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azadi ka amrit mahotsav AI Impact Summit 2026

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में समावेशी और लचीली खाद्य प्रणालियों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया


डेटा, डिजिटल अवसंरचना और वैश्विक सहयोग को जलवायु अनुकूल कृषि की कुंजी के तौर पर देखा गया

विशेषज्ञों ने खाद्य पहुँच और वितरण में अंतर को पाटने के लिए पारदर्शी और अंतर-संचालित एआई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया

पायलट परियोजनाओं से लेकर बड़े पैमाने पर समाधान तक: उद्योग और सरकारों से वाणिज्यीकरण को आगे बढ़ाने का अनुरोध

प्रविष्टि तिथि: 20 FEB 2026 5:43PM by PIB Delhi

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में समावेशी और लचीली कृषि खाद्य प्रणालियों के लिए एआईविषय पर आयोजित सत्र इस बात पर केंद्रित रहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खाद्य उत्पादन, वितरण और पहुंच के बीच मौजूद लंबे समय से चली आ रही वैश्विक असमानता को दूर करने में मदद किस प्रकार कर सकती है। विचार-विमर्श के दौरान जलवायु-अनुकूल और लचीली कृषि को सक्षम बनाने, आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ बनाने तथा किसानों को उभरते डिजिटल इकोसिस्टम में पूर्ण रूप से एकीकृत करने के लिए डेटा, डिजिटल अवसंरचना और सीमा-पार सहयोग की भूमिका का विस्तार से विश्लेषण किया गया।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक अवसर केवल अधिक उपज में ही नहीं, बल्कि ऐसे विवेकपूर्ण और परस्पर जुड़े खाद्य तंत्रों के निर्माण में निहित है जो मांग के अनुसार वास्तविक समय में प्रतिक्रिया दे सकें, बर्बादी को कम करें और बाजार तक पहुंच में सुधार करें। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि इसे हासिल करने के लिए परस्पर-संचालित डेटा शासन, पारदर्शी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणालियां और नवाचार को पायलट परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन तक ले जाने के लिए स्पष्ट मार्ग आवश्यक होंगे, जिनमें उद्योग, सरकारों और बहुपक्षीय संस्थानों की भागीदारी शामिल हो।

भारत में नीदरलैंड के राजदूत हैरी वर्वेइज ने एआई-सक्षम कृषि के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सतत विकास और राष्ट्रीय मजबूतीदोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में तेज़ी से डिजिटल तकनीकों को अपनाए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे उत्पादकता बढ़ाने, वैश्विक खाद्य उत्पादन की स्थिरता सुनिश्चित करने, प्रकृति संरक्षण में सुधार लाने और जलवायु लचीलापन को समावेशी तरीके से बढ़ावा देने के स्पष्ट अवसर मिलते हैं।उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रगति अंततः राष्ट्रों की स्वायत्तता और स्थिरता में योगदान देती हैं।

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुख्य सूचना अधिकारी और निदेशक डेजन याकोव्ल्येविच ने चेतावनी दी कि डिजिटल बहिष्करण अब सीधे तौर पर आर्थिक और सामाजिक बहिष्करण में बदल रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणालियों में भागीदारी अब अपरिहार्य हो गई है, और यदि किसान या समुदाय इससे बाहर रह जाते हैं, तो वे प्रभावी रूप से हर पारिस्थितिकी तंत्र से बाहर हो जाते हैं।उन्होंने  कहा कि एआई के बढ़ते प्रभाव के साथ यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि हमारे डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में सभी को समान अवसर मिलें।

नीति फ्रंटियर हब की विशिष्ट फेलो देबजानी घोष ने वैश्विक खाद्य वितरण में संरचनात्मक असंतुलन की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यद्यपि दुनिया अपनी जनसंख्या का पेट भरने के लिए पर्याप्त उत्पादन करती है, फिर भी पहुंच और लॉजिस्टिक्स में कमी के कारण भूख और खाद्य की बर्बादी दोनों बने हुए हैं। उद्योग-नेतृत्व वाले विस्तार की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्राथमिकता स्पष्ट रूप से समस्याओं की पहचान करना और बाजार तथा वाणिज्यीकरण के लिए स्पष्ट मार्गतैयार करना है। उन्होंने इन जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए समर्पित उत्कृष्टता केंद्रों और नवाचार हब स्थापित करने की वकालत की।

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में डेटा-डिर्वन गवर्नेंस और एआई पॉलिसी की एप्लाइड रिसर्च लीड सारा रेंडटॉर्फ स्मिथ ने वैश्विक खाद्य आपूर्ति शृंखलाओं में एआई के विस्तार के लिए पारदर्शिता और परस्पर संचालन योग्य शासन ढांचों के महत्व पर जोर दिया। बिखरी हुई नियामक प्रणालियों से उत्पन्न जटिलताओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों और नियामकों को यह जानने के लिए पारदर्शिता की आवश्यकता है कि एआई प्रणालियाँ अपने निर्णय कैसे लेती हैं।उन्होंने इस बात पर बल दिया कि व्यापार ट्रेसबिलिटी और मजबूत सीमापार कृषि नेटवर्क को सक्षम बनाने के लिए अधिक सशक्त अंतरसंचालनीयता आवश्यक है।

सत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि एआई-चालित कृषि प्रणालियाँ केवल उत्पादकता बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जलवायु-अनुकूल खेती, विवेकपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं और समावेशी बाज़ार पहुँच को भी संभव बना सकती हैं। डिजिटल अवसंरचना को पारदर्शी शासन, निजी क्षेत्र के नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोड़कर, वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि एआई ऐसे खाद्य तंत्रों के निर्माण में मदद कर सकता है जो न केवल अधिक कुशल हों, बल्कि अधिक न्यायसंगत और लचीले भी हों।

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पीके/केसी/आरके/एसके

 


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