जल शक्ति मंत्रालय
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जल शक्ति केंद्रीय मंत्री श्री सी.आर. पाटिल और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साई ने छत्तीसगढ़ के जिला कलेक्टरों के साथ जेएसजेबी 2.0 की समीक्षा की


छत्तीसगढ़ ने जेएसजेबी 2.0 के तहत 88,000 से अधिक परियोजनाएं पूरी कीं, भूजल पुनर्भरण प्रयासों को सुदृढ़ किया

प्रविष्टि तिथि: 20 FEB 2026 4:49PM by PIB Delhi

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साई ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों के साथ जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) 2.0 पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय जल मिशन, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित की गई थी।

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग के सचिव श्री वी.एल. कंथा राव, अपर सचिव और राष्ट्रीय जल मिशन की मिशन निदेशक श्रीमती अर्चना वर्मा, छत्तीसगढ़ सरकार के सचिव श्री राजेश टोप्पो और केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। इस बैठक में दुर्ग, बिलासपुर और सूरजपुर जिलों के जिला कलेक्टरों ने जेएसजेबी 2.0 के तहत जिला स्तरीय प्रगति, नवोन्मेषी पद्धतियों और समुदाय-आधारित जल संरक्षण पहलों पर प्रकाश डालते हुए प्रस्तुतियां दीं। इन जिलों ने व्‍यापक स्‍तर पर संग्रहण, योजनाओं के समन्वय और निम्‍न लागत वाली, वैज्ञानिक रूप से डिज़ाइन की गई भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के लक्षित कार्यान्वयन का प्रदर्शन किया।

छत्तीसगढ़ ने जेएसजेबी 1.0 के दौरान अल्पावधि में चार लाख से अधिक जल पुनर्भरण संरचनाएं बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया था। राज्य के कई जिलों को उनके अनुकरणीय प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया और राज्य सामुदायिक जल संरक्षण में अग्रणी बनकर उभरा। जेएसजेबी 2.0 के तहत, राज्य ने 88,000 से अधिक पूर्ण परियोजनाओं और 42,000 से अधिक निर्माणाधीन परियोजनाओं की रिपोर्ट की है, जो जिलों में निरंतर प्रगति को दर्शाती है।

बैठक में छत्तीसगढ़ से उभरे सफल मॉडलों पर भी पुनर्विचार किया गया, जिनमें रायपुर नगर निगम के सहयोग से विकसित क्रेडाई-रायपुर का कम लागत वाला भूजल पुनर्भरण मॉडल और कोरिया जिले का "5 प्रतिशत मॉडल" शामिल है। इसके तहत किसानों ने अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा वर्षा जल पुनर्भरण के लिए समर्पित किया था। इन मॉडलों ने प्रदर्शित किया कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल, निम्‍न लागत वाले उपाय, जब मजबूत सामुदायिक भागीदारी द्वारा समर्थित हों, तो भूजल पुनर्भरण के सार्थक परिणाम दे सकते हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साई ने जेएसजेबी 2.0 के तहत सभी जिलों में जल संरक्षण प्रयासों में तेजी लाने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक बार फिर मिसाल कायम करने और जिला स्तरीय प्रदर्शन को अन्य राज्यों के लिए एक मानदंड बनाने का प्रयास करेगा।

श्री सी.आर. पाटिल ने जिला संग्राहकों को संबोधित करते हुए मानसून के आगमन से पहले पर्याप्त वर्षाजल पुनर्भरण क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में जल संचय जन भागीदारी एक जन आंदोलन में रूपांतरित हो गई है, जिससे जल संरक्षण एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन बन गया है।

श्री पाटिल ने रेखांकित किया कि एमजीएनआरईजीए के तहत जल संरक्षण के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की गई है और जिलों से आग्रह किया कि वे 31 मार्च 2026 से पहले उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने गंभीर और अर्ध-गंभीर जिलों में केंद्रित कार्रवाई, नियमित निगरानी, ​​जेएसजेबी पोर्टल पर समय पर डेटा अपलोड करने और समुदाय के साथ मजबूत समन्वय तथा सीएसआर भागीदारी की अपील की।

श्री सी.आर. पाटिल ने राज्य की उपलब्धियों पर बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ जेएसजेबी 2.0 के तहत अपने प्रयासों में और तेजी लाएगा और समुदाय-नेतृत्व वाले भूजल पुनर्भरण और सतत जल प्रबंधन में नए मानदंड स्थापित करना जारी रखेगा।

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पीके/केसी/एसकेजे/ओपी


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