सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी की नई श्रृंखला 27 फरवरी 2026, 12 फरवरी 2026 और मई 2026 को जारी की जाएंगी
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की प्रासंगिकता, सटीकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलनात्मकता बढ़ाने के लिए उनके आधार वर्ष के संशोधन हेतु एक व्यापक अभ्यास करने का निर्णय लिया है
प्रविष्टि तिथि:
11 FEB 2026 1:30PM by PIB Delhi
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की प्रासंगिकता, सटीकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलनात्मकता बढ़ाने के लिए उनके आधार वर्ष संशोधन हेतु एक व्यापक अभ्यास करने का निर्णय लिया है। जीडीपी और आईआईपी के लिए प्रस्तावित नया आधार वर्ष 2022-23 है, और सीपीआई के लिए प्रस्तावित आधार वर्ष 2024 है। जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी का आधार वर्ष संशोधन संबंधित तकनीकी सलाहकार समितियों/विशेषज्ञ समूहों द्वारा निर्देशित होता है, जिनमें शिक्षा जगत, केंद्र और राज्य सरकारों, आरबीआई आदि के विशेषज्ञ शामिल होते हैं। संशोधन कार्य में कार्यप्रणाली में सुधार, नवीनतम सर्वेक्षण डेटा सहित नए डेटा स्रोतों का समावेश, वेटेज अपडेट आदि शामिल हैं। सर्वेक्षण परिणामों को बेहतर बनाने के लिए, एमओएसपीआई ने नमूना आकार में वृद्धि, नमूना डिजाइन में संशोधन, सर्वेक्षण उपकरणों और सर्वेक्षण की आवृत्ति में बदलाव जैसे विभिन्न कदम उठाए हैं। इस आधार वर्ष संशोधन अभ्यास के लिए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस), घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) और असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) के परिणामों का उपयोग किया गया है।
जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी की नई श्रृंखला का विमोचन क्रमशः 27 फरवरी 2026, 12 फरवरी 2026 और मई 2026 के लिए निर्धारित है। सर्वेक्षण के परिणाम समय-समय पर जारी किए जाते हैं। सभी रिलीज एमओएसपीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
शिक्षा जगत, केंद्र और राज्य सरकारों, आरबीआई आदि के विशेषज्ञों वाली तकनीकी सलाहकार समिति / विशेषज्ञ समूह के अतिरिक्त, एमओएसपीआई ने जीडीपी, आईआईपी और सीपीआई के आधार वर्ष संशोधन और सर्वेक्षणों पर हितधारकों से प्रतिक्रिया और सुझाव प्राप्त करने के लिए परामर्श कार्यशालाएं/बैठकें आयोजित कीं। इसका उद्देश्य आधिकारिक सांख्यिकी में पारदर्शिता, तुलनात्मकता और जनता के विश्वास को सुनिश्चित करना है। उपयोगकर्ताओं से प्राप्त फीडबैक को तकनीकी सलाहकार समिति / विशेषज्ञ समूहों के परामर्श से शामिल किया जाता है।
एमओएसपीआई ने सांख्यिकीय आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें अन्य बातों के अलावा निम्नलिखित शामिल हैं:
- एमओएसपीआई द्वारा डेटा संग्रह के लिए आयोजित प्रतिदर्श सर्वेक्षणों एमओएसपीआई में इन-बिल्ट वैलिडेशन मैकेनिज्म के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीकी प्रगति ने डेटा के एक साथ प्रोसेसिंग को सुविधाजनक बनाया है और इसके परिणामस्वरूप रिपोर्ट जारी करने के समय अंतराल में भारी कमी आई है।
- मंत्रालय ने अपने सांख्यिकीय उत्पादों का अग्रिम रिलीज कैलेंडर (एआरसी) मंत्रालय की वेबसाइट (www.mospi.gov.in) पर उपलब्ध कराया है।
- डेटा प्रसार और प्रबंधन की सुविधा के लिए ई-सांख्यिकी पोर्टल लॉन्च किया गया है। विभिन्न शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं आदि की पहुंच के लिए सर्वेक्षणों का यूनिट लेवल डेटा भी एमओएसपीआई की वेबसाइट (www.mospi.gov.in) पर उपलब्ध कराया गया है।
- एमओएसपीआई द्वारा प्रकाशित किए जा रहे डेटा के बारे में उपयोगकर्ताओं की समझ बढ़ाने और उनकी प्रतिक्रिया को शामिल करने के लिए डेटा उपयोगकर्ताओं/हितधारकों के साथ नियमित संवाद भी आयोजित किए जाते हैं।
- मंत्रालयों और विभागों के बीच एक नेशनल मेटा डेटा स्ट्रक्चर (एनएमडीएस) प्रसारित की गई है। एनएमडीएस को अन्य बातों के अलावा, डेटा स्रोतों और संग्रह विधियों पर स्पष्टता प्रदान करने और डेटासेट की खोज क्षमता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।
यह जानकारी आज लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, योजना मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह द्वारा दी गई।
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पीके/केसी/डीवी
(रिलीज़ आईडी: 2226392)
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