संस्कृति मंत्रालय
जी20 सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक सांस्कृतिक कूटनीति
प्रविष्टि तिथि:
12 FEB 2026 1:48PM by PIB Delhi
भारत सरकार ने सांस्कृतिक धरोहरों, प्रदर्शनियों और विरासत को विकसित करने और प्रदर्शित करने के लिए कई पहल की हैं। जी20 संस्कृति कार्य समूह ने 'काशी संस्कृति पथ' नामक एक निष्कर्ष दस्तावेज जारी किया, जिसमें वर्ष 2030 के बाद के विकास एजेंडा में "संस्कृति को एक स्वतंत्र लक्ष्य के रूप में आगे बढ़ाने" की वकालत की गई। नई दिल्ली लीडर्स डेक्लेरेशन में इसे सर्वसम्मति से समर्थन दिया गया, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
जी20 देशों के प्रतिभागियों के समक्ष भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन करने के लिए संस्कृति मंत्रालय ने विभिन्न सहयोगी अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक परियोजनाएं शुरू की।
- चार वैश्विक विषयगत वेबिनार,
- प्रदर्शनियां – पुनर्खोज: खजुराहो में खजानों की वापसी; अस्तित्व बनाए रखना: भुवनेश्वर में शिल्प शैली; हम्पी में बुनी कथाएं;
- जी20 कला परियोजना – हम सब मिलकर कला का सृजन करते हैं;
- जी20 कविता संकलन - एक ही छत और संस्कृति एकजुट करती है अभियान;
- जी20 ऑर्केस्ट्रा - सुर वसुधा।
- नई दिल्ली में जी20 लीडर्स समिट के दौरान जी20 डिजिटल म्यूजियम (कल्चर कॉरिडोर) और प्रदर्शनी – ‘रुट्स एंड रूट्स’ का आयोजन किया गया।
जी20 की पहलों को समन्वित करते हुए, पांडुलिपि विरासत के माध्यम से भारत की ज्ञान विरासत को याद करने पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 11-13 सितंबर, 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।
भारत की जी20 अध्यक्षता 2023 के दौरान, नई दिल्ली के भारत मंडपम और देश भर के कई शहरों में स्थित अन्य सांस्कृतिक धरोहर स्थलों, स्मारकों आदि में विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। भारत मंडपम आत्मनिर्भर मॉडल पर संचालित होता है। जी20 आयोजनों के दौरान उपयोग किए गए धरोहर स्थलों, संग्रहालयों और अन्य सांस्कृतिक संस्थानों का रखरखाव संस्कृति मंत्रालय और उसके संगठनों की मौजूदा योजनाओं और नियमित बजटीय प्रावधानों के तहत किया जाता है।
सांस्कृतिक कूटनीति की पहलों के परिणामों का मूल्यांकन सांस्कृतिक गतिविधियों का पैमाना और विस्तार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों (सीईपी) की प्रभावशीलता, स्थापित संस्थागत साझेदारियां, संपन्न समझौते/समझौता ज्ञापन, क्षमता निर्माण संबंधी पहल जैसे मापने योग्य संकेतकों के आधार पर किया जाता है। इन पहलों के परिणामस्वरूप भारत में कई मूल्यवान कलाकृतियों और पुरावशेषों की वापसी हुई है।
भारत सरकार देश को वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए अपनी सभी सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ाने और विस्तारित करने के लिए प्रयासरत है। संस्कृति मंत्रालय भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने और भारत की वैश्विक छवि को निखारने के लिए "वैश्विक सहभागिता योजना" लागू करता है, जिसका संचालन विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के माध्यम से किया जाता है।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/एके/एचबी
(रिलीज़ आईडी: 2227020)
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