रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : उर्वरक विभाग
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बावजूद, सरकार खरीफ मौसम के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करेगी
यूरिया, डीएपी एवं एनपीके के भंडार पिछले वर्ष की तुलना में बहुत ज्यादा हैं, जिससे किसानों के लिए सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित होगी
रणनीतिक उपाय एवं दीर्घकालिक आयात समझौते उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता करते हैं
प्रविष्टि तिथि:
06 MAR 2026 6:48PM by PIB Delhi
उर्वरक विभाग ने पश्चिम एशिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न भू-राजनीतिक व्यवधानों के कारण बाजार में चल रही अटकलों को संबोधित करने के लिए आज कृषि समुदाय को दृढ़तापूर्वक आश्वासन दिया कि भारत में उर्वरक भंडार मजबूत, सुरक्षित एवं आगामी खरीफ मौसम से निपटने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है।
आंकड़े तैयारियों को स्पष्ट जानकारी दे रहे हैं। सीमित खपत चरण एवं महत्वाकांक्षी अग्रिम भंडारण रणनीति का लाभ उठाते हुए सरकार ने सभी प्रकार के उर्वरकों का एक मजबूत भंडार तैयार किया है।
खरीफ फसल से पहले भारत के उर्वरक भंडार में वृद्धि, बढ़कर 177 लाख मीट्रिक टन हुआ
उर्वरक विभाग ने कृषि समुदाय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए उर्वरक भंडार में वर्ष-दर-वर्ष 36.5 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की है और यह 06 मार्च, 2025 को 129.85 एलएमटी से बढ़कर आज 177.31 एलएमटी हो गया। मिट्टी में मौजूद महत्वपूर्ण पोषक तत्वों, विशेष रूप से डीएपी भंडार (25.13 लाख मीट्रिक टन) और एनपीके भंडार (55.87 लाख मीट्रिक टन तक) में अभूतपूर्व वृद्धि के कारण यह मजबूत सुरक्षा कवच बना हुआ है। इसके अलावा, देश में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले उर्वरक यूरिया की उपलब्धता भी बढ़कर 59.30 लाख मीट्रिक टन हो गई है। यह मजबूत एवं डेटा-आधारित भंडार निस्संदेह दर्शाता है कि देश में असाधारण रूप से पर्याप्त भंडार हैं और किसी भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है, क्योंकि हम चरम खरीफ बुआई के मौसम के करीब पहुंच रहे हैं।
उर्वरक के ये भंडार पिछले वर्ष की तुलना में बहुत अधिक हैं और एक महत्वपूर्ण परिचालन सहायता प्रदान करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय रसद संबंधी बाधाएं घरेलू स्तर पर उर्वरक की कमी न बन सके।
अभूतपूर्व आयात
उर्वरक विभाग ने सभी श्रेणियों के सब्सिडी वाले उर्वरकों की आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही महत्वपूर्ण आयात की व्यवस्था कर ली है। सरकार द्वारा फरवरी 2026 तक 98 लाख मीट्रिक टन तैयार उर्वरक आयात किया गया और अगले तीन महीनों के लिए 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक के आयात की व्यवस्था की जा चुकी है। यह वैश्विक व्यवधानों के बीच किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार के सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
इसके अलावा, देश में क्षेत्रीय मूल्य निर्धारण एवं आपूर्ति में अस्थिरता से निपटने के लिए, भारतीय कंपनियों ने पी एंड के उर्वरकों के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उत्पादकों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौता किया है।
सामरिक दक्षता: उच्च-स्तरीय हस्तक्षेप
सरकार एलएनजी आपूर्ति के दबाव के बीच संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है। विभाग में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में, सरकार ने उर्वरक कंपनियों को आश्वासन दिया है कि उनके क्षेत्र में गैस की आपूर्ति शीर्ष राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी रहेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसान सरकार की प्राथमिकता हैं और किसी भी परिस्थिति में उनके हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। विभाग ने कहा कि किसानों को बिना किसी घबराहट के खरीफ की तैयारियों में जुटने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
रणनीतिक दक्षता का प्रदर्शन करते हुए, विभाग ने पाया कि वर्तमान कमजोर अवधि में उर्वरक कंपनियां पारंपरिक रूप से मरम्मत और रखरखाव के लिए संयंत्र बंद रखती हैं। अब इन कंपनियों ने मार्च में निर्धारित रखरखाव कार्यों को आगे बढ़ाने की पेशकश की है जिससे वे इस व्यवधानकारी समय का लाभ उठा सकें। तैयार उर्वरकों के अतिरिक्त आयात के लिए कई वैश्विक स्रोतों से भी संपर्क किया जा रहा है। उर्वरक विभाग, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ घनिष्ठ समन्वय कर आयात की शीघ्र निकासी सुनिश्चित करने के लिए वास्तविक समय में स्थिति की निगरानी कर रहा है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में होने वाले बदलावों के अनुसार त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
पीके/केसी/एके/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2236136)
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