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एआई के व्‍यापक विस्‍तार के लिए उसका विश्वसनीय डेटा, नैतिक शासन और सार्वजनिक जवाबदेही पर आधारित होना आवश्‍यक  :  देवेन्‍द्र फडणवीस, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री


खाद्य सुरक्षा और जलवायु लचीलेपन को मजबूती प्रदान करने के लिए नीतिनिर्माताओं का एआई-आधारित समाधानों का आह्वान

भारत में खेत-स्तर पर एआई का उपयोग वैश्विक स्तर पर मूल्यवान सीख उत्पन्न कर सकता है

कृषि में एआई की सफलता के लिए समावेशी डिज़ाइन और लैंगिक समानता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं

प्रविष्टि तिथि: 20 FEB 2026 2:04PM by PIB Delhi

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के तहत आयोजित सत्र “एआई मीट्स एग्रीकल्चर: बिल्डिंग फूड सिक्योरिटी एंड क्लाइमेट रेजिलिएंस” में नीति-निर्माताओं, विकास संस्थानों, शोधकर्ताओं और डिजिटल नवोन्‍मेषकों ने भाग लिया। सत्र में इस बात पर चर्चा की गई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  किस प्रकार कृषि प्रणालियों को रूपांतरित कर सकती है, खाद्य सुरक्षा को मजबूत बना सकती है और जलवायु लचीलेपन को व्यापक स्तर पर संवर्धित कर सकती है।

इस सत्र में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्‍द्र फडणवीस के मुख्य भाषण के बाद भारत सरकार और विश्व बैंक समूह शोध संस्थानों और नवाचार इकोसिस्‍टम के प्रतिनिधियों के साथ उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की गई।

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्‍द्र फडणवीस ने मुख्य भाषण देते हुए इस बात को रेखांकित किया कि आज कृषि जलवायु अस्थिरता, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के संगम पर खड़ी है। उन्होंने कहा, “विश्वभर में खाद्य प्रणालियाँ दबाव में हैं, जलवायु अस्थिरता तेज़ हो रही है, भूजल स्तर गिर रहा है, मिट्टी का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, आपूर्ति श्रृंखलाएँ कमजोर हैं और वैश्विक बाज़ार अनिश्चित हैं। ग्लोबल साउथ के देशों के लिए कृषि मात्र आर्थिक क्षेत्र भर नहीं है, बल्कि आजीविका, सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार भी है। भारत इसे गहराई से समझता है और उसने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा जिम्मेदार एआई को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में रखा है।”

मुख्यमंत्री देवेन्‍द्र फडणवीस ने कहा कि भारत का एआई मिशन तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता, समावेशन और व्यापक स्तर पर प्रभाव सुनिश्चित करने से संबंधित है। कृषि को इस एआई मिशन के केंद्र में होना चाहिए, क्योंकि आज कम से कम 50 करोड़ भारतीय सीधे या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के लिए कृषि चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन एआई इस स्थिति को बदल सकती है। यह अत्यंत स्थानीय स्तर पर मौसम पूर्वानुमान, कीट प्रकोप की प्रारंभिक चेतावनी, सटीक सिंचाई और उर्वरक संबंधी मार्गदर्शन, पारदर्शी आपूर्ति श्रृंखला और वास्तविक समय में बाजार परामर्श प्रदान कर सकती है। उन्होंने कहा, “एआई कोई जादू नहीं है; इसे विश्वसनीय डेटा, नैतिक शासन और सार्वजनिक जवाबदेही पर आधारित होना चाहिए, अन्यथा इसका व्यापक विस्तार संभव नहीं होगा।”

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण सचिव देवेश चतुर्वेदी  ने कृषि के लिए परस्पर-संचालनीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित करने हेतु केंद्र सरकार के प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की। एआई-आधारित एकीकृत प्लेटफॉर्म के पीछे की सोच को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, “पूरी अवधारणा यह थी कि जब हमारे पास यह एआई-आधारित प्रणाली होगी, तो हमारे पास विभिन्न अनुप्रयोगों और विभिन्न परामर्श सेवाओं के लिए एक ही मंच होगा, जिसे एक बटन के क्लिक से या संभवतः केवल आवाज़ के माध्यम से उपयोग किया जा सकेगा।” किसान आईडी और एकीकृत डाटासेट्स से संचालित अनुकूलित परामर्श पर जोर देते हुए सचिव ने कहा, “सामान्यीकृत डेटा संभवतः किसानों के लिए उपयोगी न हो, उसे प्रदान करने के बजाय, प्रत्येक किसान के लिए विशिष्ट और अनुकूलित जानकारी उपलब्ध होगी, जो महा विस्तार जैसे प्लेटफॉर्म के साथ इस डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के एकीकरण के आधार पर प्रदान की जाएगी।”

विश्व बैंक समूह, दक्षिण एशिया क्षेत्र के वाइस प्रेसिडेंट जोहान्स ज़ुट ने वैश्विक विकास के परिप्रेक्ष्य से विचार रखते हुए कृषि में एआई को विश्वभर के छोटे किसानों के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण बताया। उन्होंने कहा, “हम कृषि में किसानों को समर्थन देने के तरीके में एक बड़े परिवर्तन के मुहाने पर खड़े हैं।” सरकारों की बुनियादी भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि सरकार की जिम्मेदारियाँ मुख्यतः एआई के शासन, परस्पर-संचालनीयता तथा शिक्षा प्रणालियों में डिजिटल सेवाओं के उपयोग के लिए उपयुक्त कौशल प्रशिक्षण शामिल किया जाना सुनिश्चित करने जैसी आधारभूत संरचनाओं पर केंद्रित होती हैं ।भारत की नेतृत्व क्षमता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “यदि भारत में एआई को खेत-स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके, तो यह स्वाभाविक रूप से विश्व के अन्य देशों के लिए भी व्यापक स्तर पर सीख होगी।”

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एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की अध्यक्ष सौम्या स्वामीनाथन ने कृषि में एआई की सफलता के लिए समावेशी डिज़ाइन और लैंगिक समानता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “कोई भी तकनीक अपने आप गरीब, अमीर या महिलाओं के पक्ष में नहीं होती; यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उस तकनीक का उपयोग कैसे करते हैं।” किसी को पीछे न छोड़ देने के लिए चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि एल्गोरिदम का अच्छा होना उन्‍हें मिलने वाले डेटा पर निर्भर करता है। उन्होंने महिला किसानों और हाशिए पर पड़े समूहों का पीछे न छूटना सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

सीखने में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने वाले एकस्टेप फाउंडेशन के सह-संस्थापक और सीईओ शंकर मरुवाड़ा ने ओपन डिजिटल इकोसिस्‍टम और सहयोगात्मक नवाचार के महत्व पर बल दिया। अतीत की कृषि क्रांतियों से समानताएँ व्‍यक्‍त करते हुए उन्होंने कहा, “असंभव प्रतीत होने वाला कार्य करना (यानी पुलिंग ब्रेड आउट ऑफ एयर) ’ का विचार, अब डेटा से इंटेलिजेंस ग्रहण करने और इसे किसानों तक पहुँचाने से संबंधित है।” परस्पर-संचालनीयता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जो काम डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के लिए किया, उसे अब एआई—ओपन, इंटरऑपरेबल सिस्टम में लागू करना होगा, जो अलग-थलग प्लेटफ़ॉर्म की तरह नहीं, बल्कि नेटवर्क की तरह काम करें।  

पैनल चर्चा में महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास चंद्र रस्तोगी ने भी भाग लिया। उन्होंने विश्वसनीय डेटासेट, बहुभाषी पहुँच, मजबूत शासन ढाँचे और विकास साझेदारियों के महत्व पर ज़ोर दिया, ताकि एआई उपकरण विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में छोटे किसानों के लिए व्यावहारिक और भरोसेमंद साबित हों।

कुल मिलाकर इस सत्र ने एक साझा आवश्यकता को रेखांकित किया: कृषि में एआई को केवल प्रदर्शन या पायलट परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे समावेशी सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जो किसानों को अत्यंत स्थानीय सलाह, पूर्वानुमानित जलवायु जानकारी और बेहतर बाज़ार एवं सप्‍लाई चेन इंटेलिजेंस प्रदान करे। वक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा, जलवायु लचीलापन और एआई शासन आपस में जुड़े हुए हैं, और जिम्मेदार, जनसंख्या-स्तरीय एआई उपयोग  भारत में प्रौद्योगिकी-प्रेरित कृषि परिवर्तन के भविष्य को निर्धारित करेगा।

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पीके/केसी /आरके/एसके


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