पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
संसद में प्रश्न: सटीक मौसम पूर्वानुमान
प्रविष्टि तिथि:
11 FEB 2026 11:38AM by PIB Delhi
पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, सरकार ने प्रेक्षण प्रणालियों को सुदृढ़ किया है और आधुनिकीकरण किया है। साथ ही मौसम से जुड़ी विभिन्न गंभीर घटनाओं के अधिक सूक्ष्म स्तर पर पूर्वानुमान में सुधार हेतु नवीन मौसम एवं जलवायु मॉडलों का विकास एवं संचालन किया है। मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को उन्नत बनाने के लिए मॉनसून मिशन तथा मिशन मौसम के माध्यम से उच्च प्रदर्शन कम्प्यूटिंग (एच पी सी) क्षमता में वृद्धि, आंकड़ों के एकीकरण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा मशीन लर्निंग (ए आई/एम अल) आधारित प्रणालियों जैसी नवीन तकनीकों एवं प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु सुनियोजित आधुनिकीकरण गतिविधियाँ संचालित की गई हैं। इस दिशा में वर्ष 2014 की तुलना में वर्ष 2025 तक जो प्रमुख प्रगति हुई है उसका विवरण परिशिष्ट-1 में दिया गया है।
मॉनसून मिशन एवं मिशन मौसम परियोजनाओं के अंतर्गत जी एफ एस 12 किमी तथा एन सी यू एम 12 किमी जैसे दो वैश्विक पूर्वानुमान मॉडल 2018 वास्तविक समय में संचालित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, “भारत पूर्वानुमान प्रणाली (भारत एफ एस)” को मई 2025 से परिचालित किया गया है, जो 6 किमी तक के अत्यंत उच्च क्षमता पर कार्य करती है, ताकि विकास खंड (ब्लॉक) स्तर तथा आगे चलकर पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान की आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सके।
ऐसे उच्च रिजोल्यूशन मॉडलों को कम्प्यूटिंग सपोर्ट प्रदान करने तथा उनका वास्तविक समय में नियमित संचालन सुनिश्चित करने हेतु कम्प्यूटिंग सुविधाओं की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। इससे व्यापक स्तर पर आंकड़ों का एकीकरण हो रहा है तथा मेसो-स्केल, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मॉडलों को हाई रेजोल्यूशन पर संचालन संभव हुआ है। हाल ही में उच्च प्रदर्शन कम्प्यूटिंग प्रणालियों “अरुणिका” एवं “अर्का” के क्रियान्वयन के साथ, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने वर्ष 2025 में अपनी कुल कम्प्यूटिंग क्षमता को बढ़ाकर 28 पेटा फ्लॉप्स कर दिया है, जो वर्ष 2014 की 6.8 पेटा फ्लॉप्स क्षमता की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।
आंकड़ों एवं पूर्वानुमानों के स्वचालन तथा एकीकरण के उद्देश्य से भारत मौसम विज्ञान विभाग एंड-टू-एंड जी आई एस -आधारित निर्णय सहायता प्रणाली (डी एस एस) विकसित की है। यह प्रणाली प्रारंभिक चेतावनी तंत्र के अग्रभाग (फ्रंट-एंड) के रूप में कार्य करती है और सभी प्रकार के मौसमीय जोखिमों का समय पर पता लगाने एवं निगरानी सुनिश्चित करती है। यह प्रणाली विशेष गंभीर मौसम मॉड्यूल्स द्वारा समर्थित है, जो चक्रवात, भारी वर्षा, आंधी-तूफान, वज्रपात, कोहरा तथा लू जैसी चरम मौसमीय घटनाओं के लिए प्रभावशाली समयबद्ध पूर्व चेतावनी प्रदान करती है। ये घटनाएँ मानव जीवन, आजीविका तथा बुनियादी ढांचे पर विनाशकारी प्रभाव डालती हैं। यह प्रणाली ऐतिहासिक आंकड़ों, चरम मौसमी घटनाओं, वास्तविक समय के सतही एवं वायुमंडलीय ऑबजर्वेशन का उपयोग करती है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक 10 मिनट में उपलब्ध रडार ऑबजर्वेशन तथा उपग्रह से प्राप्त प्रत्येक 15 मिनट के आंकड़ों को भी इसमें सम्मिलित किया गया है। मंत्रालय में संचालित मेसो-स्केल (हाइपरलोकल सहित), क्षेत्रीय एवं वैश्विक मॉडलों से प्राप्त संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (एन डब्ल्यू पी) उत्पादों का भी इसमें उपयोग किया जाता है। मौसम विज्ञान विभाग के विभिन्न केंद्रों के माध्यम से छोटे-छोटे स्थानों और मेसोस्केल पर विभिन्न मॉडल वर्तमान समय में पार्य कर रहे हैं। प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रदान करने के लिए डी एस एस प्रणाली में जोखिम से जुड़े आंकड़ों के साथ इसके संवेदनशीलता और प्रभाव संबंधी आंकड़ों का एकीकरण किया गया है।
मौसम एवं जलवायु सेवाओं में मौजूद अन्य खामियों को दूर करने तथा भविष्य में नवीन प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग के उद्देश्य से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने “मिशन मौसम” योजना का कार्यान्वयन किया है। “मिशन मौसम” एक बहुआयामी एवं परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य भारत में मौसम एवं जलवायु से संबंधित विज्ञान, अनुसंधान तथा सेवाओं को सुदृढ़ और उन्नत करना है। इसके अतिरिक्त, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए आई) तथा मशीन लर्निंग (एम अल) प्रौद्योगिकियों के एकीकरण से मॉडल की शुद्धता तथा पूर्वानुमान के रेज़ोल्यूशन में सुधार हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप पूर्वानुमानों की सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (एन डब्ल्यू पी) से संबंधित कोर मॉडलिंग ढांचा, उन्नत डेटा अपनाने की तकनीकों तथा उच्च-स्तरीय कम्प्यूटिंग हार्डवेयर के संदर्भ में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संस्थान मुख्यतः विदेशी संस्थानों पर निर्भर हैं।
कोर मॉडलिंग फ्रेमवर्क: राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एन सी एम आर डब्ल्यू एफ) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के माध्यम से ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड तथा सिंगापुर के साथ “मोमेंटम साझेदारी” का एक प्रमुख भागीदार है। मोमेंटम साझेदारी का उद्देश्य सभी भागीदार देशों के लिए एक ऐसा ढांचा उपलब्ध कराना है, जिसके माध्यम से संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (एन डब्ल्यू पी) हेतु विश्व-स्तरीय, निर्बाध मॉडलिंग प्रणाली के विकास में प्रभावी योगदान एवं उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। एन सी एम आर डब्ल्यू एफ की एन डब्ल्यू पी प्रणाली, मोमेंटम साझेदारी की उन्नत “यूनिफाइड मॉडल” प्रणाली पर आधारित है। इस मॉडलिंग प्रणाली में उन्नत डायनामिकल कोर तथा भौतिक प्रक्रियाओं का परिष्कृत निरूपण सम्मिलित है। डेटा आत्मसातीकरण प्रणाली “हाइब्रिड 4डी-वी ए आर” पर आधारित है, जबकि एन्सेम्बल पूर्वानुमान प्रणाली “ई एन-4डी ई एन वी ए आर” प्रणाली का उपयोग करती है।
4डी –वी ए आर / हाइब्रिड डेटा आत्मसातीकरण: ब्रिटेन मौसम कार्यालय (यू के एम ओ) से प्राप्त वैरिएशनल कोड्स को एन सी यू एम के अनुरूप अनुकूलित किया गया है, जो विशेष रूप से मॉनसून एवं चक्रवात के आरंभिक विश्लेषण के लिए महत्त्वपूर्ण रडार एवं उपग्रह प्रेक्षणों का प्रभावी प्रबंधन करते हैं।
हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर: सुपरकंप्यूटिंग घटक: “अरुणिका” सुपरकंप्यूटर में एन वीडिया /ए एम डी जीपीयू का उपयोग किया गया है, साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग (ए आई /एम अल) आधारित त्वरित प्रसंस्करण हेतु सी यू डी ए लाइब्रेरीज़ का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें ग्राफ कास्ट तथा पंगु डाउनस्केलिंग जैसी उन्नत प्रणालियाँ सम्मिलित हैं।
यह जानकारी केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 11 फरवरी 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत की।
अनुलग्नक -1
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मापदंड / प्रणाली
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दिसम्बर 2014
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दिसम्बर 2025
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स्वचालित मौसम स्टेशन नेटवर्क
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12
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1008
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डॉप्लर मौसम रडार
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15
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47
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वर्षा मापन केंद्र
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3500
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6700
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रनवे विज़ुअल रेंज सिस्टम
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20
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186 (49 दृष्टि + 137 एफ एस एम आर वी आर )
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आर डब्ल्यू वाई पर मौजूदा मौसम संकेतक सिस्टम
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99 हवाई अड्डों में से 29 हवाई अड्डों पर
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सभी एयरपोर्ट आर डब्ल्यू वाई इंस्ट्रूमेंट्स से लैस हैं, जिसमें सभी नए एयरपोर्ट भी शामिल हैं (107 एयरपोर्ट में से 93 एयरपोर्ट पर 137 डिजिटल वर्तमान मौसम संकेतक प्रणाली)
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दबाव मापन
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पारा बैरोमीटर
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डिजिटल बैरोमीटर
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नगरीय पूर्वानुमान केंद्रों की संख्या
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300 शहर
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1601 शहर
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नाऊकास्ट केंद्र
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141
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1211
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उच्च प्रदर्शन कम्प्यूटिंग (एच पी सी)
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1.1 पेटा फ्लॉपस प्रोसेसिंग स्पीड
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28 पेटा फ्लॉपस प्रोसेसिंग स्पीड
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ऊपरी वायु अवलोकन
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43 आर एस /आर डब्ल्यू केंद्र
62 पायलट बलून स्टेशन
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56 आर एस /आर डब्ल्यू केंद्र
62 पायलट बलून स्टेशन
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उच्च गति हवा मापन
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19
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36 (गोवा केंद्र बंद किया गया)
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उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए प्रारंभिक चेतावनियाँ
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कोई एक्सटेंडेड रेंज आउटलुक जारी नहीं किया गया।
ट्रैक और इंटेंसिटी का कोई प्री-जेनेसिस फोरकास्ट जारी नहीं किया गया।
चक्रवती तूफान के लिए अर्ली वॉर्निंग डीप डिप्रेशन स्टेज से 3 दिन पहले जारी की गई थी।
2006-13 के दौरान 24 घंटे के लिए पूर्वानुमान त्रुटि 125 किमी थी।
2006-13 के दौरान 72 घंटे के लिए पूर्वानुमान त्रुटि 125 किमी थी।
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अप्रैल 2018 के बाद से आगामी दो हफ़्तों के लिए प्रत्येक गुरुवार को समूचे उत्तरी हिंद महासागर में साइक्लोजेनेसिस के लिए एक्सटेंडेड रेंज आउटलुक जारी किया जा रहा है।
अप्रैल, 2022 के बाद से समुद्री तूफान के लिए ट्रैक और संभावित क्षमता का प्री-जेनेसिस फोरकास्ट कम दबाव चरण से ही जारी किया जा रहा है।
अप्रैल, 2022 के बाद से समुद्री तूफान के लिए अर्ली वॉर्निंग डीप डिप्रेशन स्टेज से 5 दिन पहले जारी की जाती जा रही है।
2020-24 के दौरान 24 घंटे के पूर्वानुमान त्रुटि को घटाकर 16.2 किमी कर दिया गया था।
2020-24 के दौरान 72 घंटे के फोरकास्ट एरर को घटाकर 69.5 km कर दिया गया था।
तूफान के ट्रैक, इसकी क्षमता और कहाँ टकराएगा आदि की सटीकता 48 घंटे पहले तक 35-40%, 15-30% और 45-65% तक बढ़ गई। इन सभी सुधारों से खराब मौसम की घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता में काफी सुधार हुआ है और चक्रवाती तूफान के कारण मरने वालों की संख्या में काफी कमी आई है, जैसे कि 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन में लगभग 7000 लोगों की जान चली गई थी, जबकि हाल के वर्षों में चक्रवाती तूफ़ानों के असर से पूरे क्षेत्र में यह संख्या घटकर 100 से भी कम हो गई है। 1 साइक्लोन का सटीक पूर्वानुमान मरने वालों के परिजनों को राहत अनुदान देने, लोगों को निकालने के खर्च और ऊर्जा, समुद्री, हवाई, रेलवे इत्यादि क्षेत्रों में बचत के मामले में लगभग 1100 करोड़ रुपये बचाता है।
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कृषि मौसम सलाह
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कृषि-मौसम परामर्श लगभग 70 लाख किसानों तक पहुंच रहा था।
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अब कृषि-मौसम परामर्श लगभग 276.7 70 लाख किसानों तक पहुंच रहा रहा।
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जिला कृषि –मौसम इकाई
कृषि ए डब्ल्यू एस
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जिला कृषि –मौसम इकाई अस्तित्व में ही नहीं थी (डी ए एम यू).
125 कृषि –स्वचालित मौसम केंद्र (कृषि-ए डब्ल्यू एस) स्थापित किए गए थे।
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199 जिला कृषि –मौसम इकाईयों की स्थापना की गई, जो कार्य भी कर रही हैं
डी ए एम यू परियोजना के अंतर्गत कुल 200 कृषि –स्वचालित मौसम केंद्र (कृषि-ए डब्ल्यू एस) कृषि विज्ञान केंद्रों (के वी एस) पर स्थापित किए जा चुके हैं
2009 से 2012 के बीच स्थापित किए गए 125 कृषि स्वचालित मौसम केंद्रों को 2025-2026 तक 330 कृषि स्वचालित मौसम केंद्रों की परियोजना के अंतर्गत उन्नत किया जा रहा है।
सभी 130 ए एम एफ यू को 330 कृषि ए डब्ल्यू एस परियोज 2025-2026 के अंतर्गत चार डेप्थ सॉइल सेंसर और सनशाइन ड्यूरेशन और ग्लोबल रेडिएशन मेज़रमेंट के साथ कृषि ए डब्ल्यू एस के साथ अपग्रेड किया जा रहा है।
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कृषि-मौसम संबंधी सलाह का कवरेज
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समाधान जिला स्तर तक जारी रहा।
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भारत के सभी जिलों में जिला स्तर पर कृषि परामर्श सेवाएं दे जा रही हैं।
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मध्यम अवधि पूर्वानुमान
वैश्विक पूर्वानुमान प्रणाली
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2 मॉडल (जी एफ एस, एन सी यू एम) के साथ 25 किमी रिज़ॉल्यूशन
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6 किमी भारत फोरकास्टिंग सिस्टम: सरकार ने 27 मई 2025 को स्वदेश निर्मित विश्व स्तरीय न्यूमेरिकल वेदर प्रेडिक्शन मॉडल बी एफ एस लॉन्च किया। यह पंचायत/पंचायतों के क्लस्टर लेवल तक बेहतर और सटीक बारिश का पूर्वानुमान करने का वादा करता है। 2 और मॉडल: 2 मॉडल (जी एफ एस, एन सी यू एम) के साथ 12 किमी रिज़ॉल्यूशन
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मौसम विज्ञान सब-डिवीजन लेवल पर लू (हीट वेव) के अनुमान की सटीकता
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68 % 24 घंटों के लिए लीड अवधि
50 % 48 घंटों के लिए लीड अवधि
27 % 72 घंटों के लिए लीड अवधि
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100 % 24 घंटों के लिए लीड अवधि
95% 48 घंटों के लिए लीड अवधि
90 % 72 घंटों के लिए लीड अवधि
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मूसलाधार बारिश पूर्वानुमान सटीकता
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दक्षिण पश्चिम मॉनसून की भारी वर्षा चेतावनी के लिए पता लगाने की संभावना (पी ओ डी) है
50 – 1 दिन के लिए
48 - 2 दिन के लिए
37 - 3 दिन के लिए
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दक्षिण पश्चिम मॉनसून की भारी वर्षा चेतावनी के लिए पता लगाने की संभावना (पी ओ डी) है
85 – 1 दिन के लिए
73 - 2 दिन के लिए
67 - 3 दिन के लिए
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गर्जना और वज्रपात की चेतावनी
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सिर्फ़ मीटियोरोलॉजिकल सब-डिवीज़न स्तर तक 3 दिन पहले।
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ज़िला लेवल तक 5 दिन पहले दिन में दो बार आंधी-तूफ़ान और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की जाती है। 2025 में 24 घंटे के आंधी-तूफ़ान के अनुमान का पता चलने की संभावना 0.89 है, जबकि साल 2016 में यह 0.31 थी।
इसी तरह, 3 घंटे के आंधी-तूफ़ान के अनुमान का पता चलने की संभावना 2025 में 0.93 हो गई, जबकि साल 2014 में यह 0.61 थी।
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मात्रात्मक वर्षा पूर्वानुमान (QPF)
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2014 में इसकी वैधता 2 दिन और आउटलुक 3 दिन था।
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2024 तक, वैधता अवधि बढ़कर 7 दिन हो गई है और 2016 से सटीकता में 10-15% से ज़्यादा सुधार हुआ है।
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मुंबई महानगर क्षेत्र में स्वचालित वर्षा मापी (एआरजी) और डॉप्लर मौसम रडार (डीडब्ल्यूआर) के मेसो-नेटवर्क की स्थापना
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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा 2 ए आर जी की स्थापना
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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा 57 ए आर जी की स्थापना
60 ए आर जी की स्थापना बी एम सी द्वारा की गई
सी – बैंड डॉप्लर मौसम रडार वेरावली में जनवरी 2022 में चालू हो गया।
आई आई टी एम, पुणे की परियोजना के अंतर्गत 4 एक्स -बैंड डॉप्लर वेदर रडार लगाए गए।
मोबाइल ऐप (मुंबई वेदर लाइव) और वेब बेस्ड डेटा पोर्टल (मॉनसून ऑनलाइन) के माध्यम से वास्तविक समय में बारिश की जानकारी का प्रसार http://mumbairain.tropmet.res.in/
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एन डब्ल्यू पी मॉडल में डाटा असीमिलेशन
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50 जी बी प्रति दिन
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500 जी बी प्रति दिन
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(रिलीज़ आईडी: 2226677)
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