकता को पूरा करता है। जून 2025 में, भारत ने अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त कर लिया, जो पेरिस समझौते के तहत इसके 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले है। नवंबर 2025 तक, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 253.96 GW तक पहुँच गई, जो नवंबर 2024 की तुलना में 23 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाती है। भारत ने अकेले 2025 में रिकॉर्ड 44.5 GW नवीकरणीय क्षमता जोड़ी।
न्यूक्लियर एनर्जी भी स्थिर और निरंतर बिजली प्रदान करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम 2025 का उद्देश्य परमाणु क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना और विदेशी निवेश को सक्षम बनाना है। भारत की वर्तमान परमाणु क्षमता 8.78 GW है और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से स्वदेशी 700 MW और 1000 MW रिएक्टरों के विकास के साथ इसके 2031–32 तक बढ़कर 22.38 GW होने का अनुमान है।
डेटा, कंप्यूट, चिप्स, कनेक्टिविटी और ऊर्जा तक पहुंच का विस्तार करके, भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि एआई क्षमताएं देश भर के नवप्रवर्तकों और संस्थानों के लिए उपलब्ध हों।
एआई को सबके लिए सुलभ बनाने के नियम और नीतियां
एक सहायक विनियामक और नीतिगत ढांचा एआई को सबके लिए सुलभ बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारत ने एक भरोसेमंद डिजिटल आधार तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया है, जो सुरक्षा, सामर्थ्य और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए एआई तक पहुंच को सक्षम बनाता है।
- सरकारी क्लाउड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: डिजिटल इंडिया पहल के तहत भारत सरकार की क्लाउड जरूरतों को पूरा करने के लिए मेघराज नामक GI क्लाउड स्थापित किया गया था। इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा समर्थित, यह ई-गवर्नेंस 2,170 मंत्रालयों और विभागों ने मेघराज पर अपने एप्लिकेशन होस्ट किए हैं, जिससे सार्वजनिक सेवाओं में एआई के व्यापक उपयोग का मार्ग प्रशस्त सेवाओं के लिए सुरक्षित, स्केलेबल और इलास्टिक क्लाउड सेवाएं प्रदान करता है। उपयोग के अनुसार भुगतान, तेज़ी से डिप्लॉयमेंट और मांग के अनुसार संसाधनों की उपलब्धता जैसी विशेषताएं एआई को अपनाने की लागत और तकनीकी बाधाओं को कम करती हैं। नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर पूरे सरकारी तंत्र में ये सेवाएं प्रदान करता है। दिसंबर 2025 तक, हुआ है।
- डेटा गवर्नेंस और कानूनी सहायक: भारत का डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क खुलेपन और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाता है। 'नेशनल डेटा शेयरिंग एंड एक्सेसिबिलिटी पॉलिसी 2012' के तहत 2017 में शुरू किया गया 'गवर्नमेंट ओपन डेटा लाइसेंस इंडिया', नॉन-सेंसिटिव पब्लिक डेटा के दोबारा इस्तेमाल को मुमकिन बनाता है। यह फ्रेमवर्क डेवलपर्स और शोधकर्ताओं को data.gov.in पर प्रकाशित सरकारी डेटासेट का उपयोग करके एआई समाधान बनाने की अनुमति देकर नवाचार को बढ़ावा देता है। साथ ही, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम 2023 व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को मजबूत करता है। यह डेटा संभालने वाली सभी संस्थाओं के लिए स्पष्ट अनुपालन नियम निर्धारित करता है, जिससे विश्वास और जवाबदेही बढ़ती है।
साथ मिलकर, ये उपाय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए डेटा तक पहुंच का विस्तार करते हैं, जिससे AI बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक स्थिर वातावरण तैयार होता है।
शिक्षा, कौशल विकास और एआई साक्षरता
एआई का डेमोक्रेटाइजेशन तकनीक के साथ-साथ लोगों पर भी उतना ही निर्भर है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि एआई को समझा जाए, जिम्मेदारी से उपयोग किया जाए और वास्तविक समस्याओं को हल करने में लागू किया जाए, एक कुशल और जागरूक कार्यबल का निर्माण आवश्यक है। भारत का दृष्टिकोण स्कूल की शिक्षा से लेकर उन्नत अनुसंधान तक, हर चरण में सीखने के मार्ग बनाने पर केंद्रित है, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि ये अवसर बड़े शहरी केंद्रों से आगे तक पहुंचें।
- उत्कृष्टता केंद्र : अनुसंधान आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने स्वास्थ्य सेवा, कृषि और सतत शहरों जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित किए हैं। केंद्रीय बजट 2025 में शिक्षा के लिए चौथे उत्कृष्टता केंद्र की घोषणा की गई थी। ये केंद्र सहयोगी मंचों के रूप में कार्य करते हैं जहाँ शैक्षणिक संस्थान, उद्योग और सरकारी संस्थान स्केलेबल और तैनात करने योग्य एआई समाधान विकसित करने के लिए मिलकर काम करते हैं। इसके अतिरिक्त, युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक एआई कौशल से लैस करने और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण में सहायता के लिए पांच राष्ट्रीय कौशल उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं।
- एआई रेडीनेस के लिए कौशल (एसओएआई): जुलाई 2025 में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने 'स्केलिंग फॉर एआई रेडीनेस' (एसओएआर) लॉन्च किया, जो कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के स्कूली छात्रों और शिक्षकों के लिए एक राष्ट्रीय पहल है। यह कार्यक्रम शिक्षार्थियों को तेजी से बढ़ती डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करता है। इसमें छात्रों के लिए तीन लक्षित 15-घंटे के मॉड्यूल और शिक्षकों के लिए 45-घंटे का मॉड्यूल शामिल है, जिसमें नैतिक एआई उपयोग और मशीन लर्निंग जैसी बुनियादी अवधारणाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण: क्राफ्ट्समेन ट्रेनिंग स्कीम (शिल्पकार प्रशिक्षण योजना) के तहत, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों सहित 31 नए जमाने के पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये कार्यक्रम औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं, जो देश भर के युवाओं के स्किलिंग और अपस्किलिंग दोनों में सहायता प्रदान करते हैं।
- YUVAi के माध्यम से युवाओं की भागीदारी: इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन, अपने भागीदारों के सहयोग से 'YUVAi' को लागू कर रहा है। यह नवंबर 2022 में शुरू किया गया एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को समावेशी तरीके से एआई और सामाजिक कौशल से लैस करना है। यह कार्यक्रम शिक्षार्थियों को आठ विषयगत क्षेत्रों में एआई का उपयोग करने में सक्षम बनाता है, जिनमें कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, परिवहन, ग्रामीण विकास, स्मार्ट सिटी और कानून एवं न्याय शामिल हैं।
- सरकारी अधिकारियों के लिए एआई कॉम्पिटेंसी फ्रेमवर्क: सरकार के भीतर एआई क्षमता को मजबूत करने के लिए, सरकारी अधिकारियों के लिए एक 'एआई कॉम्पिटेंसी फ्रेमवर्क' पेश किया गया है। यह फ्रेमवर्क अधिकारियों को आवश्यक एआई कौशल हासिल करने और उन्हें नीति निर्माण व फ्रेमवर्क में प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करने के लिए व्यवस्थित और स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग प्रदान करता है।
- IndiaAI मिशन के तहत उच्च शिक्षा और अनुसंधान सहायता: IndiaAI मिशन फेलोशिप और इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से उन्नत शिक्षा और अनुसंधान का समर्थन कर रहा है। इसके तहत 500 पीएचडी स्कॉलर्स, 5,000 स्नातकोत्तर छात्रों और 8,000 स्नातक छात्रों को सहायता प्रदान की जा रही है। जुलाई 2025 तक, दो सौ से अधिक छात्र फेलोशिप प्राप्त कर चुके थे और 73 संस्थानों ने पीएचडी उम्मीदवारों को अपने साथ जोड़ लिया था। टियर-2 और टियर-3 शहरों में डेटा और एआई प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। एनआईईएलआईटी और उद्योग भागीदारों के सहयोग से 31 लैब पहले ही शुरू की जा चुकी हैं, जबकि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अतिरिक्त लैब स्थापित करने के लिए 174 आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों को नामांकित किया है।
साथ मिलकर, ये सभी पहलें एआई लिटरेसी को मजबूत कर रही हैं, कौशल विकास का विस्तार कर रही हैं और एक ऐसी टैलेंट पाइपलाइन बना रही हैं जो एआई इकोसिस्टम में समावेशी और सस्टेनेबल ग्रोथ का समर्थन करती है।
एआई को सबके लिए सुलभ बनाने के लिए वैश्विक सहयोग
कई देशों के लिए, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ (विकासशील और कम आय वाले देशों) के लिए, एआई को डेमोक्रेटाइज करना डेटा, कंप्यूट (शक्तिशाली कंप्यूटर) और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे बुनियादी संसाधनों तक निष्पक्ष और सस्ती पहुंच पर निर्भर करता है। इस चुनौती से निपटने के लिए एक समन्वित वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है। इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026 सामूहिक जुड़ाव के लिए एक बड़ा मंच प्रदान करता है, जिसमें 15 से 20 राष्ट्राध्यक्ष, 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मंत्री और 100 से अधिक वैश्विक व भारतीय कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एक साथ आ रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन की चर्चाओं को चक्र या कार्य समूहों के माध्यम से व्यवस्थित किया गया है, जो सात परस्पर जुड़े विषयों पर आधारित हैं। इनमें से, डेमोक्रेटाइज़िंग एआई रिसोर्सेज वर्किंग ग्रुप एक खास पहल है। भारत, मिस्र और केन्या की सह-अध्यक्षता वाला यह समूह, साझा पहुंच, सहयोग और क्षमता निर्माण के माध्यम से एक अधिक समावेशी और संतुलित वैश्विक एआई इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों और हितधारकों को एक मंच पर लाता है।
यह कार्य समूह यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि एआई के आवश्यक संसाधन सबके लिए सुलभ और सस्ते हों, ताकि सभी देश अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार एआई के विकास, उपयोग और इसे लागू करने में सार्थक रूप से भाग ले सकें।
इस कार्य समूह के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- एआई संसाधनों को ग्लोबल पब्लिक गुड्स के रूप में सुलभ और सस्ता बनाना।
- डिस्ट्रिब्यूटेड एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और ओपन इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सुविधा प्रदान करना।
- लोकल एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान का समर्थन करना।
समान पहुँच, सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देकर, डेमोक्रेटाइजिंग एआई रिसोर्सेज वर्किंग ग्रुप एक ऐसे भविष्य का समर्थन करता है जहाँ सभी देश एआई का उपयोग इस तरह से कर सकें जो समावेशी विकास और सतत विकास को आगे बढ़ा सके।
निष्कर्ष
भारत का एआई कोसबके लिए सुलभ बनाने का दृष्टिकोण यह दिखाता है कि स्केल, इनक्लूजन और इनोवेशन एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। अफोर्डेबिलिटी, ओपननेस और ट्रस्ट पर ध्यान केंद्रित करने से यह सुनिश्चित होता है कि एआई का लाभ किसानों, छात्रों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और सार्वजनिक संस्थानों तक समान रूप से पहुँचे। जैसा कि भारत इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की मेजबानी कर रहा है, यह अपने इस अनुभव को एक वैश्विक संदर्भ में भी रख रहा है, जो ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं के अनुरूप एक मॉडल पेश करता है। आगे की राह अब स्पष्ट है। एआई को सबके लिए सुलभ बनाना कोई एक बार का प्रयास नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर प्रतिबद्धता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि तकनीकी प्रगति समाज को मजबूत करे, असमानताओं को कम करे और सभी के लिए सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए सहयोग करे।
संदर्भ:
पीआईबी बैकग्राउंडर्स:
इलेक्ट्रॉनिकी एवं आईटी मंत्रालय:
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय:
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय:
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय:
संचार मंत्रालय:
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पीके/केसी/डीवी
(रिलीज़ आईडी: 2226090)
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