श्रम और रोजगार मंत्रालय
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राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम एवं रोजगार एवं उद्योग सचिवों का दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन आज से भुवनेश्वर में आरंभ

प्रविष्टि तिथि: 17 FEB 2026 3:25PM by PIB Delhi

ओडिशा के श्रम एवं कर्मचारी राज्य बीमा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने आज भुवनेश्वर में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम एवं रोजगार एवं उद्योग सचिवों के दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव सुश्री वंदना गुरनानी, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, ओडिशा , बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह राज्य सरकारों के अधिकारी, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), केंद्रीय श्रम आयुक्त और वी.वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान (वीवीजीएनएलआई) के अधिकारी मौजूद रहे।

यह सम्मेलन चार श्रम संहिताओं के सुचारू कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने और ईएसआईसी, ईपीएफओ और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के उद्देश्य से देश भर में विभिन्न स्थानों पर मंत्रालय द्वारा आयोजित पांच क्षेत्रीय सम्मेलनों की श्रृंखला का चौथा आयोजन है, जिसमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और प्रमुख हितधारक शामिल हो रहे हैं।

श्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि श्रम संहिता लागू होने के साथ ही देश एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। उन्होंने श्रम सुधारों को लागू करने और श्रम प्रशासन सुदृढ़ करने के दूरदर्शी ढांचा प्रदान करने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने समय पर इसके कार्यान्वयन की दिशा में ओडिशा द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख किया, जिसमें मसौदा नियमों का प्रकाशन शामिल है।

श्री खुंटिया ने कहा कि ओडिशा सरकार निर्माण, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और प्रवासी श्रमिकों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रही है, जिन्हें संसद की स्थायी समिति ने भी सराहा है। रोजगार पाने के इच्छुक लोगों के लिए समान अवसर और सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के व्यापक उद्देश्य पर बल देते हुए, उन्होंने श्रम संहिता के प्रभावी कार्यान्वयन के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दो दिवसीय सम्मेलन में विचार मंथन से श्रमिक कल्याण को और सुदृढ़ बनाने पर सार्थक चर्चा और अनुभव साझा होंगे।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव सुश्री वंदना गुरनानी ने सम्मेलन का संदर्भ स्पष्ट करते हुए श्रम संहिता को भारत के श्रम ढांचे को बदलते राष्ट्रीय और वैश्विक आर्थिक परिदृश्यों के अनुरूप ढ़ालने वाला ऐतिहासिक सुधार बताया। उन्होंने कहा कि कई केंद्रीय श्रम कानूनों को चार संहिताओं में समेकित करने से नियामक ढ़ांचा सुव्यवस्थित होता है, श्रमिकों का कल्याण बढ़ता है, व्यापार सुगमता होती है और रोजगार सृजन एवं आर्थिक विकास को समर्थन मिलता है।

उन्होंने कहा कि ये संहिताएं जटिलताओं में कमी लाती हैं और श्रमिकों की सुरक्षा मज़बूत करती हैं। इनमें सेवा शर्तों को स्पष्ट रूप से बताने वाले अनिवार्य नियुक्ति पत्र, भेदभाव और शोषण पर रोक, निर्धारित रोज़गार से परे न्यूनतम मज़दूरी का सार्वभौमीकरण, सामाजिक सुरक्षा का सार्वभौमीकरण और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित वैधानिक न्यूनतम मज़दूरी के प्रावधान शामिल हैं, जिससे कम न्यूनतम मज़दूरी निर्धारित नहीं की जा सकती। उन्होंने अनुपालन संबंधी बोझ कम करने के उपायों का भी उल्लेख किया, जिनमें अपराधों के निपटारे के प्रावधान भी शामिल हैं।

उन्होंने प्रभावी, नागरिक-केंद्रित और व्यवसाय-केंद्रित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एकल पंजीकरण, एकल लाइसेंस और एकल रिटर्न जैसी सूचना प्रौद्योगिकी-आधारित प्रणालियों के महत्व पर भी जोर दिया, जिसमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय प्रणालियों के साथ एकीकृत करने की सुविधा है। उन्होंने कहा कि वी.वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान श्रम संहिता के अंतर्गत क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। उन्होंने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को राज्य स्तर पर ज्ञान के प्रसार और प्रशिक्षण सुगम बनाने के लिए प्रतिनिधियों को मास्टर प्रशिक्षक के रूप में नामित करने को प्रोत्साहित किया।

सुश्री गुरनानी ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से नियमों को अंतिम रूप देने में तेजी लाने, मंत्रालय के नियमों और संहिताओं पर जारी अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों और पुस्तिका का प्रभावी उपयोग करने, दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियमों के प्रावधानों के साथ दोहराव या अतिक्रम से बचने, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना डैशबोर्ड का सक्रियता से उपयोग करने और राज्य स्वास्थ्य सुविधाओं एवं प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के साथ तालमेल स्थापित कर ईएसआईसी दायरा और चिकित्सा अवसंरचना विस्तारित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने राज्यों से आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करने को कहा जिसके तहत ठेकेदारों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों सहित राज्य प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिक और कर्मचारी को न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन भुगतान और सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान किए जाएं।

उद्घाटन सत्र के बाद मंत्रालय और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत प्रस्तुतियां दीं, जिनमें नए श्रम संहिताओं के अंतर्गत नियमों को अंतिम रूप देने में हुई प्रगति और सूचना प्रौद्योगिकी तैयारियों की स्थिति का विवरण प्रस्तुत किया गया। नियमों के मसौदा तैयार करने और अधिसूचना से संबंधित प्रमुख पहलुओं, संहिताओं के प्रावधानों के अनुरूप केंद्रीय और राज्य स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी प्रणालियों को सुदृढ़ और उन्नत बनाने और राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों को केंद्रीय डिजिटल ढांचे के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई।

मंत्रालय और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति वाला यह सम्मेलन नियमों और विनियमों पर विचार-विमर्श करने, कमियों और मतभेदों की पहचान करने, वैधानिक अधिसूचनाओं को शीघ्रता से जारी करने और संहिताओं के अंतर्गत परिकल्पित बोर्डों, निधियों और अन्य संस्थागत तंत्रों की स्थापना पर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच है। इसके अतिरिक्त सम्मेलन में जमीनी स्तर के अधिकारियों की क्षमता निर्माण और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा अन्य हितपक्षों के बीच श्रम संहिताओं के उद्देश्यों, संरचना और कार्यान्वयन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

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पीके/केसी/एकेवी/एसके


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