गृह मंत्रालय
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साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग और जांच

प्रविष्टि तिथि: 11 FEB 2026 4:35PM by PIB Delhi

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। साइबर अपराध सहित अपराधों की रोकथाम करने, पता लगाने, जांच और अभियोजन की मुख्य जिम्मेदारी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की है, जिसके लिए वे अपने कानून प्रवर्तन एजेंसी (एलईए) का इस्तेमाल करते हैं। केंद्र सरकार, एलईए की क्षमता निर्माण के लिए कई योजनाओं के तहत सलाह और वित्तीय मदद प्रदान करके राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की पहलों का सहयोग करती है।

गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए एक संबंधित कार्यालय के तौर पर 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (आई4सी) की स्थापना की।

आई4सी के एक भाग के रूप में 'राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल' (एनसीआरपी) (https://cybercrime.gov.in) शुरू किया गया है, जिससे जनता सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सके, जिसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सर्वेक्षण (आई4सी) के अंतर्गत 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली' (सीएफसीएफआरएमएस) को वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और जालसाजों के पैसे की हेराफेरी रोकने के लिए वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। आई4सी के माध्यम से संचालित सीएफसीएफआरएमएस के अनुसार, 31.12.2025 तक 23.61 लाख से अधिक शिकायतों में 8,189 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई जा चुकी है। ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज करने में सहायता के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर '1930' शुरू किया गया है। आई4सी की ओर से संचालित राष्ट्रीय वित्तीय समीक्षा (एनसीआरपी) और सीएफसीएफआरएमएस के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 तक साइबर धोखाधड़ी के कारण नागरिकों की रिपोर्ट की गई कुल राशि इस प्रकार है:

 

वर्ष

एनसीआरपी पर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों की संख्या

रिपोर्ट की गई राशि

(करोड़ ₹ में)

2021

2,62,846

551

2022

6,94,446

2290

2023

13,10,357

7465

2024

19,18,835

22848

2025

24,02,579

22495

 

नोट: डेटा तेजी से बदलता है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज साइबर अपराध की घटनाओं, उन्हें एफआईआर में बदलने और उसके बाद की कार्रवाई, जैसे कि आरोपपत्र दाखिल करना, गिरफ्तारी और शिकायतों का समाधान, संबंधित राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से कानून के प्रावधानों के अनुसार की जाती है।

अत्याधुनिक राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र (पूर्व में राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक (जांच) प्रयोगशाला {एनसीएफएल(I)}) की स्थापना, सूचना एवं बाल विकास आयोग (आई4सी) के अंतर्गत, नई दिल्ली (18.02.2019 को) और असम (29.08.2025 को) में की गई है। इसका उद्देश्य राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश पुलिस के जांच अधिकारियों (आईओ) को शुरुआती चरण में साइबर फोरेंसिक मदद प्रदान करना है। 31.12.2025 तक, राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र, नई दिल्ली ने साइबर अपराधों से संबंधित 13,299 से अधिक मामलों में राज्य/ केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अपनी सेवाएं प्रदान की हैं।

 

केंद्र सरकार ने राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के अपग्रेडेशन के लिए राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को लगातार मदद की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान, झारखंड, केरल, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, गुजरात, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तराखंड, असम, मणिपुर, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, जम्मू और कश्मीर, मेघालय, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और तेलंगाना को मिलाकर 27 राज्य/ केंद्र शासित प्रदेशों की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में साइबर फोरेंसिक विभाग काम करते हैं। भारत सरकार ने हैदराबाद स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) में 37.34 करोड़ रुपये की कुल लागत से एक राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (एनसीएफएल (ई)) स्थापित की। इसके साथ ही, साइबर अपराध मामलों की जांच में सहायता के लिए देश भर में 7 केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं (सीएफएसएल) भी कार्यरत हैं।

गृह मंत्रालय ने 'महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी)' योजना के अंतर्गत राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण के लिए 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद जारी की है। इस सहायता राशि में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, कनिष्ठ साइबर सलाहकारों की नियुक्ति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, लोक अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण जैसे कार्य शामिल हैं। 33 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं और 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसी कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच, फोरेंसिक आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एमएम


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