पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
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बंदरगाह , जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने पश्चिम एशिया के विकसित हो रहे समुद्री परिदृश्य के बीच निगरानी और तैयारियों को मजबूत किया


भारतीय समुद्री यात्रियों, जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और समुद्री व्यापार की निरंतरता के लिए उपाय सक्रिय

बड़े बंदरगाहों को व्यापार संचालन में सहायता प्रदान करने और निर्यातकों को राहत देने का निर्देश

प्रविष्टि तिथि: 06 MAR 2026 6:01PM by PIB Delhi

बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय  (एमओपीएसडब्ल्यू) ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे युद्ध घटनाक्रम से बदल रहे समुद्री परिदृश्य के मद्देनजर निगरानी और तैयारी उपायों को मजबूत किया है। इसमें भारतीय समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, भारतीय जहाजों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार की निरंतरता बनाए रखना मुख्य फोकस है।

एमओपीएसडब्ल्यू के सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विकसित हो रही स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में भारत सरकार के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें विदेश मंत्रालय (MEA), महानिदेशक, विदेश व्यापार, (DGFT) और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) शामिल थे। इसमे शिपिंग उद्योग और व्यापार संगठनों जैसे RIL, INSA, CSLA और FIEO के हितधारकों ने भी भाग लिया।

यह समीक्षा माननीय केंद्रीय पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज मंत्री श्री सरबानंद सोनोवाल द्वारा पहले से बदल रहे समुद्री परिदृश्य की समीक्षा बैठक की अगली कड़ी थी।

मंत्रालय ने सभी  हितधारकों को भारत सरकार द्वारा, विशेष रूप से मोपीएसडब्ल्यू द्वारा, मध्य पूर्व में विकसित हो रही स्थिति के बाद उठाए जा रहे कदमों से अवगत कराया। एमओपीएसडब्ल्यू शिपिंग उद्योग के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है।  डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) में 24 घंटे हेल्पलाइन स्थापित की गई है ताकि समुद्री यात्रियों के लिए समन्वय और समर्थन सुगम हो।

एमओपीएसडब्ल्यू में माहौल को लगातार ट्रैक करने के लिए निगरानी तंत्र भी स्थापित किया गया है।भारतीय समुद्री यात्रियों, भारतीय ध्वज वाले जहाजों और समुद्री व्यापार संचालन की सुरक्षा के लिए सावधानी बरतने के उपायों का सलाह जारी किया गया है, जो DGS सर्कुलर नंबर 08 ऑफ 2026 दिनांक 28 फरवरी 2026 के माध्यम से जारी किया गया है। इसमें सभी भारतीय ध्वज वाले जहाजों और भारतीय समुद्री यात्रियों को उन्नत सुरक्षा उपाय अपनाने और DGS सर्कुलर 08 ऑफ 2024 के तहत रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, DGS सर्कुलर नंबर 09 ऑफ 2026 दिनांक 28 फरवरी 2026 के माध्यम से क्रू सेफ्टी एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें भारतीय समुद्री यात्रियों और शिपिंग हितधारकों को तत्काल निर्देश दिए गए हैं। इनमें भारत के तेहरान दूतावास में पंजीकरण और डायरेक्टोरेट को क्रू विवरण जमा करना शामिल हैं।

भारतीय ध्वज वाले जहाज सुरक्षित बने हुए हैं और भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ किसी भी पुष्ट हिरासत, चढ़ाई या हादसे की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। फारस की खाड़ी क्षेत्र (होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 24 और पूर्व में 11, जिसमें ओमान की खाड़ी और आसपास के क्षेत्र शामिल) में मौजूद सभी 35 भारतीय ध्वज वाले जहाजों और एडेन की खाड़ी में 03 जहाजों को LRIT नेशनल डेटा सेंटर के माध्यम से प्रति घंटा अंतराल पर लगातार ट्रैक किया जा रहा है, इन्हें नियमिSITREPs जारी किए जा रहे हैं।

मंत्रालय डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) के माध्यम से स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है, जिसमें प्रमुख भारतीय बंदरगाहों, समुद्री अधिकारियों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय है। भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ-साथ भारतीय समुद्री यात्रियों वाले विदेशी ध्वज वाले जहाजों के लिए उन्नत निगरानी और रिपोर्टिंग तंत्र सक्रिय किए गए हैं ताकि निरंतर स्थितिजन्य जागरूकता और परिचालन तैयारी सुनिश्चित हो।

शिपिंग कंपनियों, जहाज संचालकों और रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंसियों (RPSLs) को संवेदनशील क्षेत्रों में क्रू तैनाती में सावधानी बरतने, यात्रा-विशिष्ट जोखिम मूल्यांकन करने और समुद्री यात्रियों तथा उनके परिवारों के साथ नियमित संचार बनाए रखने की सलाह दी गई है।

भारतीय समुद्री यात्रियों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित समन्वय तंत्र भी स्थापित किए गए हैं।

मंत्रालय ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) और पश्चिम एशियाई गंतव्यों के लिए जा रहे जहाजों और कार्गो की स्थिति की भी समीक्षा की।

 कुल मिलाकर भारत भर के बंदरगाह संचालन स्थिर बने हुए हैं। बंदरगाहों को निर्यातकों को होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने और EXIM व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

मेजर पोर्ट्स ने जहाजों की गतिविधियों पर शिपिंग लाइनों और जहाज एजेंटों के साथ समन्वय में निरंतर निगरानी, क्षेत्र में विकासों का रीयल-टाइम मूल्यांकन और जहाज तथा कार्गो स्थिति की नियमित रिपोर्टिंग सहित परिचालन उपाय लागू किए हैं। जहां आवश्यक हो, अतिरिक्त भंडारण स्थान की व्यवस्था की गई है, जबकि रेफ्रिजरेटेड और नाशवान कार्गो consignments पर करीबी निगरानी की जा रही है ताकि आवश्यकता पर प्राथमिकता से हैंडलिंग सुनिश्चित हो।

मंत्रालय भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों और समुद्री हितधारकों के साथ समन्वय में सभी घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए रख रहा है ताकि भारतीय समुद्री हितों की रक्षा हो, समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और समुद्री व्यापार तथा लॉजिस्टिक्स संचालन सुचारू रूप से चले।

 

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पीके /केसी/ एमएम


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