रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
बायो-फार्मा शक्ति योजना और तीन समर्पित रासायनिक पार्कों के लिए 13,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भारत के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है
भारत की वैश्विक रासायनिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 2030 तक बढ़कर 5-6% हो जाएगी और 2040 तक इसका कारोबार 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा
बजट के बाद आयोजित वेबिनार समग्र सरकारी दृष्टिकोण का एक उदाहरण है : केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा
प्रविष्टि तिथि:
03 MAR 2026 8:28PM by PIB Delhi

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जेपी नड्डा ने कहा कि देश में बायो-फार्मा शक्ति योजना और तीन समर्पित रासायनिक पार्कों के लिए 13,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भारत के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
बजट के बाद आज 'आर्थिक विकास को बनाए रखना और उसे सुदृढ़ करना' विषय पर आयोजित वेबिनार को उन्होंने संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में इस बात का उल्लेख किया कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) विकसित भारत के लिए एक द्वार हैं और भारतीय उद्योग जगत के लिए वैश्विक स्तर पर विस्तार करने के नए अवसर प्रदान करते हैं।
भारत जेनेरिक दवाओं के माध्यम से 'विश्व की फार्मेसी' बन गया है। मंत्री ने कहा कि 2035 तक वैश्विक स्तर पर 40% दवाएं जैविक होंगी। 2030 तक 300 अरब डॉलर मूल्य के पेटेंट समाप्त हो रहे हैं। अब जैविक औषधियों (बायोलॉजिक्स) की ओर बढ़ने का समय है और भारत बायोफार्मा मिशन के साथ इस चुनौती का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस मिशन के लिए अगले पांच वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक बायोसिमिलर बाजार में 1% हिस्सेदारी भारत के लिए सालाना 2 लाख करोड़ रुपये के अवसर में तब्दील हो सकती है।
मंत्री ने आगे कहा कि प्रतिभा और कौशल विकास के साथ अधिक निकटता से जुड़कर एनआईपीईआर जैसी संस्थाओं को मजबूत करना आवश्यक है। देश भर में 1,000 नैदानिक परीक्षण स्थलों का विकास अनुसंधान क्षमता और नवाचार को बढ़ावा देगा। नियामकीय अनुमोदनों में तेजी लाने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की भूमिका पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि जैव-समान दवाओं और औषधियों के किण्वन का समर्थन करने के लिए संगठन को मजबूत किया जाएगा।
श्री नड्डा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत के रसायन क्षेत्र का उत्पादन 19.4 लाख करोड़ रुपये का है और यह डाई और एग्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों में मजबूत है फिर भी वैश्विक स्तर पर इसकी हिस्सेदारी 3% ही है।
बुनियादी अवसंरचना को प्रमुख कमी के रूप में पहचानते हुए मंत्री ने कहा कि प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं, उन्नत अपशिष्ट उपचार प्रणालियों, एकीकृत लॉजिस्टिक्स और अंतर्निहित सुरक्षा तंत्रों से लैस देश भर में 3 समर्पित विश्व स्तरीय रासायनिक पार्कों के लिए 3,300 करोड़ रुपये का आवंटन इस कमी को दूर करेगा। इन पार्कों से औद्योगिक सहजीविता के माध्यम से लागत में 20-40% की कमी आने और डिजाइन के माध्यम से सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। श्री नड्डा ने 2030 तक भारत के वैश्विक रासायनिक क्षेत्र की हिस्सेदारी को 5-6% तक बढ़ाने और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार हासिल करने के महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
सामूहिक स्वामित्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री नड्डा ने कहा कि स्थायी आर्थिक विकास के लिए सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी और साझा जिम्मेदारी आवश्यक है। उन्होंने वेबिनार को ही इस दृष्टिकोण का एक जीवंत उदाहरण बताया, जो विभिन्न क्षेत्रों और संस्थानों में समन्वित प्रयासों को प्रदर्शित करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अलग-थलग प्रयासों से प्रगति हासिल नहीं की जा सकती है और मंत्रालयों, राज्यों और उद्योग जगत के बीच गहन सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने दिन भर चली चर्चाओं की सराहना की और इसे बजट 2026-27 की घोषणाओं को साकार करने की दिशा में एक सकारात्मक योगदान बताया।
बजट के बाद आयोजित वेबिनार उस शृंखला का दूसरा वेबिनार था जिसमें नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, वित्तीय संस्थानों और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया ताकि भारत की विकास गति को तेज करने और बजट 2026-27 की घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जा सके।
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पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2235235)
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