नीति आयोग
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नीति आयोग ने विकसित भारत और शून्य उत्सर्जन परिदृश्य पर अध्ययन रिपोर्टें जारी की


विकसित भारत @ 2047 सभी स्थितियों में हासिल करने योग्य

ऊर्जा का विद्युतीकरण, ऊर्जा का हरितीकरण, मिशन लाइफ और व्यवहार परिवर्तन तथा चक्रीयता; शून्य उत्सर्जन के लिए महत्वपूर्ण हैं

ऊर्जा की मांग: विद्युतीकरण, चक्रीयता और ऊर्जा दक्षता 2070 तक अंतिम ऊर्जा मांग को 20% तक कम कर सकती हैं; भारत का कोयला उपभोग 2047 तक बढ़ता रहेगा, भले ही यह शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा कर रहा हो

विद्युत: अंतिम ऊर्जा में बिजली का हिस्सा 2025 के 21% से बढ़कर 2070 में 60% तक पहुंच सकता है; गैर-जीवाश्म स्रोतों से उत्पादन का हिस्सा 23% से बढ़कर 80-85% तक हो सकता है

परिवहन: 2070 तक बिजली, जैव ईंधन और हाइड्रोजन; परिवहन ऊर्जा की लगभग 90% मांग को पूरा कर सकते हैं

उद्योग: 2070 तक स्टील, सीमेंट और एल्यूमिनियम की मांग 4-6 गुनी बढ़ने की संभावना है; बिजली और हरित हाइड्रोजन, औद्योगिक ऊर्जा के मुख्य आधार बनकर उभर सकते हैं

महत्वपूर्ण खनिज: 21वीं सदी के मध्य तक तांबा और ग्रेफाइट की 20-25% मांग पुनर्चक्रण के माध्यम से पूरी की जा सकती है

प्रविष्टि तिथि: 10 FEB 2026 6:57PM by PIB Delhi

नीति आयोग 9 और 10 फरवरी 2026 को 'विकसित भारत और शून्य उत्सर्जन परिदृश्य' पर ग्यारह अध्ययन रिपोर्टें जारी कर रहा है। दूसरी श्रृंखला की चार रिपोर्टें 10 फरवरी 2026 की सुबह नई दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में जारी की गईं।

ये रिपोर्टें डॉ. वी. के. सारस्वत, सदस्य, नीति आयोग; श्री बी.वी.आर. सुब्रमण्यम, सीईओ, नीति आयोग; डॉ. अनिल जैन, अध्यक्ष, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड; श्री अलोक कुमार, पूर्व सचिव, विद्युत मंत्रालय; श्री पंकज अग्रवाल, सचिव, विद्युत मंत्रालय; और श्री संतोष सारंगी, सचिव, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की उपस्थिति में जारी की गईं।

आज के कार्यक्रम में निम्नलिखित रिपोर्टें जारी की गईं:

1.   विकसित भारत और शून्य उत्सर्जन परिदृश्य - क्षेत्रीय अंतर्दृष्टि: परिवहन (खंड 3)

यह रिपोर्ट भारत के परिवहन इकोसिस्टम की वर्तमान स्थिति और दीर्घकालिक विकास का आकलन करती है, जिसमें यात्री और माल परिवहन की मांग, यातायात साधनों की संरचना, तकनीकी परिपक्वता और ऊर्जा उपयोग शामिल हैं। जैसे-जैसे यात्री और माल परिवहन में वृद्धि होगी, यातायात साधनों में परिवर्तन, शून्य-उत्सर्जन वाहन, स्वच्छ ईंधन और प्रौद्योगिकियां, और सार्वजनिक और साझा गतिशीलता समाधान तथा रेल और जलमार्ग परिवहन की ओर संरचनात्मक परिवर्तन की पहचान बदलाव के आवश्यक घटक के रूप में की गयी है।

2.   विकसित भारत और शून्य उत्सर्जन परिदृश्य - क्षेत्रीय अंतर्दृष्टि: उद्योग (खंड 4)

यह रिपोर्ट औद्योगिक ऊर्जा बदलाव के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करती है, जिसमें औद्योगिक उत्पादन, ऊर्जा मांग और इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम, वस्त्र और पेट्रोकेमिकल्स जैसे प्रमुख उप-क्षेत्रों के उत्सर्जन शामिल हैं। बढ़ता विद्यूतीकरण, सामग्री की दक्षता और पुनर्चक्रण, गैर-जीवाश्म ऊर्जा का हिस्सा, और उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग आगे बढ़ने के मार्ग के रूप में उभरते हैं।

3.   विकसित भारत और शून्य उत्सर्जन परिदृश्य - क्षेत्रीय अंतर्दृष्टि: ऊर्जा (खंड 7)

यह रिपोर्ट भविष्य की बिजली मांग, कम-कार्बन आपूर्ति विकल्पों, प्रणाली की विश्वसनीयता और निवेश आवश्यकताओं का मूल्यांकन करते हुए भारत के विकास और शून्य उत्सर्जन एजेंडा में बिजली की केंद्रीय भूमिका का परीक्षण करती है। बढ़ते शहरीकरण, प्रशीतन की जरूरतों, डिजिटलीकरण, विद्युत चालित आवागमन और हरित हाइड्रोजन उत्पादन के कारण मांग में तेज वृद्धि होने की संभावना है। रिपोर्ट विश्वसनीय, किफायती और उत्तरोत्तर स्वच्छ विद्युत प्रणाली के लिए तेजी से विद्युतीकरण, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा की तैनाती और भंडारण और पारेषण विस्तार के रास्तों का मूल्यांकन करती है।

4.   विकसित भारत और शून्य उत्सर्जन परिदृश्य - महत्वपूर्ण खनिज मूल्यांकन: मांग और आपूर्ति (खंड 10)

यह रिपोर्ट उन खनिज जरूरतों का अनुमान लगाती है जो भारत के प्रमुख क्षेत्रों में स्वच्छ तकनीकों के उपयोग से उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे सौर, पवन, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, ईवी, और इलेक्ट्रोलाइज़र। महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला के जोखिम को कम करने और घरेलू संसाधनों के विकास, अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति, संस्थागत सुधार और चक्रीयता के माध्यम से भारत की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समन्वित कार्रवाई के अवसरों पर रिपोर्ट में चर्चा की गई है।

चार रिपोर्टों के लॉन्च के बाद "प्रौद्योगिकी, अवसंरचना और खनिज: शून्य उत्सर्जन के निर्माण खंड" शीर्षक से एक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसका संचालन नीति आयोग के प्रतिष्ठित फेलो श्री ओ. पी. अग्रवाल ने किया। पैनल में श्री सुमन बेरी, उपाध्यक्ष, नीति आयोग; श्री घनश्याम प्रसाद, अध्यक्ष, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण; श्री सुमंत सिन्हा, सीईओ, रिन्यू; श्री रजत गुप्ता, वरिष्ठ भागीदार, मैकिन्से एंड कंपनी; और श्री दीपक अरोड़ा, मुख्य, सरकारी संबंध, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया शामिल थे।

अपने संबोधन में, डॉ. वी. के. सारस्वत, सदस्य, नीति आयोग ने कहा, "ऊर्जा, उद्योग और परिवहन भारत की अर्थव्यवस्था के इंजन हैं। विकसित भारत 2047 और 2070 तक शून्य उत्सर्जन हासिल करने की चुनौती के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन जैसे नए ईंधन की ओर बदलाव करने और दक्षता लाभ को स्थिर करने के अवसर मौजूद हैं। भारत को क्रियान्वयन में तेजी से आगे बढ़ना होगा; आवश्यक प्रौद्योगिकियों को लाने और उनकी लागत को कम करने के लिए कड़ी मेहनत की आवश्यकता है।"

नीति आयोग के सीईओ श्री बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने कहा, “ऊर्जा, परिवहन और उद्योग, ये क्षेत्र ऊर्जा बदलाव का 80% हिस्सा कवर करते हैं। भारत की भविष्य की बिजली आपूर्ति की संरचना मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे नये स्रोतों से बनेगी। स्टील, सीमेंट और एल्यूमीनियम जैसी सामग्रियों की मांग तेजी से बढ़ेगी, भले ही मांग का प्रबंधन किया गया हो। उद्योग में कठिनाई से कमी लाने योग्य क्षेत्र सबसे बड़ी चुनौती हैं। हमें यथासंभव विद्युतीकरण करना होगा, चक्रीयता बढ़ानी होगी, औद्योगिक प्रक्रिया के विकल्प पर निर्भर रहना होगा और दक्षता बढ़ानी होगी। इन क्षेत्रों में भारतीय निजी कंपनियां विश्व स्तर की हैं – इस बदलाव को पूरा करने के लिए आवश्यक क्षमताएं देश में मौजूद हैं। हालांकि, महत्वपूर्ण खनिजों का आयात बढ़ेगा, लेकिन ईंधन के आयात में कमी कहीं अधिक होगी, इसलिए कुल मिलाकर भारत मजबूत स्थिति में होगा। यह एक अति महत्वपूर्ण प्रयास होगा।

डॉ. अनिल जैन, अध्यक्ष, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड; ने कहा, “नीति द्वारा जारी किए जा रहे ग्यारह रिपोर्ट बड़े रिक्त स्थान को भरते हैं। पिछला व्यापक ऊर्जा मूल्यांकन, 2008 की एकीकृत ऊर्जा नीति थी, जो एक तरह की बाइबिल बन गई थी। परिदृश्यों को संभव बनाने के लिए कई नीतिगत  हस्तक्षेपों की आवश्यकता है, जिन पर विस्तृत काम किया जाना चाहिए, और कार्यान्वयन की चुनौती से निपटना होगा। मंत्रालयों को यह काम आगे बढ़ाना चाहिए।”

श्री अलोक कुमार, पूर्व सचिव, विद्युत् मंत्रालय, ने कहा, “भारत के लिए नवीकरणीय सबसे कम लागत वाला मार्ग हैं, चाहे किसी भी मॉडल को चलाया जाए। प्रौद्योगिकी लागत में रुझान भी नवीकरणीय – सौर और बैटरियों – के पक्ष में हैं, यही भारत के विद्युत् क्षेत्र का भविष्य है। विद्युत् क्षेत्र को बेहतर पूर्वानुमान और योजना बनाने की आवश्यकता है – उत्पादन, पारेषण, भंडारण, और मांग प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हैं और सभी को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।”

विद्युत मंत्रालय के सचिव श्री पंकज अग्रवाल ने कहा, "भारत को किफायती ऊर्जा की आवश्यकता है। बिजली का हिस्सा वर्तमान संरचना में 22 प्रतिशत है और हम 2047 तक 40 प्रतिशत तक पहुंचने की आकांक्षा रखते हैं। इस परिवर्तन में हमारी बिजली वितरण कंपनियों को मजबूत बने रहने की जरूरत है। हम निश्चित रूप से इस रास्ते पर काम करने की कोशिश करेंगे - अभी हमारे पास 2030 और 2032 का रोडमैप हैं, जिसमें 500 गीगावॉट नवीकरणीय लक्ष्य शामिल है - लेकिन हम लंबी अवधि के रास्ते को भी ध्यान में रखेंगे।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री संतोष सारंगी ने कहा, "मैं इतनी व्यापक रिपोर्ट लाने के लिए नीति आयोग की सराहना करता हूं। यह हमें 2070 तक का रोडमैप प्रदान करता है जिस पर मंत्रालय काम करेगा। यह इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि भारत हरित परिवर्तन को कैसे क्रियान्वित करता है; विकास और हरित परिवर्तन अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि पारस्परिक रूप से समावेशी हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ग्रिड एकीकरण एक चुनौती है, लेकिन दुनिया का कोई भी देश इससे पीछे नहीं हट रहा है। तकनीकी नवाचार उपलब्ध हैं और तकनीक में भविष्य में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाना और प्रतिक्रिया देना बहुत ज़रूरी होगा।”

नीति आयोग द्वारा जारी किए जा रहे ग्यारह रिपोर्टों में भारत के पहले सरकार-नेतृत्व वाले, बहु-क्षेत्रीय, समेकित अध्ययन के निष्कर्षों का विवरण है, जिसका उद्देश्य विकास परिदृश्यों का मूल्यांकन करना है जो माननीय प्रधानमंत्री के विज़न विकसित भारत 2047 को साकार कर सकें, साथ ही 2070 तक शुद्ध ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन को शून्य करने में भी योगदान दें।

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नीति आयोग का अध्ययन परिदृश्य-आधारित विश्लेषणात्मक मॉडलिंग अभ्यास है जो आर्थिक वृद्धि, भारत की विकास प्राथमिकताओं और जलवायु प्रतिबद्धताओं को एकीकृत करता है। इस अध्ययन को दस अंतर-मंत्रालयी कार्य समूहों से जानकारी मिली, जिन्होंने प्रमुख क्षेत्रों में दीर्घकालिक बदलाव परिदृश्यों का परीक्षण किया, जैसे कि बदलाव के सूक्ष्मआर्थिक पहलू; बिजली, परिवहन, उद्योग, भवन और कृषि में क्षेत्र-आधारित कम-कार्बन की ओर बदलाव; जलवायु कार्रवाई के लिए वित्तपोषण; महत्वपूर्ण खनिज; अनुसंधान एवं विकास और विनिर्माण तथा बदलाव के सामाजिक प्रभाव। नीति आयोग ने दीर्घकालिक नीति योजना-निर्माण के लिए इस व्यापक मूल्यांकन को पूरा किया।

पूरी रिपोर्टें निम्नलिखित लिंक पर देखी जा सकती हैं:

1.     https://niti.gov.in/sites/default/files/2026-02/Scenarios-Towards-Viksit-Bharat-and-Net-Zero-Sectoral-Insights-Power.pdf

2.     https://niti.gov.in/sites/default/files/2026-02/Scenarios-Towards-Viksit-Bharat-and-Net-Zero-Sectoral-Insights-Industry.pdf

3.     https://niti.gov.in/sites/default/files/2026-02/Scenarios-Towards-Viksit-Bharat-and-Net-Zero-Sectoral-Insights-Transport.pdf

4.     https://niti.gov.in/sites/default/files/2026-02/Scenarios-Towards-Viksit-Bharat-and-Net-Zero-Critical-Mineral-Assessment-Demand-and-Supply.pdf

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पीके/केसी/जेके


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