संचार मंत्रालय
टीएसडीएसआई ने दूरसंचार विभाग के सहयोग से की 3जीपीपी एसए और सीटी कार्य समूह बैठकों की गोवा में सफल मेजबानी
5जी उन्नत विनिर्देशों को आगे बढ़ाने और रिलीज 20 के अंतर्गत 6जी अध्ययनों को शुरू करने पर केंद्रित रही चर्चाएं
तकरीबन 50 देशों के लगभग 700 प्रतिनिधियों की भागीदारी से पुष्ट हुई वैश्विक दूरसंचार मानकों के निर्धारण में भारत की बढ़ती भूमिका
भारत में 3जीपीपी बैठकों के आयोजन से स्वदेशी नवोन्मेषकों को मिला अंतरराष्ट्रीय मानक विकास में प्रत्यक्ष योगदान का अवसर
प्रविष्टि तिथि:
13 FEB 2026 8:34PM by PIB Delhi
भारतीय दूरसंचार मानक विकास सोसायटी (टीएसडीएसआई) ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) के सहयोग से तीसरी पीढ़ी की सहभागिता परियोजना (3जीपीपी) के एसए (सेवा और प्रणाली पहलू) तथा सीटी (कोर नेटवर्क और टर्मिनल) कार्य समूहों की बैठकों का गोवा में 9 से 13 फरवरी 2026 तक सफल आयोजन किया। इन बैठकों में तकरीबन 50 देशों के लगभग 700 प्रतिनिधि शामिल हुए जिससे वैश्विक दूरसंचार मानकों को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका का पता चलता है।




डीओटी के सहयोग से टीएसडीएसआई भारत में 3जीपीपी बैठकों का आयोजन कराता रहा है ताकि स्वदेशी नवोन्मेषक, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप अंतरराष्ट्रीय मोबाइल संचार मानकों के विकास में प्रत्यक्ष तौर पर हिस्सा ले सकें। भारतीय हितधारक लॉजिस्टिक और संसाधन के अवरोधों को घटा कर 5जी उन्नत और उदीयमान 6जी प्रौद्योगिकियों के लिए मानकों को परिभाषित करने में सक्रिय योगदान करने में समर्थ हैं।
इन बैठकों में एसए#1 से एसए#6 तथा सीटी#1, सीटी#3 और सीटी#4 कार्य समूहों की बैठकें शामिल थीं। ये बैठकें 5जी उन्नत में जारी कार्य और रिलीज 20 के अंतर्गत 6जी के लिए तकनीकी अध्ययन शुरू करने पर केंद्रित थीं।
बैठकों में तकनीकी चर्चा 5जी उन्नत विनिर्देशों को आगे बढ़ाने, 6जी अध्ययन के विषयों की शुरुआत तथा कोर नेटवर्क, टर्मिनल, सेवा क्षमताओं और सिस्टम आर्किटेक्चर के लिए मानकों को परिभाषित करने पर केंद्रित रही। ये चर्चाएं भविष्य के निर्गमों का मार्गदर्शन करने के अलावा अगली पीढ़ी की मोबाइल प्रौद्योगिकियों को आकार देने में भारत की सतत भागीदारी भी सुनिश्चित करेंगी।
3जीपीपी के बारे में-
तीसरी पीढ़ी की सहभागिता परियोजना (3जीपीपी) दूरसंचार मानक संगठनों की वैश्विक सहयोग संस्था है। यह 5जी और भविष्य की 6जी प्रौद्योगिकियों समेत मोबाइल संचार प्रणालियों से संबंधित विनिर्देशों को विकसित करने के लिए जिम्मेदार है। यह अपना कामकाज 3 तकनीकी विशिष्टता समूहों (टीएसजी) के अंतर्गत संचालित करती है। ये समूह हैं- एसए (सेवा और प्रणाली पहलू), सीटी (कोर नेटवर्क और टर्मिनल) तथा आरएएन (रेडियो एक्सेस नेटवर्क)। विस्तृत तकनीकी विनिर्देशों को विकसित करने में अनेक कार्य समूह शामिल हैं।
टीएसडीएसआई के बारे में-
भारतीय दूरसंचार मानक विकास सोसायटी (टीएसडीएसआई) विशेष रूप से भारत से जुड़ी आवश्यकताओं के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय मानकों में समाधानों का योगदान, बौद्धिक संपदा की रक्षा और स्वदेशी विनिर्माण विशेषज्ञता के सृजन में सहयोग करती है। दूरसंचार विभाग ने टीएसडीएसआई को भारत के आधिकारिक दूरसंचार मानक विकास संगठन (एसडीओ) के रूप में मान्यता दी है।
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