स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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भारत और फ्रांस ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में इंडो–फ्रेंच स्वास्थ्य के लिए ए आई केंद्र (आई एफ – सी ए आई एच) की शुरुआत की


यह केंद्र एक अग्रणी पहल है, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा तथा नैदानिक नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करना है

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा - भारत और फ्रांस उन्नत कम्प्यूटिंग क्षमता तथा प्रतिभा विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि हम अपने विश्वसनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता तंत्र स्वयं विकसित कर सकें। हम केवल उन तकनीकों पर निर्भर नहीं रह सकते जो अन्य देशों द्वारा निर्मित व संचालित हों

प्रविष्टि तिथि: 18 FEB 2026 6:13PM by PIB Delhi

स्वास्थ्य सेवा एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारतफ्रांस सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, भारत सरकार श्री जेपी नड्डा तथा फ्रांस गणराज्य के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में इंडोफ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ (आई एफ - सी ए आई एच) का उद्घाटन किया।

इंडोफ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ (IF-CAIH) एक अग्रणी पहल है, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा तथा नैदानिक नवाचार को प्रोत्साहित कर जटिल स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान करना है। यह पहल डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारतफ्रांस सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक है तथा समतामूलक और प्रौद्योगिकी-सक्षम स्वास्थ्य समाधान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की भारत की परिकल्पना को सुदृढ़ करती है।

इस केंद्र का शुभारंभ 18–19 फरवरी, 2026 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक बैठकों (आर यू एस एच) के साथ होना एक अच्छा संयोग रहा है। दो दिवसीय बैठकों का समन्वयन नई दिल्ली स्थित फ्रांसीसी दूतावास द्वारा किया गया। इंडोफ्रेंच फोरम: मस्तिष्क स्वास्थ्य और वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ताशीर्षक से आयोजित विशेष सत्र में दोनों देशों के प्रमुख वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, नीति-निर्माताओं और शिक्षा जगत के नेताओं ने सहभागिता की।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली और सॉरबोन विश्वविद्यालय तथा पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट के बीच हस्ताक्षरित संयुक्त समझौता ज्ञापन के अंतर्गत इंडोफ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ (IF-CAIH) की स्थापना की गई है। इस पहल को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली तथा फ्रांस के प्रमुख संस्थानों का भी शैक्षणिक सहयोग प्राप्त है। यह सहयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मस्तिष्क स्वास्थ्य और वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों के क्षेत्र में अंतःविषयक अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यह पहल डिजिटल स्वास्थ्य, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर), स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े मानव संसाधन तथा स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों के उत्तरदायी उपयोग जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में भारत और फ्रांस के बीच जारी संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाती है। दोनों देशों के अनुसंधान संस्थानों और डिजिटल स्वास्थ्य संगठनों के बीच सहयोगात्मक प्रयासों का उद्देश्य वैज्ञानिक खोज को प्रोत्साहित करना, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सुदृढ़ करना तथा क्षमता निर्माण और शैक्षणिक आदान-प्रदान साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

आर यू एस एच 2026 के दौरान इंडो-फ्रेंच फोरम का उद्देश्य वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए एकीकृत दृष्टिकोण को बढ़ावा देना और इंडो-पैसिफिक रीजन में स्टूडेंट्स, फैकल्टी और रिसर्चर्स की क्रॉस-मोबिलिटी के ज़रिए शोध पारिस्थितिकी को बेहतर बनाना है।

आर यू एस एच 2026 कार्यक्रम के हिस्से के तौर पर, आर यू एस एच कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर विचार विमर्शशीर्षक से 30 मिनट की बातचीत श्री इमैनुएल मैक्रों और दो युवा भारतीय इनोवेटर्स, सुश्री प्रियंका दास राजकाकती और श्री मनन सूरी के बीच हुई। ए आई और डिजिटल के लिए इस बातचीत का संचालन फ्रांसीसी दूत सुश्री क्लारा चप्पाज़ ने किया। इस बातचीत में युवाओं के नेतृत्व वाले नवाचार, सीमाओं के पार सहयोग और समावेशी एवं टिकाऊ वैश्विक भविष्य को आकार देने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बदलाव लाने की क्षमता के महत्व पर ज़ोर दिया गया।

जवाहरलाल सभागार में फ्रांस और भारत के बीच प्रमुख वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक सहयोग की विशेषताओंपर एक खास सेगमेंट भी था, जिसे आर यू एस एच के अध्यक्ष प्रो. विजय राघवन और डॉ. थिएरी कूलहोन ने संचालित किया। इस सत्र में दोनों देशों के बीच उच्चतर शिक्षा, शोध और नवाचार में सहयोग के विशेष पड़ावों और उभरती संभावनाओं को दिखाया गया गया, जो भारत-फ्रांस नॉलेज पार्टनरशिप की गहराई और तेज़ी को दिखाता है।

राष्ट्रपति ने अपने सम्बोधन में भारत और फ्रांस के लिए सॉवरेन ए आई कैपेसिटी और टैलेंट बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह पक्का हो सके कि ए आई का विकास कुछ वैश्विक ताकतों पर निर्भर रहे बिना इंसानियत की सेवा करे। उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने और वैज्ञानिक खोज में तेज़ी लाने के लिए, विशेषकर स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में, अलग-अलग क्षेत्रों में एथिकल ए आई अपनाने की बदलाव लाने वाली क्षमता पर ज़ोर दिया। ज़िम्मेदार शासन पर बल देते हुए, उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के लिए सेफ़गार्ड, बायस और लोकतान्त्रिक जोखिम को दूर करने के लिए एल्गोरिदम में ज़्यादा पारदर्शिता और ए आई सिस्टम में लिंग्विस्टिक डाइवर्सिटी को बनाए रखने की बात कही यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ भारत और फ्रांस का दृष्टिकोण एक जैसा है।

राष्ट्रपति ने कहा, भारत और फ्रांस अपने भरोसेमंद ए आई सिस्टम बनाने के लिए ज़रूरी कंप्यूटिंग क्षमता और कौशल को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि हम सिर्फ़ कहीं और बनाई और मैनेज की गई प्रौद्योगिकी पर भरोसा नहीं कर सकते।उन्होंने आगे कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बच्चों के लिए मज़बूत सुरक्षा, भेदभाव रहित बनाने हेतु पारदर्शिता, और भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने के लिए एक मज़बूत कमिटमेंट के साथ मानवता की सेवा करनी चाहिए।

सम्बोधन के उपरांत माननीय राष्ट्रपति श्री इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अंतर्राष्ट्रीय केंद्र का उद्घाटन किया। उद्घाटन के लिए जाते समय उन्होंने छात्रों से बातचीत की और युवा अनुसंधान कर्ताओं से स्वास्थ्य देखभाल में नवाचार वाले समाधान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, श्री जे. पी. नड्डा पूरे कार्यक्रम के दौरान उपस्थित रहे और आई एफ सी ए आई एच उद्घाटन समारोह में शामिल हुए, और ए आई -इनेबल्ड ग्लोबल हेल्थ में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहरायी।

भारत सरकार, फ्रांस के साथ स्वास्थ्य देखभाल सहयोग को गहरा करने, नवाचार, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और सामूहिक विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके एक मज़बूत स्वास्थ्य प्रणाली बनाने और भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य परिणाम देने का अपना वादा दोहराती है।

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पीके/केसी/डीटी/डीके


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