विधि एवं न्‍याय मंत्रालय
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डिजिटलीकरण के माध्यम से न्याय प्रदान करने की प्रणाली

प्रविष्टि तिथि: 13 FEB 2026 6:33PM by PIB Delhi

सरकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मामलों के शीघ्र निस्तारण और लंबित मामलों को कम करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। न्यायपालिका द्वारा मामलों के त्वरित निपटान हेतु अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए सरकार ने कई पहल की हैं, जिसमें, अन्य बातों के साथ-साथ, न्यायालयों के लिए बेहतर अवसंरचना शामिल है, जिसमें कंप्यूटरीकरण, अधीनस्थ न्यायपालिका की संख्या बढ़ाना, अत्यधिक वाद-विवाद वाले क्षेत्रों में नीतिगत एवं विधायी उपाय, मामलों के शीघ्र निपटान के लिए न्यायालयी प्रक्रियाओं का पुनर्गठन तथा मानव संसाधन विकास पर विशेष बल शामिल है। 31 दिसंबर 2025 तक बलात्कार तथा बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम, 2012(पॉक्सो अधिनियम) के अंतर्गत अपराधों से संबंधित मामलों के समयबद्ध परीक्षण एवं निस्तारण हेतु 398 विशेष ई-पॉक्सो न्यायालयों सहित कुल 774-फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय(एफटीएससी) स्थापित किए जा चुके हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 39A के अनुसार तथा निवारक एवं रणनीतिक विधिक सहायता के अंतर्गत, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण(एनएएलएसए) ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (डीएलएसए) के माध्यम से देश में अनेक विधिक सेवा गतिविधियां संचालित की हैं, ताकि कानूनी सहायता समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक पहुंच सके।

न्याय वितरण प्रणाली को डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से आधुनिक बनाने के लिए, भारत सरकार ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय की ई-समिति के सहयोग से ‘ई-न्यायालय मिशन मोड परियोजना’ प्रारंभ की है। 31 दिसंबर, 2025 तक ई-न्यायालय परियोजना के अंतर्गत अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं:

  1. उच्च न्यायालयों एवं जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कुल 3,93,22,695 मामलों की सुनवाई (वर्चुअल हियरिंग) की गई।
  2. सभी उच्च न्यायालयों तथा जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों को लागू किया जा चुका है।
  3. लगभग सभी उच्च न्यायालयों में ई-फाइलिंग के नियम, ई-भुगतान की सुविधा तथा आईसीजेएस लागू कर दिए गए हैं।
  4. देशभर में संचालित 29 वर्चुअल न्यायालयों के माध्यम से कुल 94,55,288 चालान का भुगतान किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप 9,73,25,50,414 रुपये की राशि चालान मद में प्राप्त हुई है।
  5. उच्च न्यायालयों एवं जिला न्यायालयों में ई-फाइलिंग के माध्यम से कुल 1,03,96,720 मामले प्रस्तुत किए गए हैं।
  6. ई-न्यायालय सेवा मोबाइल ऐप के कुल डाउनलोड की संख्या 3,54,86,435 है, जबकि ई-न्यायालय सेवा JustIS ऐप के डाउनलोड की संख्या 22,090 है।
  7. उच्च न्यायालयों में 2,36,96,50,903 पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया गया है, जबकि जिला न्यायालयों में 4,00,89,15,374 पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया गया है।
  8. 37 उच्च न्यायालयों तथा 30 जिला न्यायालयों में न्याय घड़ियां स्थापित की गई हैं।
  9. देशभर के उच्च न्यायालयों एवं जिला न्यायालयों में कुल 2,331 ई-सेवा केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनसे बड़ी संख्या में वादियों को लाभ मिल रहा है।
  10. सभी न्यायालय परिसरों में सीआईएस 4.0 लागू कर दिया गया है तथा ई-समिति द्वारा सीआईएश 4.0 पर एक उपयोगकर्ता मार्गदर्शिका भी जारी की गई है।
  11. ई-न्यायालय पहल के अंतर्गत मामलों की स्थिति, कारण सूची, निर्णय आदि की लगभग वास्तविक समय(रियल-टाइम) में जानकारी उपलब्ध कराने हेतु सात प्लेटफ़ॉर्म स्थापित किए गए हैं।ये सूचनाएं अधिवक्ताओं एवं वादकारियों को एसएमएस पुश एवं पुल सेवा (प्रतिदिन 4 लाख से अधिक एसएमएस प्रेषित), ई-मेल (प्रतिदिन 6 लाख से अधिक प्रेषित), बहुभाषी ई-न्यायालय सेवा पोर्टल (प्रतिदिन 35 लाख हिट्स), न्यायिक सेवा केंद्र (JSCs) तथा सूचना कियोस्क के माध्यम से भेजी जा रही हैं।
  12. न्यायालयी कार्यवाही का लाइव स्ट्रीमिंग कई उच्च न्यायालयों में प्रारंभ किया गया है, जिनमें गुजरात, गुवाहाटी, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, पटना, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड तथा कलकत्ता के उच्च न्यायालय शामिल हैं। इससे मीडिया एवं अन्य इच्छुक पक्षों को कार्यवाही में सहभागी होने की सुविधा प्राप्त हुई है।
  13. न्यायालय परिसरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के निर्धारित लक्ष्य का कुल 96.1% प्राप्त कर लिया गया है।
  14. मोटर दुर्घटना दावा याचिकाओं के त्वरित, ऑनलाइन तथा असमकालिक निस्तारण को सुगम बनाने हेतु इलेक्ट्रॉनिक मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (e-MACT) प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया गया है। e-MACT परियोजना का परीक्षण 07 मई 2025 से पायलट न्यायालय में लाइव परिवेश में प्रारंभ किया गया है।
  15. राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड(एनजेडीजी) को एक उन्नत डैशबोर्ड के साथ अच्छा किया गया है, जो मामलों की लंबित संख्या की पहचान, प्रबंधन एवं कमी हेतु एक निगरानी उपकरण के रूप में कार्य करता है। यह विभिन्न मानकों के आधार पर वर्गीकृत मामलों के निस्तारण में विलंब के कारणों संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराता है।

यह जानकारी आज लोक सभा में कानून एवं न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल ने दी।

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पीके/केसी/पीकेपी/डीके


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