विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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संसदीय प्रश्न: स्वदेशी एंटीबायोटिक दवाओं का विकास

प्रविष्टि तिथि: 11 FEB 2026 1:40PM by PIB Delhi

नैफिथ्रोमाइसिन का विकास वोकहार्ट समूह द्वारा किया गया है। यह एक नवीन मैक्रोलाइड है, इसे विशेष रूप से सामुदायिक रूप से होने वाले जीवाणु निमोनिया (सीएबीपी) के उपचार के लिए तैयार किया गया है। भारत में नैफिथ्रोमाइसिन के चरण III नैदानिक ​​अध्ययन को जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) द्वारा आंशिक रूप से समर्थित किया गया था। यह जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के अंतर्गत एक गैर-लाभकारी, धारा 8 के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने सीएबीपी से पीड़ित वयस्कों (≥18 वर्ष) के उपचार के लिए 400 मिलीग्राम नैफिथ्रोमाइसिन टैबलेट की बिक्री और वितरण के लिए मेसर्स वोकहार्ट लिमिटेड को विपणन प्राधिकरण बनाया है।

सरकार स्वदेशी एंटीबायोटिक दवाओं की खोज और विकास को बढ़ावा देने के लिए वित्तपोषण और इकोसिस्टम समर्थन के माध्यम से अनुसंधान और विकास तथा नवाचार का समर्थन कर रही है। सरकार का समर्थन प्रारंभिक चरण के अनुसंधान और विकास, प्रारंभिक सत्यापन और उत्पादों के व्यावसायीकरण सहित अनुसंधान और विकास की पूरी प्रक्रिया को शामिल करता है। विशिष्ट प्रयास निम्नलिखित हैं:

  • जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के देश कार्यालय के सहयोग से भारत में नए एंटीबायोटिक दवाओं के अनुसंधान, खोज और विकास को दिशा देने के लिए एक भारतीय प्राथमिकता रोगजनक सूची तैयार की है।
  • जैव प्रौद्योगिकी विभाग अपनी 'जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान नवाचार और उद्यमिता विकास (बायो-राइड)' योजना के माध्यम से माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस, स्टैफिलोकोकस ऑरियस, एस्चेरिचिया कोलाई जैसे रोगजनकों के लिए रोगाणुरोधी उपचार, एंटीबायोटिक संयोजन, प्रभावकारिता अध्ययन और दवा पुनर्उपयोग अध्ययन को बढ़ावा देने वाली अनुसंधान और विकास परियोजनाओं का समर्थन कर रहा है।
  • औषध विभाग अपनी 'फार्मा-मेडटेक सेक्टर में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन (पीआरआईपी)' योजना के माध्यम से नई दवाओं के विकास और सत्यापन का समर्थन कर रहा है।
  • विज्ञान और  प्रौद्योगिकी विभाग ने एंटी माइक्रोबियल प्रतिरोध (एएमआर) से निपटने के लिए प्राकृतिक या कृत्रिम रूप से छोटे रासायनिक अणुओं के विकास की पहल की है।
  • वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद - केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआर), लखनऊ एंटीबायोटिक दवाओं की खोज के लिए विभिन्न परियोजनाओं को कार्यान्वित कर रहा है।

स्वदेशी एंटीबायोटिक दवाओं के विकास से एंटी माइक्रोबियल प्रतिरोध से निपटने की राष्ट्रीय क्षमता मजबूत होगी। इससे उपचार में कठिनाई का सामना करने वाले/दवा प्रतिरोधी संक्रमणों के उपचार की क्षमता में सुधार होगा, प्रभावी और किफायती उपचारों तक पहुंच बढ़ेगी, आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा। इससे घरेलू अनुसंधान और उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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पीके/ केसी/ एसके


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