पर्यटन मंत्रालय
प्रसाद योजना के तहत महाराष्ट्र में तीर्थयात्रा संबंधी बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाना
प्रविष्टि तिथि:
13 FEB 2026 11:53AM by PIB Delhi
“तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक एवं विरासत संवर्धन अभियान" (प्रसाद) के तहत पर्यटन मंत्रालय का लक्ष्य तीर्थस्थलों और विरासत स्थलों पर पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे का समग्र विकास करके आध्यात्मिक एवं तीर्थयात्रा संबंधी अनुभवों को बढ़ाना है। अब तक, मंत्रालय ने प्रसाद योजना के तहत 28 राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों में कुल 1,726.74 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 54 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें महाराष्ट्र में वर्ष 2017-18 में 45.41 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत एक परियोजना, नासिक स्थित "त्र्यंबकेश्वर का विकास" भी शामिल है।
प्रसाद योजना के तहत वित्तीय सहायता हेतु राज्य सरकारों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के प्रशासनों द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत करने की एक सतत प्रक्रिया है। राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों की जांच निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाती है और वित्तीय सहायता निर्धारित शर्तों की पूर्ति एवं निधि की उपलब्धता के अधीन प्रदान की जाती है। वर्तमान में, एलोरा स्थित श्री ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के विकास हेतु कोई भी प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय के समक्ष विचाराधीन नहीं है।
प्रसाद योजना के तहत वहन क्षमता और भीड़-भाड़ संबंधी मापदंड परियोजना नियोजन के अभिन्न अंग हैं। इस योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, तीर्थ स्थलों का चयन करते समय तीर्थयात्रियों की भीड़ को प्रबंधित करने हेतु उनकी वहन क्षमता को ध्यान में रखा जाता है। भीड़-भाड़ को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने हेतु पर्यटन मंत्रालय ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कतार प्रबंधन परिसर, प्रतीक्षा कक्ष, पहुंच मार्गों का चौड़ीकरण आदि जैसे विभिन्न उपायों को मंजूरी दी है। इसके अलावा, स्वच्छता, सुरक्षा, अंतिम-छोर तक कनेक्टिविटी और सार्वभौमिक पहुंच को बेहतर बनाने के हेतु सीसीटीवी निगरानी प्रणाली की स्थापना, एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण कक्षों की स्थापना, अग्नि सुरक्षा तंत्रों का प्रावधान, प्रकाश व्यवस्था, पहुंच मार्गों का विकास, रेलिंग सहित पगडंडियां, साइनबोर्ड, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का निर्माण आदि जैसे महत्वपूर्ण उपायों को मंजूरी दी गई है।
इस योजना दिशा-निर्देशों के अनुरूप, संबंधित राज्य सरकार/केन्द्र-शासित प्रदेश प्रशासन, स्थानीय निकायों और अन्य हितधारकों (मंदिर प्राधिकरण/धार्मिक ट्रस्ट, गैर सरकारी संगठन और समितियां आदि) के परामर्श से चिन्हित परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करता है। इन योजनाओं के तहत परियोजनाओं का कार्यान्वयन संबंधित राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों द्वारा संबंधित हितधारकों के साथ घनिष्ठ समन्वय से किया जाता है।
प्रसाद योजना के तहत निर्मित मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और स्थलों पर पहुंच की व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं स्थानीय अधिकारियों को तीर्थयात्रियों की आवाजाही का प्रबंधन करने और तीर्थयात्रा के चरम मौसम के दौरान आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में मदद करती हैं।
प्रसाद योजना के तहत मंत्रालय का लक्ष्य रोजगार सृजन, पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और देश भर में स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे को समग्र और टिकाऊ तरीके से विकसित करना है।
यह जानकारी केन्द्रीय पर्यटन तथा संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 12 फरवरी 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/आर/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2227466)
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