रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : उर्वरक विभाग
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आठ पद्म पुरस्कार विजेता प्रगतिशील किसानों ने संतुलित उर्वरक उपयोग पर राष्ट्रीय संवाद का नेतृत्व किया


खेती से नीति तक: पुरस्कार विजेता किसानों ने मिट्टी की सेहत की रणनीति निर्धारित की

'धरती मां को बचाएं अभियान किसानों के नेतृत्व वाली समाधानों के साथ तेज हुआ

प्रविष्टि तिथि: 13 FEB 2026 6:14PM by PIB Delhi

उर्वरक विभाग ने आज शास्त्री भवन में मिट्टी की सेहत को सही करने और देशभर में संतुलित और जिम्मेदार उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक अनूठी पहल में उच्च-स्तरीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया।

यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की “धरती मां को बचाओ" की अपील और रसायन और उर्वरक मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व के दृष्टिकोण के साथ मेल खाती है।

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इस बैठक की अध्यक्षता उर्वरक विभाग के सचिव श्री रजत कुमार मिश्र ने की। इसमें देश भर के पद्म पुरस्कार विजेता प्रगतिशील किसान और कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए।

श्री मिश्र ने भागीदारों का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति और मार्गदर्शन विभाग को मूल्यवान दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि किसानों तक समय पर और सटीक जानकारी पहुँचाना मिट्टी की सेहत की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों की सिफारिशों को पायलट परियोजनाओं के रूप में लागू किया जा सकता है, ताकि संतुलित उर्वरक उपयोग की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें। उन्होंने पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत के दौरान असंतुलित उर्वरक उपयोग के कारण समय के साथ मिट्टी की सेहत में गिरावट को रेखांकित किया।

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पद्म श्री पुरस्कार प्राप्त किसानों से सुझाव

पद्म पुरस्कार विजेता श्री उमाशंकर पांडे ने सभी राज्यों में विभाग के साथ सहयोग करने की तत्परता व्यक्त की और किसानों को सतत प्रथाओं के बारे में शिक्षित करने के लिए "जहर मुक्त खेती स्कूल" शुरू करने का सुझाव दिया।

पद्म पुरस्कार विजेता श्री राम शरण वर्मा ने फसल रोटेशन और विविधीकरण पर बल दिया और मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग पर बल दिया। उन्होंने हरित खाद को बढ़ावा देने, उर्वरक बैग के आकार को युक्तिसंगत बनाने और "ज्यादा उर्वरक का मतलब अधिक लाभ" की मानसिकता को बदलने की सिफारिश की है।

पद्म पुरस्कार विजेता श्री भारत भूषण त्यागी ने फसल विविधीकरण और घनत्व पर, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन के महत्व पर बल दिया और गांव स्तर पर कंपोस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि "फसल अवशेष समृद्धि की नींव है" यह संदेश हर किसान तक पहुँचाना चाहिए।

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श्री सेठ पाल सिंह ने कहा कि अत्यधिक उर्वरक बिक्री के दबाव को भी एक कारक माना जाना चाहिए जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कृषि भूमि के लिए अधिकतम उर्वरक की आवश्यकता का सही अनुमान लगाया जाना चाहिए और किसानों को इसके संतुलित उपयोग पर व्यवस्थित रूप से मार्गदर्शन देने की जरूरत है।

पद्म पुरस्कार विजेता श्री कंवल सिंह ने गौशालाओं को जैविक खाद उत्पादन इकाइयों के रूप में विकसित करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने स्वास्थ्य-केंद्रित कृषि के लिए एक संरचित श्रृंखला बनाने और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों का सही मार्गदर्शन देने पर बल दिया।

पद्म श्री पुरस्कार विजेता श्री चंद्रशेखर सिंह ने जैविक उत्पादों की कड़ी गुणवत्ता जांच और पारदर्शी उपभोक्ता जानकारी की आवश्यकता का आह्वान किया। उन्होंने प्रगतिशील पुरस्कार विजेता किसानों के नेतृत्व में एफपीओ के अंतर्गत गांव-स्तरीय जागरूकता अभियान को प्रतिज्ञा-आधारित आंदोलन के रूप में लागू करने की सिफारिश की।

पद्म पुरस्कार विजेता श्री नेक राम शर्मा ने ऐसे आदर्श किसानों की पहचान करने पर बल दिया जो मातृभूमि की रक्षा में उदाहरण पेश कर सकें। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण कृषि का समर्थन करता है और कह कि नौ प्रकार के अनाज का उपयोग करने वाली पारंपरिक नवग्रह रस्में फसल विविधीकरण का प्रतीक हैं और इन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

श्री श्याम सुंदर पालीवाल ने मिट्टी की उर्वरता को पुनर्जीवित करने के लिए प्राकृतिक खेती के तरीकों का समर्थन किया और ग्राम पंचायत स्तर पर प्राकृतिक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया।

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प्रतिभागियों ने कहा कि गांव स्तर पर खाद और उर्वरक की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करने से संतुलित और जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।

बैठक का समापन इस सहमति के साथ हुआ कि मिट्टी की सेहत की सुरक्षा और धरती मां की रक्षा के लिए संतुलित उर्वरक का उपयोग, जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, और सतत किसान जागरूकता अभियान आवश्यक हैं। विभाग ने आश्वासन दिया कि वह सत्र के दौरान प्राप्त सिफारिशों पर सकारात्मक विचार करेगा और उन्हें आगे बढ़ाएगा।

बैठक में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा, संयुक्त सचिव कृष्ण कांत पाठक, संयुक्त सचिव अनुराग रोहतगी, उप सचिव अमर कुशवाहा, उप निदेशक गौरी शंकर शंकर और विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए ।

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पीके/केसी/एसके


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