मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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बजट के बाद कृषि एवं ग्रामीण परिवर्तन पर चर्चा, वेबिनार में सेक्टर की तेज प्रगति के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार की गई


मत्स्य पालन विभाग की विशेष चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया, योजनाओं को लागू करने के लिए मुख्य सिफारिशें तैयार की गईं

माननीय प्रधानमंत्री ने बजट 2026 को विकसित भारत का रोडमैप बताया, मत्स्य पालन वैल्यू चेन में हाई-इम्पैक्ट और स्केलेबल मॉडल विकसित करने का आह्वान किया

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जलाशय मात्स्यिकी की अपार क्षमता रेखांकित की, ग्रामीण समृद्धि को इससे नई गति मिलेगी

मत्स्य पालन की क्षमता को उजागर करने के लिए मैपिंग, क्लस्टर प्लानिंग, हैचरी, फीड और लॉजिस्टिक्स अनिवार्य: माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी

प्रविष्टि तिथि: 06 MAR 2026 8:39PM by PIB Delhi

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा आज "कृषि और ग्रामीण कायाकल्प" विषय पर हाइब्रिड मोड में एक पोस्ट-बजट वेबिनार का आयोजन किया गया। यह वेबिनार भारत सरकार के उस वार्षिक अभ्यास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समयबद्ध, समन्वित और परिणाम-उन्मुख कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और भारत के निर्यात में मत्स्य पालन क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने जलाशयों की वास्तविक क्षमता की वैज्ञानिक मैपिंग, क्लस्टर-आधारित योजना और स्थानीय समुदायों एवं राज्य मत्स्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, निर्यात और लॉजिस्टिक्स जैसी पूरी वैल्यू चेन में नए बिजनेस मॉडल विकसित करने के महत्व को समझाया, ताकि जलाशयों की क्षमता का पूरी तरह से दोहन किया जा सके।

माननीय केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने कृषि भवन से उद्घाटन सत्र में भाग लिया। उनके साथ माननीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रोफेसर एस. पी. सिंह बघेल और माननीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन भी उपस्थित रहे।

वेबिनार के समापन सत्र में माननीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री, प्रोफेसर एस. पी. सिंह बघेल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बजट 2026-27 के तहत पहली बार जलाशय मात्स्यिकी को वैज्ञानिक दिशानिर्देशों के साथ नेशनल फ्रेमवर्क में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल से भारत के जलाशयों की अपार संभावनाओं के द्वार खुलेंगे, तकनीक-आधारित एक्वाकल्चर को मजबूती मिलेगी और स्थानीय समुदायों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित होगी।

समापन सत्र के दौरान माननीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री, श्री जॉर्ज कुरियन ने ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और निर्यात क्षमता बढ़ाने में मत्स्य पालन क्षेत्र की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि बजट 2026-27 फसल कटाई के बाद पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, बाजार तक पहुंच और महिलाओं के नेतृत्व में होने वाले मूल्यवर्धन व ब्रांडिंग में निवेश के माध्यम से तटीय मत्स्य पालन और वैल्यू चेन को काफी मजबूती प्रदान करता है।

ब्रेकआउट सत्र – मत्स्य पालन हितधारकों के बीच गहन विचार-विमर्श

ब्रेकआउट सत्र के दौरान, भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग द्वारा नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में 'मत्स्य पालन के लिए जलाशयों एवं अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास तथा तटीय मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण' विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता मत्स्य पालन विभाग के सचिव, डॉ. अभिलक्ष लिखी ने की।

मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने ब्रेकआउट सत्र को संबोधित करते हुए एक इंटीग्रेटेड अप्रोच पर जोर दिया। उन्होंने आधुनिक तकनीक समर्थित केज और पेन कल्चर को बढ़ावा देने, वैज्ञानिक योजना के लिए जियोस्पेशियल उपकरणों के व्यापक उपयोग, प्रजातियों के विविधीकरण और जलाशयों के लिए विशिष्ट प्रबंधन ढांचे की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने उत्पादन प्रणालियों के क्लस्टर-आधारित संगठन, बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज सुनिश्चित करने तथा मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, स्टार्टअप्स और मत्स्य सहकारी समितियों सहित समुदायों की गहरी भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही।

संयुक्त सचिव श्री सागर मेहरा ने सभी उपस्थित हितधारकों का स्वागत किया और “मत्स्य पालन के लिए जलाशयों एवं अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास तथा तटीय मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण” विषय पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत के जलाशय विश्व स्तर पर सबसे बड़े अंतर्देशीय जल संसाधन हैं, जो मछली उत्पादन बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्री मेहरा ने स्पष्ट समय-सीमा और कार्य योजना के साथ एक विस्तृत कार्यान्वयन योजना प्रस्तुत की। इस पहल के अपेक्षित परिणामों में मछली उत्पादन में वृद्धि, मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप्स के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी शामिल है। उन्होंने बताया कि इस योजना से एक लाख आजीविका के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जो मत्स्य पालन को ग्रामीण समृद्धि के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित करेगा।

इस सत्र में देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से आए पैनलिस्टों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें शामिल थे - श्री दीपांकर मंडल (मंडल मानित एक्वा जेनेटिक्स, छत्तीसगढ़), डॉ. गौरी शंकर रथ (फाल्कन फीड, ओडिशा), श्री वेणुगोपाल पाणिग्रही (श्रेयश्री इंटीग्रेटेड फार्मिंग, ओडिशा), सुश्री स्नेहल वर्मा (नेचर डॉट्स), श्रीमती पॉलिना किस्कू (महिला स्वयं सहायता समूह, झारखंड), श्री सुवो सरकार (फिशमोंगर्स), श्री विजय पाल (उत्तर प्रदेश), श्री चंद्रसेन ईश्वर राव पाटिल (कोऑपरेटिव लीडर, महाराष्ट्र), श्री गणेश नखावा (ब्लूकैच, मुंबई), श्री हर्ष अग्रवाल (दास एंड कुमार) और सुश्री कादंबरी दुर्गा (माय भारत)। इसके अलावा, फील्ड लेवल के अनुभव साझा करने में झारखंड से सुश्री संगीता कैवर्त, रांची से श्री निशांत कुमार और उत्तर प्रदेश से श्री चंद्र प्रकाश ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस सत्र में मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला के चार प्रमुख क्षेत्रों—प्री-प्रोडक्शन, प्रोडक्शन, पोस्ट-प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी अपनाना —में 60 से अधिक सिफारिशें प्राप्त हुईं।

प्री-प्रोडक्शन स्टेज के लिए गुणवत्तापूर्ण ब्रूडस्टॉक और बीज उत्पादन हेतु स्टॉक सुधार/जेनेटिक सुधार कार्यक्रमों की स्थापना की सिफारिश की गई। इसके साथ ही क्षेत्रीय ब्रूड स्टॉक बैंकों, हैचरी क्लस्टर्स, सैटेलाइट नर्सरी और जलाशयों पर आधारित बीज-पालन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने निर्धारित आकार के प्रमाणित बीजों का उपयोग करके फिंगरलिंग की गुणवत्ता और स्टॉकिंग मानदंडों के मानकीकरण का सुझाव दिया। साथ ही, आनुवंशिक रूप से उन्नत प्रजातियों को प्राथमिकता देने और उचित नर्सरी पालन के साथ उच्च गुणवत्ता वाले बीज सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई। प्रोडक्शन स्टेज के लिए, मजबूत HDPE केज का उपयोग करके केज और पेन कल्चर के विस्तार की सिफारिश की गई। विकास को गति देने के लिए स्वचालित फीडिंग सिस्टम अपनाने, फार्म पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी, स्टॉकिंग डेंसिटी, ऑक्सीजन लेवल और स्ट्रेस इंडिकेटर की ट्रैकिंग को मजबूत करने का सुझाव दिया गया। इसके अतिरिक्त, महिला स्वयं सहायता समूहों, मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों और सहकारी समितियों को अधिक प्रभावी ढंग से भागीदारी करने के लिए सक्षम बनाने की सिफारिश की गई।

पोस्ट-प्रोडक्शन चरण के लिए कोल्ड चेन और लैंडिंग साइट (मछली उतारने के स्थान) के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की सिफारिश की गई। एफएसएसएआई के मानकों के अनुरूप परीक्षण और सत्यापित गुणवत्ता के माध्यम से ब्रांडिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, शहरी खरीदारों और संगठित ई-प्लेटफॉर्म/क्विक कॉमर्स के साथ सीधे जुड़ाव के माध्यम से बाजार पहुंच का विस्तार करने का सुझाव दिया गया। विशेषज्ञों ने मूल्यवर्धन इकाइयों, ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित करने और मछली कियोस्क की एक श्रृंखला स्थापित करने की भी सिफारिश की। तकनीक अपनाने के संबंध में, उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु-अनुकूल संचालन के लिए ट्रेसिबिलिटी, वास्तविक समय में पानी की गुणवत्ता की निगरानी और एआई, आईओटी तथा जियोस्पेशियल उपकरणों के उपयोग की सिफारिश की गई। दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटल हार्वेस्ट और लॉजिस्टिक्स सिस्टम विकसित करने तथा जलाशयों एवं अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास में मत्स्य पालन स्टार्टअप्स और उनके नवाचारों को शामिल करने का सुझाव दिया गया।

इन चर्चाओं से जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास में तेजी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही, स्टॉकिंग (बीज संचयन), केज और पेन कल्चर, बीज उत्पादन और समुदाय-आधारित एक्वाकल्चर मॉडल जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को मजबूती मिलेगी। ये विचार बेहतर एग्रीगेशन, कोल्ड-चेन पहुंच, प्रसंस्करण और ट्रेसिबिलिटी के माध्यम से तटीय मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को बढ़ाने के उपायों का मार्गदर्शन करेंगे। ये अंतर्दृष्टि मत्स्य पालन विभाग को समावेशी और सतत क्षेत्रीय विकास के लिए कार्यान्वयन ढांचे, समय-सीमा और निगरानी तंत्र को अंतिम रूप देने में सहायता प्रदान करेगी।

इस बजट-उपरांत वेबिनार में 15,000 से अधिक प्रतिभागियों की विशाल भागीदारी देखी गई। इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ-साथ नीति आयोग, भारतीय रिजर्व बैंक, नाफेड, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एनसीडीसी, एमपीईडीए, ईआईसी और आईसीएआर के मत्स्य पालन संस्थानों ने भाग लिया। साथ ही, मत्स्य पालन विभाग के अधीनस्थ कार्यालयों जैसे एफएसआई, सिफनेट, निफैट औरसीआईसीईएफ के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। वेबिनार में मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों, उद्योग संघों, मत्स्य सहकारी समितियों, स्टार्टअप्स, निर्यातकों, मत्स्य पालन संघों, मत्स्य महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, एसएफएसी और मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य प्रमुख हितधारकों ने सक्रिय रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

पृष्ठभूमि

भारत के विशाल जलीय इकोसिस्टम में 32 लाख हेक्टेयर जलाशय, 12 लाख हेक्टेयर खारा पानी, 68,000 से अधिक अमृत सरोवर और 11,099 किमी लंबी तटरेखा शामिल है, जो मत्स्य पालन के विस्तार के लिए अपार अवसर प्रदान करते हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जहाँ उत्पादन 197.75 लाख टन (2024–25) तक पहुँच गया है और यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 1.1 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। मत्स्य पालन विभाग पीएमएमएसवाय (प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना), एफआईडीएफ (मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड), पीएम-एमकेएसएसवाय (पीएम-मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना), केसीसी और मिशन अमृत सरोवर के साथ समन्वय के माध्यम से इस क्षेत्र को निरंतर सहायता प्रदान कर रहा है।

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