रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
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कार्डियक स्टेंट की कीमत में बढ़ोतरी

प्रविष्टि तिथि: 13 FEB 2026 5:18PM by PIB Delhi

कोरोनरी स्टेंट [बेयर मेटल स्टेंट (BMS) और ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (DES)] को ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 (DPCO, 2013) की अनुसूची-I में शामिल किया गया है और तदनुसार राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) DPCO, 2013 के प्रावधानों के अनुसार उनकी अधिकतम कीमतें निर्धारित करता है। वर्तमान लागू अधिकतम कीमत BMS के लिए ₹10,692.69 और DES के लिए ₹38,933.14 है। DPCO, 2013 के अंतर्गत निर्धारित कीमतें पूरे देश में लागू होती हैं। स्टेंट के सभी निर्माता, विपणक और आयातकों को अपने उत्पाद इन अधिकतम कीमतों (साथ में लागू वस्तु एवं सेवा कर) के भीतर बेचने होते हैं। इसके अतिरिक्त, एनपीपीए ने दिनांक 12.02.2018 की अधिसूचना जारी की, जिसके अनुसार ऐसे संस्थान जैसे अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक जो कोरोनरी स्टेंट का उपयोग कर एंजियोप्लास्टी प्रक्रियाएं करते हैं और रोगियों से सीधे बिल वसूलते हैं, उन्हें अधिसूचना में निर्धारित अधिकतम कीमतों का पालन करना होगा। साथ ही, उक्त अधिसूचना यह भी अपेक्षा करती है कि ऐसे संस्थान अपने अनुमान/प्रोफॉर्मा चालान/अंतिम बिल आदि में कोरोनरी स्टेंट की लागत, उसकी श्रेणी जैसे बेयर-मेटल स्टेंट (BMS) या ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट (DES), ब्रांड नाम, निर्माता/आयातक का नाम/बैच नंबर/विशिष्टताएँ तथा अन्य विवरण स्पष्ट और पृथक रूप से उल्लेख करें।

इसके अतिरिक्त, संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ‘स्वास्थ्य’ राज्य का विषय है। निजी अस्पतालों द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूले जाने के मामलों का संज्ञान लेना तथा ऐसी प्रथाओं को रोकने और नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करना संबंधित राज्य सरकार/केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन की जिम्मेदारी है। तथापि, भारत सरकार ने ‘क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010’ (CE Act) अधिनियमित किया तथा इसके अंतर्गत ‘क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (केंद्रीय सरकार) नियम, 2012’ अधिसूचित किए, ताकि मान्यता प्राप्त चिकित्सा प्रणालियों — अर्थात एलोपैथी, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी, सिद्ध और यूनानी या केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी अन्य चिकित्सा पद्धति (सशस्त्र बलों से संबंधित संस्थानों को छोड़कर) — से संबंधित सरकारी तथा निजी नैदानिक संस्थानों का पंजीकरण और विनियमन सुनिश्चित किया जा सके। जिन राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन ने CE Act को अपनाया है, वे CE Act तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार अपने अस्पतालों, जिनमें निजी अस्पताल भी शामिल हैं, का विनियमन करने के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं, ताकि रोगियों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। CE Act के अनुसार सभी नैदानिक संस्थानों (सरकारी एवं निजी) को सुविधाओं और सेवाओं के न्यूनतम मानकों की शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है तथा अन्य बातों के साथ-साथ उनसे वसूले जाने वाले शुल्क की दरों को प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना भी आवश्यक है। CE Act जिला स्तर पर जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में एक पंजीकरण प्राधिकरण को इसके प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में दंड लगाने सहित कार्रवाई करने का अधिकार प्रदान करता है।

यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।

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पीके/केसी/वीएस


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