स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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एनसीडीसी के अंतर्गत रोग निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदम


एनसीडीसी ने वायरल हेपेटाइटिस, रेबीज और लेप्टोस्पाइरोसिस निगरानी के लिए प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाए

राष्ट्रीय वन हेल्थ पहल का लक्ष्य जूनोटिक रोगों से निपटना है

एनसीडीसी के अंतर्गत पीएम-एबीएचआईएम ने नए बीएसएल-3 प्रयोगशालाओं और इसकी राज्य शाखाओं के साथ संक्रामक रोग निगरानी को तेज किया

एनसीडीसी का राष्ट्रव्यापी विस्तार: क्षेत्रीय शाखाएं, मेट्रो इकाइयां और मुख्यालय का उन्नयन

एनसीडीसी भारत की रोग निगरानी को मजबूत करता है: आईडीएसपी राष्ट्रव्यापी, आईएचआईपी संक्रमण, निगरानी इकाइयां, डीपीएचएल, एमएसयू, वायरल हेपेटाइटिस सीओई और मजबूत राज्य/क्षेत्रीय शाखाएं

केंद्रीय योजनाएं देश की प्रकोप प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करती हैं



प्रविष्टि तिथि: 06 FEB 2026 5:31PM by PIB Delhi

केंद्रीय क्षेत्र की व्यापक योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) वायरल हेपेटाइटिस की निगरानी के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (2012), राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (2017), लेप्टोस्पाइरोसिस की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कार्यक्रम (2013), जूनोसिस की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय वन हेल्थ कार्यक्रम (2013) चलाता है। इसके लिए यह एनसीडीसी शाखाओं की स्थापना और सुदृढ़ीकरण (2015) को लागू करता है और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम) योजना के केंद्रीय क्षेत्र घटक के अंतर्गत संक्रामक रोगों की निगरानी और प्रकोप प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए राज्य शाखाओं, जैव सुरक्षा स्तर-3 प्रयोगशाला (बीएसएल-3), एनसीडीसी क्षेत्रीय शाखाओं, महानगरीय निगरानी इकाइयों की स्थापना, एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) को सुदृढ़ करने और एनसीडीसी मुख्यालयों को सुदृढ़ और उन्नत करने के लिए कार्यक्रम लागू करता है।

इसके अतिरिक्त, एनसीडीसी कई अन्य कार्यक्रम भी चलाता है, जिनमें एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी), सांप के काटने से होने वाले विष के निवारण एवं नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम, और जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) शामिल हैं। ये सभी कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत आते हैं। एनसीडीसी के कार्यक्रमों/योजनाओं का विवरण निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है: https://ncdc.mohfw.gov.in/

सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पीआईपी) में प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को धनराशि जारी करती है। (राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार पीआईपी का विवरण इस लिंक पर देखा जा सकता है: https://nhm.gov.in/index1.php?lang=1&level=1&sublinkid=1377&lid=744 )

एनसीडीसी देश में रोग निगरानी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कई उपाय करता है, जिनमें सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) का कार्यान्वयन; कागज रहित, केस-आधारित तथा लगभग वास्तविक समय की निगरानी के लिए 2021 में एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) में संक्रमण; केंद्रीय, राज्य और जिला निगरानी इकाइयों की स्थापना; जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं (डीपीएचएल) को मजबूत करना; महानगरीय निगरानी इकाइयों (एमएसयू) की स्थापना; एनसीडीसी में वायरल हेपेटाइटिस प्रयोगशाला को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नामित करना और एनसीडीसी की राज्य तथा क्षेत्रीय शाखाओं की स्थापना और उन्हें मजबूत करना शामिल है।

महानगर निगरानी इकाइयों (एमएसयू) की स्थापना के लिए स्थानों की पहचान हेतु अपनाए गए मानदंडों में जनसंख्या का आकार और घनत्व, उच्च रोग भार और प्रकोप की संवेदनशीलता, शहरीकरण स्तर (टियर-I और टियर-II शहर), मौजूदा रोग निगरानी अवसंरचना में कमियां, सहायक सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की उपलब्धता शामिल हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में लिखित उत्‍तर में यह बात कही।

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पीके/केसी/एके/जीआरएस


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