रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
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बल्क ड्रग पार्क

प्रविष्टि तिथि: 13 FEB 2026 5:25PM by PIB Delhi

औषधि विभाग द्वारा कार्यान्वित उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के तहत बल्क ड्रग पार्कों के लिए कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, औषधि विभाग एक अन्य स्कीम बल्क ड्रग पार्क संवर्धन योजना को लागू कर रहा है। इसके लिए 3,000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसके तहत आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश राज्यों में तीन बल्क ड्रग पार्कों को मंजूरी दी गई है और ये सभी संबंधित राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से विकास के विभिन्न चरणों में हैं। इन पार्कों की कुल परियोजना लागत 6,306.68 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें सामान्य अवसंरचना सुविधाओं के निर्माण के लिए प्रत्येक पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान शामिल है। इन पार्कों में थोक दवा या एपीआई निर्माताओं को पार्क में स्थापित इकाइयों के लिए रियायती दर पर भूमि और बिजली, पानी, अपशिष्ट उपचार संयंत्र, भाप, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और गोदाम जैसी सुविधाएं  उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है। बल्क ड्रग या एपीआई निर्माताओं को पार्क में स्थापित इकाइयों के लिए रियायती दर पर जल, अपशिष्ट उपचार संयंत्र, भाप, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और भंडारण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। संबंधित राज्यों की कार्यान्वयन एजेंसियों ने निश्चित पूंजी निवेश पर पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, राज्य वस्तु एवं सेवा कर प्रतिपूर्ति, स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क से छूट आदि के रूप में वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान किए हैं। इसके अलावा योजना में बल्क ड्रग के लिए पीएलआई योजना में प्राथमिकता प्राप्त उत्पादों के निर्माण के लिए इकाइयां स्थापित करने हेतु पार्कों में भूमि आवंटन के आवेदकों को भूमि आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।

हालांकि उक्त योजना के तहत तमिलनाडु के लिए किसी भी बल्क ड्रग पार्क को मंजूरी नहीं दी गई है। सरकार तमिलनाडु सहित पूरे देश में दवा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए चिकित्सा उपकरण पार्क संवर्धन योजना और उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना जैसी अन्य पहलों के माध्यम से प्रयासरत है। इन योजनाओं का विवरण इस प्रकार है:

(i) चिकित्सा उपकरण पार्क प्रोत्साहन योजना: चिकित्सा उपकरण पार्क प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य चिकित्सा उपकरण पार्कों में स्थापित चिकित्सा उपकरण इकाइयों को विश्वस्तरीय, साझा अवसंरचना सुविधाओं तक सुगम पहुंच प्रदान करना है। इस योजना के तहत तीन पार्क स्थापित किए जा रहे हैं और उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा, मध्य प्रदेश के उज्जैन और तमिलनाडु के कांचीपुरम में विकास कार्य उन्नत चरण में हैं। इन पार्कों की कुल परियोजना लागत 871.11 करोड़ रुपये है, जिसमें सामान्य अवसंरचना सुविधाओं के निर्माण के लिए प्रत्येक पार्क से 100 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान शामिल है। इससे संसाधनों के अनुकूलन और उत्पादन के कुशल होने पर कंपनियों को मिलने वाले लागत लाभ के माध्यम से उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने और उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद है। तीनों पार्कों के लिए सिविल निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। दिसंबर 2025 तक, 306.64 एकड़ क्षेत्र में फैले तीनों पार्कों में 199 चिकित्सा उपकरण निर्माताओं को भूमि आवंटित की जा चुकी है और 34 इकाइयों ने अपने संयंत्रों का निर्माण शुरू कर दिया है।

(ii) उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई):

1. भारत में महत्वपूर्ण सक्रिय औषधि अवयवों (केएसएम/डीआई/एपीआई) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना (जिसे आमतौर पर बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना के रूप में जाना जाता है): इस योजना का कुल बजट परिव्यय 6,940 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य उन महत्वपूर्ण औषधियों के निर्माण में उपयोग होने वाले सक्रिय औषधि सामग्री (अवयवों) (एपीआई) की आपूर्ति में व्यवधान को रोकना है जिनके लिए कोई विकल्प उपलब्ध नहीं हैं। यह योजना एकल स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता के कारण आपूर्ति व्यवधान के जोखिम को कम करके ऐसा करती है। योजना के तहत स्थापित ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के माध्यम से निर्मित 41 चिह्नित केएसएम/डीआई/एपीआई उत्पादों की बिक्री पर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। योजना के तहत 33 बल्क ड्रग्स पार्क के निर्माण के लिए 48 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 2 परियोजनाएं तमिलनाडु से स्वीकृत हैं।

2. फार्मास्यूटिकल्स के लिए पीएलआई योजना: इस योजना का कुल बजट परिव्यय 15,000 करोड़ रूपये है। इसका उद्देश्य फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ाकर तथा उच्च मूल्य वाली वस्तुओं के उत्पाद विविधीकरण में योगदान देकर देश की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है। यह योजना जैव फार्मास्यूटिकल्स, जटिल जेनेरिक दवाएं, पेटेंट प्राप्त दवाएं या पेटेंट की समाप्ति के निकट वाली दवाएं, ऑटोइम्यून दवाएं, कैंसर रोधी दवाएं आदि जैसी उच्च मूल्य वाली दवाओं के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है। साथ ही, बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना के तहत अधिसूचित दवाओं के अलावा अन्य केएसएम/डीआई/एपी के उत्पादन को भी प्रोत्साहित करती है, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है। इस योजना के तहत ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं के माध्यम से निर्मित फार्मास्यूटिकल्स और इन-विट्रो मेडिकल डिवाइस (आईवीडी) के निर्माण के लिए 55 आवेदकों को मंजूरी दी गई है। इनमें से 16 विनिर्माण इकाइयां तमिलनाडु में स्थित हैं।

3. चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना: इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2026-27 तक पांच वर्षों के लिए प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन के लिए 3,420 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस योजना के तहत चयनित कंपनियां रेडियोथेरेपी, इमेजिंग डिवाइस, एनेस्थीसिया, कार्डियो-रेस्पिरेटरी और क्रिटिकल केयर तथा इम्प्लांट डिवाइस सेगमेंट में घरेलू स्तर पर निर्मित चिकित्सा उपकरणों की बिक्री में वृद्धि के लिए पांच वर्षों तक वित्तीय प्रोत्साहन की पात्र होंगी। इस योजना के तहत कुल 28 स्वीकृत परियोजनाओं में से दो तमिलनाडु में स्वीकृत की गई हैं।

औषधि विभाग प्रारंभिक अनुसंधान से लेकर उत्पाद विकास और व्यावसायीकरण तक नवाचार जीवनचक्र में परियोजनाओं का सहयोग करके अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने के लिए 5000 करोड़ रुपये के स्वीकृत परिव्यय और वित्तीय वर्ष 2029-30 तक की योजना अवधि के साथ फार्मा-मेडटेक क्षेत्र (पीआरआईपी) में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की योजना को लागू कर रहा है। इस योजना के तहत सात उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित किए गए हैं। इनमें से प्रत्येक में एक राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थान है। इसमें अनुसंधान बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नवाचार में तेजी लाने और चिह्नित क्षेत्रों में उद्योग-अकादमिक सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें से एनआईपीईआर हैदराबाद स्थित उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) बल्क ड्रग्स पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

यह योजना उद्योगों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स को नई दवाओं, जटिल जेनेरिक और बायोसिमिलर दवाओं और नए चिकित्सा उपकरणों के विकास या शीघ्र सत्यापन के लिए पात्र अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है, जो चिह्नित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में आंतरिक रूप से या अकादमिक जगत के सहयोग से की जाती हैं। इस योजना के तहत पात्र अनुसंधान एवं विकास एवं नवाचार परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा और तमिलनाडु राज्य सहित सभी राज्यों में ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

फिलहाल भारत सरकार की ओर से बल्क ड्रग पार्क संवर्धन योजना के तहत तमिलनाडु राज्य में बल्क ड्रग पार्क स्थापित करने का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।

यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

पीके/केसी/आरकेजे


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