श्रम और रोजगार मंत्रालय
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डॉ. मनसुख मांडविया ने ईपीएफ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की 239वीं बैठक की अध्यक्षता की


केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ग्राहकों को ईपीएफ पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर देने की सिफारिश की

बोर्ड ने निष्क्रिय ईपीएफओ खातों में 1,000 रुपये या उससे कम की बकाया राशि वाले खातों में स्वतः दावा निपटान शुरू करने के लिए एक पायलट परियोजना को मंजूरी दी;  1.33 लाख से अधिक खातों के लगभग 5.68 करोड़ रुपये कवर किए जाएंगे

केंद्रीय बोर्ड ने श्रमिकों के हितों की रक्षा और विवादों के त्वरित समाधान हेतु छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए ‘एमनेस्टी योजना’ को स्वीकृति दी

नए ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई को मंजूरी दी गई

ये योजनाएं सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुरूप हैं

ईपीएफ छूट पर नई सरल मानक संचालन प्रक्रिया को मंजूरी,  जिससे दक्षता, पारदर्शिता और अनुपालन में और आसानी होगी

प्रविष्टि तिथि: 02 MAR 2026 3:37PM by PIB Delhi

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा कार्य तथा खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज नई दिल्ली में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की 239वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उपाध्यक्ष सुश्री शोभा करंदलाजे, श्रम एवं रोजगार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री ; सह-उपाध्यक्ष सुश्री वंदना गुरनानी, श्रम एवं रोजगार सचिव और सदस्य सचिव तथा श्री रमेश कृष्णमूर्ति, केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त भी उपस्थित थे।

 

विस्‍तृत विचार-विमर्श के बाद सीबीटी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सदस्यों के ईपीएफ खातों में जमा राशि पर 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर की सिफारिश की है। केन्‍द्र सरकार द्वारा ब्याज दर को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया जाएगा, जिसके बाद ईपीएफओ ग्राहकों के खाते में ब्याज जमा करेगा।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद  ईपीएफओ ने मजबूत वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है, जिससे ब्याज खातों पर दबाव डाले बिना स्थिर और प्रतिस्पर्धी रिटर्न सुनिश्चित हुए हैं। यह निर्णय करोड़ों श्रमिकों की सेवानिवृत्ति सुरक्षा को मजबूत करके उन्हें लाभ पहुंचाता है, साथ ही अन्य समान निवेश विकल्पों की तुलना में विवेकपूर्ण, सतत और आकर्षक रिटर्न प्रदान करने और अंशदान की सुरक्षा के प्रति ईपीएफओ की प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि करता है।

 

ईटीएफ और अन्य निवेशों से मिले अच्छे प्रतिफल के कारण ईपीएफओ पिछले कई वर्षों से 8% से अधिक की ब्याज दर घोषित करने में सक्षम रहा है। यह निर्णय ईपीएफओ के निवेश पोर्टफोलियो की मजबूत साख और अपने सदस्यों को प्रतिस्पर्धी प्रतिफल प्रदान करने की इसकी निरंतर क्षमता को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, डॉ. मांडविया की अध्यक्षता में ईपीएफओ में सुधारों को जारी रखते हुए निम्नलिखित एजेंडा मदों को चर्चा और अनुमोदन के लिए बोर्ड के समक्ष रखा गया:-

  • छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए माफी योजना: बोर्ड ने आयकर अधिनियम, 2026 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ईपीएफ एवं एमपी अधिनियम, 1952 के अंतर्गत अभी तक शामिल न किए गए या छूट प्राप्त न कर चुके आयकर अधिनियम के अनुपालन संबंधी मुद्दों को हल करने के लिए एक बार की माफी योजना को मंजूरी दी है। प्रस्तावित योजना का उद्देश्य प्रतिष्ठानों और ट्रस्टों को निर्धारित छह महीने की अवधि के भीतर अनुपालन में लाना है, मुख्य रूप से श्रमिकों के हितों की रक्षा करना और उन प्रतिष्ठानों के लिए हर्जाना, ब्याज और जुर्माना माफ करना है, जिन्होंने पहले ही वैधानिक योजना के बराबर या उससे बेहतर लाभ प्रदान किए हैं। यह योजना निर्दिष्ट शर्तों के अधीन पूर्वव्यापी छूट या माफी की अनुमति देती है और यह सुनिश्चित करती है कि सभी पात्र कर्मचारियों को वैधानिक लाभ प्राप्त हों। इस उपाय से 100 से अधिक सक्रिय मुकदमे और कई अन्य मामलों के समाधान की उम्मीद है, जिससे हजारों ट्रस्ट के सदस्यों को लाभ होगा। यह योजना उन छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों पर लागू होगी, जिन्होंने ईपीएफ एवं एमपी अधिनियम, 1952 के प्रावधानों का अनुपालन किया है।
  • ईपीएफ छूट संबंधी नई सरल मानक संचालन प्रक्रिया : बोर्ड ने ईपीएफ छूट संबंधी नई सरल मानक संचालन प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है, जिसमें मौजूदा चार एसओपी और छूट नियमावली को एक व्यापक ढांचे में समेकित किया गया है। इसका उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना है। यह एसओपी पिछले संचय को सरेंडर करने और स्थानांतरित करने के लिए एक संपूर्ण डिजिटल प्रक्रिया भी प्रदान करती है। प्रौद्योगिकी संचालित यह प्रबंधन दृष्टिकोण छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के ऑडिट को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाएगा। एक एकीकृत ढांचा व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देगा, कागज रहित काम के साथ साथ पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा, छूट संबंधी मामलों के सरेंडर/कैंसलेशन मामलों की तेजी से प्रोसेसिंग करेगा और जोखिम-आधारित ऑनलाइन ऑडिट के माध्यम से अनुपालन व्यवहार को प्रोत्साहित करेगा।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रावधानों के साथ मौजूदा ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई योजनाओं का संरेखण: सीबीटी ने मौजूदा ढांचे से सुगम संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की अधिसूचना को मंजूरी दे दी है। नव अनुमोदित ईपीएफ योजना, 2026, ईपीएस, 2026 और ईडीएलआई योजना, 2026 मौजूदा योजनाओं का स्थान लेंगी और भविष्य निधि, पेंशन और बीमा लाभों के प्रशासन के लिए एक कानूनी रूप से मजबूत आधार प्रदान करेंगी।
  • वार्षिक रिपोर्ट की स्वीकृति: समिति ने वर्ष 2024-25 के लिए ईपीएफओ की वार्षिक रिपोर्ट को मंजूरी दे दी और इसे संसद के समक्ष प्रस्तुत करने की सिफारिश की। वार्षिक रिपोर्ट में वर्ष 2024-25 के दौरान सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार, विभिन्न डिजिटलीकरण पहलों, सेवा वितरण में सुधार और संगठनात्मक प्रदर्शन पर प्रकाश डाला गया है।

वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान  ईपीएफओ ने मजबूत परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया। कुल अंशदान 3,35,628.81 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 2,86,894 नए प्रतिष्ठान शामिल किए गए और 1,22,89,244 नए सदस्य नामांकित हुए। संगठन ने 81,48,490 पेंशनभोगियों को सेवाएं प्रदान कीं और 6,01,59,608 दावों का निपटारा किया, जिनमें 69,983 ईडीएलआई दावे शामिल हैं। वर्ष के दौरान कुल 17,33,046 शिकायतों का निवारण किया गया और 39,74,501 कॉल का जवाब दिया गया। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ईपीएफ जमा पर ब्याज दर 8.25 प्रतिशत घोषित की गई है।

इसके अलावा, बोर्ड को सूचित किया गया कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान ईपीएफओ ने कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए, जिनमें केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली (सीपीपीएस) का अखिल भारतीय स्तर पर कार्यान्वयन और चेहरे की पहचान संबंधी प्रौद्योगिकी (एफएटी) के माध्यम से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की शुरुआत शामिल है। कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस), 1995 में संशोधन किया गया ताकि एक महीने के अंशदान के लिए भी निकासी लाभ की अनुमति दी जा सके और ईडीएलआई लाभों को बीमा के साथ 12 महीने की निरंतर रोजगार अवधि वाले सदस्यों के लिए 2.5 लाख रुपये से 7 लाख रुपये तक बढ़ाया गया। अनुपालन को सरल बनाने के लिए 14.06.2024 से प्रभावी एक प्रतिशत प्रति माह की एक समान दंडात्मक क्षति दर अधिसूचित की गई। ईपीएफओ को सात आईएसएसए गुड प्रैक्टिस अवार्ड्स (एशिया और प्रशांत, 2024) भी प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त, दावों को सरल बनाने, गलत/धोखाधड़ी वाले यूएएन लिंकेज को अलग करने, ऑनलाइन हस्तांतरण और सुधारों को सुविधाजनक बनाने, छूट को सरेंडर करने और पिछले संचय को स्थानांतरित करने के लिए ऑनलाइन प्रणाली और संयुक्त घोषणाएं प्रस्तुत करने के लिए कई आईटी-सक्षम नागरिक-केंद्रित उपाय शुरू किए गए, जहां सदस्य के पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) आधारित लॉगिन नहीं है।

  • ईपीएफ में निष्क्रिय खातों का परिसमापन: ईपीएफ प्रावधानों के तहत किसी खाते को निष्क्रिय माना जाता है यदि सदस्य के 55 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद या सेवानिवृत्ति की तिथि से, जो भी बाद में हो, लगातार तीन वर्षों तक उसमें कोई अंशदान प्राप्त नहीं होता है। ऐसे खातों के परिसमापन के लिए बोर्ड ने 1,000 रुपये या उससे कम की बकाया राशि वाले निष्क्रिय ईपीएफ खातों में दावा निपटान की स्वतः शुरुआत के लिए एक पायलट परियोजना को मंजूरी दी है। पहले चरण में लगभग 1.33 लाख ऐसे खाते, जिनकी राशि लगभग 5.68 करोड़ रुपये है, इस सुधार पहल के अंतर्गत आएंगे। राशि सीधे सदस्यों के आधार-लिंक्ड और ईपीएफ से जुड़े बैंक खातों में जमा की जाएगी, जिसके लिए नए दावों या दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी और सदस्यों को अपना बकाया तेजी से प्राप्त करने में मदद मिलेगी। पायलट परियोजना की सफलता के आधार पर इस सुविधा को बाद के चरणों में 1,000 रुपये से अधिक की बकाया राशि वाले खातों तक बढ़ाया जाएगा, जिससे ईपीएफ में सदस्य-केंद्रित सुधारों को और मजबूती मिलेगी।

इस पहल से सदस्यों के लंबे समय से लंबित बकाया राशि के भुगतान में तेजी आएगी, प्रक्रियात्मक देरी कम होगी, डेटा की सटीकता में सुधार होगा और ईपीएफओ सदस्यों के लिए पहुंच और सेवा वितरण में और अधिक आसानी होगी।

  • ईपीएफओ की बैलेंस शीट: ईपीएफ योजना, 1952, ईपीएस 1995 और ईडीएलआई योजना 1976 के संबंध में ईपीएफओ के वित्तीय वर्ष 2023-24 के वार्षिक लेखापरीक्षित खातों को सीबीटी द्वारा अपनाने और संसद के समक्ष रखने के लिए अनुमोदित किया गया था।
  • ईपीएफओ का वार्षिक बजट: बोर्ड ने ईपीएफओ और ईपीएफओ द्वारा प्रबंधित योजनाओं के लिए वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों और वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों को भी मंजूरी दी।
  • भारत और ब्रिटेन के बीच सामाजिक सुरक्षा अंशदान से संबंधित सामाजिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर: भारत ने अब तक 22 द्विपक्षीय सामाजिक सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, व्यापक और आर्थिक व्यापार समझौते (सीईटीए) के तहत पहली बार एक डबल कंट्रीब्‍यूशन कन्‍वेंशन (डीसीसी) समझौते पर बातचीत हुई है। सीईटीए के साथ ही 24 जुलाई 2025 को पारस्परिक डीसीसी समझौते पर एक अलग पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। यह हस्ताक्षर समारोह दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में हुआ तथा इस पर भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और ब्रिटेन के वित्‍त मंत्री ने हस्ताक्षर किए। इससे श्रमिक और उनके नियोक्ता दोनों के लिए लागत कम होती है और भारतीय प्रतिभा की लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होता है
  • कॉरपोरेट कार्रवाइयों, बायबैक और कॉल/पुट ऑप्शन के लिए प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल पर एसओपी : बोर्ड ने एक व्यापक एसओपी को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य एक पारदर्शी और समयबद्ध ढांचा तैयार करना है। यह ढांचा संरचित निर्णय लेने, निवेश निगरानी प्रकोष्ठ (आईएमसी) द्वारा मजबूत निगरानी, ​​पुनर्निवेश और ब्याज दर जोखिमों से सुरक्षा और एक स्पष्ट ऑडिट ट्रेल प्रदान करता है। मार्च 2025 तक 28.34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के समेकित कोष और सरकारी प्रतिभूतियों, एसडीएल, पीएसयू बॉन्ड और अन्य अनुमत उपकरणों में इसके पर्याप्त निवेश को देखते हुए कॉरपोरेट कार्रवाइयों के जवाब में समय पर और संरचित निर्णय लेना सदस्यों के धन की सुरक्षा और अधिकतम प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

इससे बाजार की मौजूदा स्थितियों के अनुरूप त्वरित निवेश निर्णय लेने में मदद मिलेगी, जिससे देरी से उत्पन्न होने वाले जोखिम कम हो जाएंगे, साथ ही यह सुनिश्चित होगा कि सदस्यों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा के लिए सभी कार्य निर्धारित नीति और शासन मानदंडों के अनुसार ही किए जाएं।

  • इक्विटी ईटीएफ में निवेश और लिक्विड म्यूचुअल फंड (एलएमएफ) में निवेश एवं रिडेम्पशन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी ) : बोर्ड ने ईपीएफओ योजनाओं में निधि प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी दी। इस सुधार में निधियों का समेकन, वार्षिक एसआईपी पद्धति को अपनाना, निर्धारित संचालन समय-सीमा और ओवरड्राफ्ट सुविधा का प्रावधान शामिल है।

एसओपी इक्विटी ईटीएफ निवेश के लिए एक संरचित ढांचा प्रस्तुत करती है, जिसमें स्पष्ट रूप से परिभाषित प्रवेश और निकास प्रोटोकॉल, जोखिम सीमाएं, अनुपालन नियंत्रण और निवेश निगरानी प्रकोष्ठ (आईएमसी) के माध्यम से बेहतर निगरानी शामिल है। यह परिभाषित होल्डिंग मानदंडों और निरंतर निगरानी के साथ लिक्विड म्यूचुअल फंड में विनियमित तैनाती के माध्यम से तरलता प्रबंधन को भी मजबूत करती है।

यह ढांचा एक परिभाषित अनुमोदन मैट्रिक्स, सरकार द्वारा अधिसूचित निवेश मानदंडों का कड़ाई से पालन, केंद्रीय बोर्ड को आवधिक रिपोर्टिंग और बहुस्तरीय लेखापरीक्षा के माध्यम से बेहतर शासन को संस्थागत रूप देता है। इन सुधारों का उद्देश्य विवेकपूर्ण जोखिम मापदंडों के भीतर अधिकतम प्रतिफल प्राप्त करना, तरलता नियोजन को मजबूत करना और करोड़ों ईपीएफ सदस्यों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करना है।

  • बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) के माध्यम से परीक्षा आयोजित करने की स्वीकृति: बोर्ड ने ईपीएफओ की ओर से सीधी भर्ती और पदोन्नति परीक्षाओं के संचालन के लिए आईबीपीएस को एक एजेंसी के रूप में मंजूरी दी है। इससे पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित होगी, जिससे रिक्तियों को तेजी से भरा जा सकेगा और हितधारकों को बेहतर सेवा प्रदान की जा सकेगी।

इसके अतिरिक्त, बोर्ड को ईपीएफओ द्वारा सामाजिक सुरक्षा विस्तार, डिजिटल परिवर्तन और सेवा वितरण में हुई प्रगति के बारे में निम्नलिखित जानकारी दी गई:

  • उच्च वेतन पर पेंशन संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 04.11.2022 के निर्णय पर स्थिति संबंधी नोट : भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार, सदस्यों और पेंशनभोगियों द्वारा उच्च वेतन पर पेंशन के लिए कुल 17.49 लाख आवेदन दाखिल किए गए थे। इनमें से लगभग 15.24 लाख आवेदनों का निपटारा 23.02.2026 तक किया जा चुका है।
  • सीआईटीईएस 2.01 के कार्यान्वयन में प्रगति - यह मॉड्यूल ईपीएफओ ​​के डिजिटल इकोसिस्टम को उन्नत करने के लिए सीआईटीईएस (केंद्रीकृत आईटी सक्षम प्रणाली) परियोजना के अंतर्गत शुरू किया गया है। ईपीएफओ वर्तमान में दो प्रमुख अनुप्रयोगों, यूनिफाइड पोर्टल और फील्ड ऑफिस एप्लिकेशन, जिन्हें सामूहिक रूप से ईपीएफओ ​​2.0 कहा जाता है, के माध्यम से हितधारकों को ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करता है। दक्षता को और बढ़ाने के लिए यूनिफाइड पोर्टल के भीतर केंद्रीकृत आईटी सक्षम प्रणाली (सीआईटीईएस) या ईपीएफओ ​​2.01 नामक एक नई पहल विकसित की जा रही है। यह परियोजना ईपीएफओ ​​को विकेंद्रीकृत डेटाबेस से एक केंद्रीकृत प्रणाली में परिवर्तित करती है, जिसमें दावा निपटान और भुगतान के लिए सुव्यवस्थित प्रक्रियाएं शामिल हैं और पुराने फील्ड ऑफिस एप्लिकेशन का स्थान लेती है। सीआईटीईएस 2.0 का बुनियादी ढांचा उन्नत सर्वरों, एसओसी एकीकरण और लाइव प्रोडक्शन मॉड्यूल के साथ पूरी तरह से तैनात है। 19 कार्यालयों में किए गए परीक्षण और मूल्यांकन (यूएटी) में 700 से अधिक मुद्दों की पहचान की गई और उनका समाधान किया गया। उन्नत सदस्य और फील्ड ऑफिस सुविधाओं से स्वचालन, पारदर्शिता और पेंशन वितरण में सुधार हुआ है। प्रदर्शन परीक्षण, वीएपीटी ऑडिट, डेटा माइग्रेशन (99.5 प्रतिशत सटीकता), प्रशिक्षण और चरणबद्ध कार्यान्वयन की प्रक्रिया चल रही है।

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पीके/केसी/आईएम/जीआरएस


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