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वर्ष 2025-26 के दौरान मुक्त व्यापार समझौतों में भारत की उपलब्धियां

प्रविष्टि तिथि: 06 MAR 2026 8:00PM by PIB Delhi

भारत ने वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में पिछले एक दशक में एक निर्णय लेने में सक्षम एवं आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनायी है। भारत ने वैश्विक व्यापार की दिशा को न केवल नए सिरे से परिभाषित किया है, बल्कि आधुनिक, भविषयोन्मुखी और नए दौर के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का मार्ग भी प्रशस्त किया है।

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में मुक्त व्यापार समझौतों के अपने दायरे को विस्तार दिया है और अब तक 38 देशों के साथ कुल नौ एफटीए तक अपनी पहुंच बनाई है। इसकी शुरुआत वर्ष 2021 में भारत–मॉरीशस समझौते से हुई। इसके बाद मई 2022 में भारत–यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू हुआ। दिसंबर 2022 में भारत–ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता प्रभावी हुआ। इसके बाद भारत ने 10 मार्च 2024 को यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ई एफ टी ए) के साथ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टी ई पी ए) पर हस्ताक्षर किए, जो 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ। जुलाई 2025 में भारत–ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सी ई टी ए) पर हस्ताक्षर किए गए और दिसंबर 2025 में भारत–ओमान सी ई पी ए संपन्न हुआ। इस शृंखला को आगे बढ़ाते हुए 22 दिसंबर 2025 को भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा की गई और 27 जनवरी 2026 को भारत–यूरोपीय संघ के साथ एफटीए पर सहमति बनी। संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भी 7 फरवरी 2026 को एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति बनाकर भारत ने वैश्विक व्यापार में अपनी मजबूत उपस्थिति को और सुदृढ़ किया है।

दुनिया के अलग-अलग देशों और समूहों के साथ किया जाने वाला हर एक समझौता अपने आप में विशिष्ट है जो भारत के विशाल बाजार, भारत की आर्थिक क्षमता तथा 1.4 अरब भारतीयों की क्षमताओं पर वैश्विक भरोसे का प्रतीक है।

ये समझौते हमारे किसानों के लिए हैं, जिनके उत्पादों को अब विकसित देशों के बाजारों तक पहुंच मिल रही है। ये हमारे उद्यमियों और महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एम एस एम ई) के लिए हैं, जो परिधान, चमड़ा और हस्तशिल्प जैसे उत्पादों का निर्यात नई प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के साथ कर रहे हैं। ये समझौते हमारे प्रतिभाशाली युवाओं के लिए भी हैं—हमारे विद्यार्थी, आईटी पेशेवर, शेफ और योग प्रशिक्षक—जिन्हें अब काम करने, पढ़ाई करने और अपने भविष्य का निर्माण करने के लिए अधिक विकल्प और स्पष्ट गतिशीलता के अवसर मिल रहे हैं। इन समझौतों में विदेशों में पढ़ाई के बाद कार्य वीज़ा, पेशेवर गतिशीलता और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी छूट के भी प्रावधान शामिल हैं। ये समझौते जैविक उत्पादों और आयुष की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करते हैं। साथ ही, ये डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र को भी सशक्त बनाते हैं, जो वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए आई) के विकास को गति दे रही हैं। इसके अतिरिक्त, ये समझौते निवेश को प्रोत्साहित करने और हमारे मुक्त व्यापार समझौता (एफ टी ए) साझेदार देशों को भारत की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदार बनाने का भी कार्य कर रहे हैं।

भारत ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर बातचीत खुलेपन, संतुलन और आत्मनिर्भर भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए की है। इन समझौतों में डेयरी, कृषि, किसानों और घरेलू उद्योग जैसे सभी संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा की गई है तथा बाजार तक पहुंच को सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखा गया है। यह भारत की मजबूत और आत्मविश्वासी वार्ताकार क्षमता को दर्शाता है, जिसके माध्यम से वैश्विक व्यापार में परिवर्तन के एक नए युग की शुरुआत हो रही है और हमारे नागरिकों की आकांक्षाओं को साकार किया जा रहा है। भारत विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाते हुए आगे बढ़ रहा है।

वर्ष 2025–26 में हस्ताक्षरित अथवा घोषित किए गए समझौतों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित लिंक पर देखी जा सकती हैं:–

https://www.commerce.gov.in/wpcontent/uploads/2026/03/FTAsachievement.pdf

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पीके/केसी/डीटी


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