भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय
केंद्रीय विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु में प्रस्तावित उन्नत विनिर्माण प्रणाली मिशन पर सुझाव के लिए हितधारकों के साथ परामर्श बैठक आयोजित
प्रविष्टि तिथि:
24 FEB 2026 11:44AM by PIB Delhi
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (ओपीएसए) और भारी उद्योग मंत्रालय ने केंद्रीय विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु के सहयोग से 23 फरवरी 2026 को सीएमटीआई में समन्वित उन्नत विनिर्माण कार्यप्रणाली पर चर्चा के लिए संयुक्त रूप से हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की।

परामर्श बैठक में उन्नत विनिर्माण प्रणालियों में भारत की क्षमता सुदृढ़ करने हेतु व्यवस्थित सुझाव प्राप्त करने के लिए सरकार के प्रतिनिधियों, उद्योग संघों, विनिर्माण उद्यमों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और प्रौद्योगिकी विकासकर्ताओं ने भाग लिया। विचार-विमर्श में सीएनसी मशीन टूल्स और कंट्रोलर्स, उन्नत मशीनें, परीक्षण और मापन अवसंरचना, रोबोटिक्स और रोबोटिक आर्म्स तथा उन्नत एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3डी और 4डी प्रिंटिंग) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने अपने संबोधन में जोर देते हुए कहा कि उन्नत विनिर्माण प्रणालियां समकालीन औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं और एयरोस्पेस, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिकी, ऑटोमोटिव, ऊर्जा और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में भारत की आकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीक और बेहतर आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए उच्च परिशुद्धता वाली मशीनों, उत्पादन प्रणालियों, सीएनसी नियंत्रकों, सेंसरों और गुणवत्ता अवसंरचना में स्वदेशी क्षमताओं की आवश्यकता है। प्रोफेसर सूद ने विकसित भारत की परिकल्पना के केंद्र में उन्नत विनिर्माण का उल्लेख करते हुए सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय का आह्वान किया। उन्होंने उद्योग के नेतृत्व वाले अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष और अनुदान-आधारित अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) को गहन प्रौद्योगिकी अनुसंधान और व्यावहारिक नवाचार को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में एक बताया। प्रोफेसर सूद ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के स्थानीयकरण, इन्हें वैश्विक मानकों के समरूप बनाने, विनिर्माण और औद्योगिक प्रक्रियाओं में स्मार्ट डिजिटल प्रौद्योगिकियों के एकीकरण संबंधी चौथी औद्योगिक क्रांति-उद्योग 4.0 की तैयारी बढ़ाने और उन्नत कौशल विकास पहल पर बल दिया।

ओपीएसए की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी ने अपने संबोधन में, उन्नत विनिर्माण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने में पिछले एक वर्ष में हुई व्यापक परामर्श प्रक्रिया का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच खाई पाटने के लिए प्रणालीगत दृष्टिकोण और प्रौद्योगिकी तत्परता (टीआरएल) अनुरूप मिशन संरचना की आवश्यकता पर भी बल दिया। डॉ. मैनी ने लक्षित अनुसंधान एवं विकास, साझा परीक्षण अवसंरचना, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत प्रमाणन प्रणालियों और उद्योग-अकादमिक सहयोग मजबूत करने के महत्व की चर्चा की।
केंद्रीय विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु की शासी परिषद के अध्यक्ष और इंफोसिस के सह-संस्थापक एस. क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि पूंजीगत वस्तु क्षेत्र (उन उद्योगों का समूह जो अन्य वस्तुओं के उत्पादन के लिए मशीनरी, उपकरण और औद्योगिक संयंत्र इत्यादि बनाते हैं) उन्नत विनिर्माण के लिए मूलभूत है और उच्च मूल्य वाले उद्योगों को सहयोग के लिए इसमें तकनीकी दक्षता बढ़ाना आवश्यक है। श्री गोपालकृष्णन ने नवाचार और उद्योग सहयोग द्वारा सीएमटीआई के योगदान का उल्लेख किया और आयात पर निर्भरता कम करने और तकनीकी संप्रभुता बढ़ाने के लिए सतत साझेदारी का आह्वान किया।
श्री विजय मित्तल, संयुक्त सचिव, भारी उद्योग मंत्रालय ने पूंजीगत वस्तुओं, विशेष रूप से मशीन टूल क्षेत्र के योगदान का उल्लेख किया। भारी उद्योग मंत्रालय की पूंजीगत वस्तु योजना द्वारा कई पूंजीगत वस्तुओं के स्वदेशी प्रयासों और परीक्षण अवसंरचना की स्थापना में सहयोग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रस्तावित उन्नत विनिर्माण प्रणाली मिशन देश में सतत विकास को बढ़ावा देगा। ओपीएसए वैज्ञानिक 'जी'/सलाहकार डॉ. राकेश कौर ने भी कहा कि मिशन का ढांचा अभी तैयार किया जा रहा है और इसमें सरकार, शैक्षणिक क्षेत्र और उद्योग जगत के हितधारकों के सुझाव प्राथमिकताओं की पहचान करने, कमियां दूर करने और व्यावहारिक कार्यान्वयन के मार्ग निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होंगे।
उद्घाटन सत्र में सीएमटीआई के निदेशक डॉ. नागाहनुमैया की स्वागत टिप्पणियां और इंडियन मशीन टूल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष मोहिनी केलकर और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान सुरथकल के निदेशक प्रोफेसर बी. रवि की संदर्भ प्रस्तुतियां भी शामिल रहीं।
उद्घाटन सत्र के उपरांत प्रयोगशाला का दौरा और केंद्रीय विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा पिछले कुछ वर्षों में डिजाइन और विकसित की गई कई मशीनों और उपकरणों के प्रदर्शन का अवलोकन किया गया। प्रदर्शित प्रौद्योगिकियों में वर्टिकल प्लेनेटरी मिक्सिंग मशीनें, एयरोस्पेस लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स (एलआरयू), विशेषीकृत परीक्षण रिग, स्वचालित ऑप्टिकल निरीक्षण प्रणाली और सेंसर प्रौद्योगिकी विकास केंद्र के विकास शामिल रहे।
प्रोफेसर सूद ने इस अवसर पर, औपचारिक तौर पर बॉल स्क्रू लीड त्रुटि परीक्षण (सीएनसी मशीनों और ऑटोमेशन सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले बॉल स्क्रू की सटीकता और परिशुद्धता मापने की प्रक्रिया और प्रमाणन प्रणाली का उद्घाटन किया, जो भारत में इस प्रकार की पहली सुविधा है। इसे भारी उद्योग मंत्रालय की पूंजीगत वस्तु योजना के तहत केंद्रीय विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थापित किया गया है।
इसके बाद परामर्श प्रक्रिया, उन्नत विनिर्माण के प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित निम्नलिखित तीन समानांतर विषयगत तकनीकी सत्रों पर हुई।
(i) सीएनसी मशीन टूल कंट्रोल सिस्टम, उन्नत और विशेष प्रयोजन मशीनें, परीक्षण और मेट्रोलॉजी,
(ii) रोबोटिक्स और रोबोटिक आर्म्स, और
(iii) उन्नत एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम (3डी और 4डी प्रिंटिंग)।


चर्चा में उच्च स्तरीय मशीन टूल्स और एग्रीगेट्स में महत्वपूर्ण तकनीकी कमियों और मूल्य श्रृंखला चुनौतियों का उल्लेख, महत्वपूर्ण घटकों के स्थानीयकरण की आवश्यकता, घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत बनाने और स्वदेशी प्रौद्योगिकी अपनाने में नीतिगत समर्थन और सार्वजनिक खरीद की भूमिका पर बल दिया गया। रोबोटिक्स पर चर्चा में रोबोटिक्स और फिजिकल एआई को उन्नत विनिर्माण के प्रमुख प्रवर्तक के रूप में रेखांकित करते हुए पारिस्थितिकी तंत्र की बाधाओं, सीमित विस्तार और सटीक आपूर्ति श्रृंखलाओं में कमियों का उल्लेख किया गया। इसमें समन्वित राष्ट्रीय प्रयासों और सक्रिय उद्योग भागीदारी पर जोर दिया गया। एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सत्र में सामग्री और प्रक्रिया योग्यता, साझा प्रोटोटाइपिंग और सत्यापन अवसंरचना और औद्योगिक विस्तार के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें उद्योग द्वारा परिभाषित समस्या और सुदृढ़ अकादमिक-उद्योग सहयोग पर जोर दिया गया। इन विशेष सत्रों का संचालन एमेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और निदेशक डॉ. विश्वास आर. पुट्टिगे; भारतीय विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर प्रो. बी. गुरुमूर्ति; और गोदावरी तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चंद्रशेखर यूसी ने किया। इन सत्रों में उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
आयोजन में 16 उप-विषयों पर आधारित कार्य समूहों ने रणनीतिक प्रौद्योगिकी प्राथमिकताओं, सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं, बजट, समयसीमा और जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर चर्चा की। अंतर-समूह समन्वय ने मिशन-उन्मुख दृष्टिकोण के लिए आवश्यक अवसरंचना की आवश्यकताओं और नीतिगत अनुशंसा को रेखांकित किया।
परामर्श बैठक में सरकार, उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, स्टार्टअप, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों सहित लगभग 220 हितधारकों ने भाग लिया। प्राप्त सुझावों से उन्नत विनिर्माण प्रणाली प्रस्ताव के मसौदे को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और अनुसंधान एवं विकास, सत्यापन, परीक्षण और औद्योगिक अनुप्रयोग को एकीकृत करने वाली समन्वित राष्ट्रीय संरचना के विकास में सहयोग मिलेगा जो भारत के उन्नत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाएगा।
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पीके/केसी/एकेवी/एम
(रिलीज़ आईडी: 2232107)
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