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चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण, तूतीकोरिन को सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल भवनों के लिए प्लेटिनम रेटिंग तथा ऊर्जा-कुशल, टिकाऊ इमारतों के लिए ऊर्जा दक्षता प्रमाणन मिला

प्रविष्टि तिथि: 11 FEB 2026 8:02PM by PIB Delhi

वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण, भारतीय हरित भवन परिषद द्वारा प्रदान किए जाने वाले सर्वोच्च प्रमाणन, प्रतिष्ठित आईजीबीसी प्लैटिनम रेटिंग प्राप्त करने वाला भारत का पहला प्रमुख बंदरगाह बन गया है।

प्रशासनिक भवन सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए बंदरगाह प्राधिकरण की हरित नीति और अपशिष्ट प्रबंधन योजना का पालन करता है। इसमें छत पर सौर पैनल और उच्च सौर परावर्तन सूचकांक (एसआरआई) वाली परावर्तक रूफ कोटिंग लगी है, जो नगरीय ऊष्मा द्वीप प्रभाव को कम करने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में सहायक है। आईओटी-सक्षम जल मीटर, आंतरिक वायु गुणवत्ता (आईएक्यू) निगरानी प्रणाली, वर्षा जल संचयन और जल-बचत प्लंबिंग उपकरणों के माध्यम से संसाधन दक्षता को मजबूत किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप पीने योग्य पानी के उपयोग में 37 प्रतिशत की कमी आई है। सभी अपशिष्ट जल का उपचार परिसर में स्थित सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) में किया जाता है और इसका पूर्णतः पुन: उपयोग किया जाता है।

कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, प्रशासनिक भवन 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा पर संचालित होता है, जिसमें 89 प्रतिशत बिजली सौर ऊर्जा के माध्यम से परिसर में ही उत्पन्न होती है और शेष 11 प्रतिशत बंदरगाह के बाहरी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त होती है।

निवासियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और समावेशिता को भी प्राथमिकता दी गई है। इस इमारत में धूम्रपान निषेध नीति लागू है, पर्यावरण के अनुकूल सफाई रसायनों का उपयोग किया जाता है और यह फिसलन-रोधी रैंप, दिव्यांगजनों के अनुकूल (डीएपी) शौचालय, इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर एवं ब्रेल और ऑडियो सहायता से लैस लिफ्ट से सुसज्जित है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए आसान पहुंच सुनिश्चित होती है। सतत विकास के चलन को सुदृढ़ करने के लिए वीओसी पोर्ट में सात आईजीबीसी मान्यता प्राप्त पेशेवर प्रभावी कार्यान्वयन और निरंतर सुधार की देखरेख कर रहे हैं। व्यापक वृक्षारोपण के कारण परिसर का 70 प्रतिशत से अधिक भाग हरित क्षेत्र है।

इसके अलावा वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह को भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अधीन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा शून्य और शून्य प्लस प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए हैं। शून्य प्रमाणन प्रणाली इस सिद्धांत पर आधारित है कि किसी भवन की कुल वार्षिक ऊर्जा मांग पूरी तरह से परिसर के भीतर या परिसर के बाहर स्थित नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से पूरी की जाती है। शून्य भवन एक शून्य उत्सर्जन ऊर्जा भवन है, जिसका अर्थ है कि यह सालाना जितनी ऊर्जा की खपत करती है, उतनी ही हरित ऊर्जा का उत्पादन करती है, जिसका ऊर्जा प्रदर्शन सूचकांक (ईपीआई) शून्य और 10 किलोवाट-घंटे/वर्ग मीटर/वर्ष के बीच होता है तथा यह ऊर्जा दक्षता एवं संतुलन पर केंद्रित होती है। शून्य प्लस भवन एक नेट पॉजिटिव ऊर्जा भवन है जो अपनी खपत से अधिक स्थल-आधारित नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन करता है, जिसका ईपीआई शून्य किलोवाट-घंटे/वर्ग मीटर/वर्ष से कम है, जिससे अधिशेष ऊर्जा को विद्युत ग्रिड में निर्यात किया जा सकता है। प्रमाणन के अंतर्गत, वीओसी बंदरगाह के अस्पताल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआईएसएफ) बैरकों को शून्य प्लस प्रमाणन प्रदान किया गया है, जबकि बंदरगाह के प्रशासनिक भवन और अतिथि गृह को शून्य प्रमाणन प्रदान किया गया है।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ की गई मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और हरित सागर - ग्रीन पोर्ट दिशानिर्देशों के अनुरूप, वीओसी बंदरगाह कई हरित पहलों और संसाधन-कुशल प्रथाओं को लागू कर रहा है। यह दोहरी उपलब्धि समावेशी विकास में भारतीय बंदरगाहों के बीच वीओसी बंदरगाह के नेतृत्व को उजागर करती है और पूरे देश में टिकाऊ एवं ऊर्जा-कुशल बंदरगाह अवसंरचना के लिए एक मानदंड स्थापित करती है।

वीओसी बंदरगाह के अध्यक्ष श्री सुशांत कुमार पुरोहित, आईआरएसईई ने कहा कि इस परियोजना में पर्यावरणीय प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता तथा भवन उपयोगकर्ताओं के कल्याण को बेहतर बनाने हेतु लक्षित भवन उन्नयन और नीतिगत उपाय शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि आईजीबीसी प्लेटिनम रेटिंग के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) प्रमाणन प्राप्त करना एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है, जिससे वीओसी बंदरगाह यह विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाला भारत का पहला प्रमुख बंदरगाह बन गया है।

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पीके/केसी/एसएस


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