जनजातीय कार्य मंत्रालय
जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन
प्रविष्टि तिथि:
11 FEB 2026 2:19PM by PIB Delhi
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज राज्यसभा में जानकारी दी कि जनजातीय कला रूपों, भाषाओं, मौखिक परंपराओं और प्रथागत रीति-रिवाजों सहित जनजातीय विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और संवर्धन के लिए केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय केन्द्रीय प्रायोजित योजना 'जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता' के तहत देश के उत्तर पूर्वी क्षेत्र सहित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 29 जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। जनजातीय अनुसंधान संस्थान मुख्य रूप से राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आने वाले संस्थान हैं। टीआरआई संबंधित राज्य जनजातीय कल्याण विभाग के माध्यम से मंत्रालय को बजटीय आवश्यकताओं सहित वार्षिक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करते हैं। राज्य सरकार को आवश्यकता के आधार पर और जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली शीर्ष समिति के अनुमोदन से धनराशि दी जाती है। 'जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सहायता' योजना के तहत वर्ष 2024-25 के दौरान उत्तर पूर्वी क्षेत्र के टीआरआई सहित अन्य टीआरआई को जारी की गई निधि का विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय अपनी 'जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता' योजना के माध्यम से उत्तर पूर्वी राज्यों के जनजातीय समुदायों, कलाकारों या सांस्कृतिक परम्पराओं से जुडे व्यक्तियों को अनुसंधान एवं दस्तावेजीकरण गतिविधियों, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, जनजातीय उत्सवों के आयोजन, विशिष्ठ सांस्कृतिक विरासत एवं पर्यटन के संवर्धन हेतु यात्राओं तथा जनजातीय लोगों के आदान-प्रदान भ्रमण जैसे प्रस्तावों के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान करता है, ताकि उनकी सांस्कृतिक प्रथाएं, भाषाएं और अनुष्ठान संरक्षित तथा प्रसारित किए जा सकें। जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को स्वीकृत परियोजनाओं/गतिविधियों का विवरण मंत्रालय के पोर्टल https://tribal.nic.in/Display_Apex_Minutes.aspx पर उपलब्ध है।
विरासत संरक्षण, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रसार में जनजातीय समुदायों को सीधे शामिल करने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदम नीचे दिए गए हैं:
- मंत्रालय राष्ट्रीय जनजातीय शिल्प मेला, राष्ट्रीय/राज्य जनजातीय नृत्य महोत्सव, कला प्रतियोगिताएं, जनजातीय चित्रकला पर कार्यशाला-सह-प्रदर्शनी और राज्य स्तरीय जनजातीय कवि और लेखक सम्मेलन जैसे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए सहायता प्रदान करता है।
- इसके अलावा, मंत्रालय जनजातीय मेलों और त्योहारों के आयोजन के लिए धन उपलब्ध कराता है, जैसे कि तेलंगाना की कोया जनजाति द्वारा आयोजित "मेदारम जथारा", नागालैंड का हॉर्नबिल महोत्सव, झारखंड का सरहुल महोत्सव, गोवा का लोकोत्सव और मिजोरम का पावल कुट महोत्सव आदि।
- साहित्यिक उत्सवों और साहित्य प्रतियोगिताओं का आयोजन।
- जनजातीय लेखकों द्वारा लिखी गई पुस्तकों, स्थानीय कविताओं, कहानियों के प्रकाशन और उनके द्वारा किए गए अनुवाद कार्य को सहायता प्रदान करके उन्हें प्रोत्साहित करना।
- जनजातीय समुदायों के मौखिक साहित्य (गीत, पहेलियां, गाथागीत आदि) के संग्रह और विभिन्न जनजातियों की लोककथाओं और लोककथाओं के दस्तावेजीकरण के लिए सहायता करना, ताकि जनजातीय लोक परंपरा का संरक्षण और संवर्धन किया जा सके।
- विभिन्न जनजातियों के जीवन एवं संस्कृति से संबंधित दुर्लभ कलाकृतियों, वेषभूषा, आभूषण, हथियार आदि को प्रदर्शित करने के लिए नृवंशविज्ञान संग्रहालयों की स्वीकृति।
अनुलग्नक-I
|
क्रम संख्या
|
राज्य
|
2024-25
|
|
1
|
अंडमान और निकोबार
|
0.00
|
|
2
|
आंध्र प्रदेश
|
0.00
|
|
3
|
अरुणाचल प्रदेश
|
150.00
|
|
4
|
असम
|
270.00
|
|
5
|
बिहार
|
99.00
|
|
6
|
छत्तीसगढ
|
1100.00
|
|
7
|
गोवा
|
200.00
|
|
8
|
गुजरात
|
250.00
|
|
9
|
हिमाचल प्रदेश
|
125.00
|
|
10
|
जम्मू और कश्मीर
|
100.00
|
|
11
|
झारखंड
|
200.00
|
|
12
|
कर्नाटक
|
200.00
|
|
13
|
केरल
|
300.00
|
|
14
|
लद्दाख
|
99.00
|
|
15
|
मध्य प्रदेश
|
600.00
|
|
16
|
महाराष्ट्र
|
250.00
|
|
17
|
मणिपुर
|
140.00
|
|
18
|
मेघालय
|
100.00
|
|
19
|
मिजोरम
|
723.14
|
|
20
|
नगालैंड
|
600.00
|
|
21
|
ओडिशा
|
600.00
|
|
22
|
राजस्थान
|
0.00
|
|
23
|
सिक्किम
|
200.00
|
|
24
|
तमिलनाडु
|
300.00
|
|
25
|
तेलंगाना
|
1300.00
|
|
26
|
त्रिपुरा
|
300.00
|
|
27
|
उत्तर प्रदेश
|
0.00
|
|
28
|
उत्तराखंड
|
793.86
|
|
29
|
पश्चिम बंगाल
|
0.00
|
|
|
कुल
|
9000.00
|
***.*
पीके/केसी/आईएम/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2226515)
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