विद्युत मंत्रालय
नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण
प्रविष्टि तिथि:
09 MAR 2026 4:26PM by PIB Delhi
केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में तेजी ला रही है। इसके लिए हरित ऊर्जा गलियारे विकसित किए जा रहे है और अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणालियां विस्तारित की जा रही हैं। सरकार की वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट से अधिक और 2032 तक 600 गीगावाट (हरित ऊर्जा गलियारे-I और हरित ऊर्जा गलियारे-II सहित) से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता एकीकरण की योजना है। राष्ट्रीय विद्युत योजना (खंड-II पारेषण) के तहत, पारेषण नेटवर्क (220केवी और उससे अधिक) को 2031-32 तक 6.48 लाख सर्किट किलोमीटर तक विस्तारित किए जाने का अनुमान है, जिससे रूपांतरण क्षमता बढ़कर 2,345 गीगावोल्ट एम्पीयर हो जाएगी। अंतर-क्षेत्रीय पारेषण क्षमता को जनवरी 2026 तक 120 गीगावाट से बढ़ाकर 2032 तक 168 गीगावाट करने की योजना है।
नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं से जुड़ी पारेषण योजनाएं, इसकी क्षमता में वृद्धि के चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित दस राज्यों में दो चरणों, अर्थात् हरित ऊर्जा गलियारे-I और हरित ऊर्जा गलियारे-II के तहत 44 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के संचारण हेतु अंतर-राज्यीय पारेषण परियोजना योजना लागू कर रहा है। इसमें से 26 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा को एकीकृत कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, व्यापक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के लिए हरित ऊर्जा गलियारे-III योजना के तहत अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली पर विचार हो रहा है।
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से जुड़ी अनिश्चितता दूर करने के लिए, सरकार ग्रिड स्थिरता और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु ऊर्जा भंडारण और हाइब्रिड समाधानों के संयोजन को बढ़ावा दे रही है। नई ऊर्जा नीति (खंड-II पारेषण) के तहत, 35.6 गीगावाट पंप स्टोरेज परियोजनाओं के लिए 2031-32 तक की पारेषण प्रणाली की योजना तैयार कर ली गई है। इसके अतिरिक्त, 2025-26 से 2035-36 तक 100 गीगावाट पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (पीएसपी) प्राप्त करने के लिए पारेषण प्रणाली की पहचान/योजना बनाई गई है। योजना के अंतर्गत 2031-32 तक लगभग 47 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएस) को एकीकृत करने का विचार है। ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने और इसके समर्थन के लिए, सरकार लगभग 43.8 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए दो व्यवहार्यता अंतर निधि (वीजीएफ) योजना लागू कर रही है। इन्हें मार्च 2024 और जून 2025 में आरंभ किया गया था।
इसके अतिरिक्त, भारी उद्योग मंत्रालय उन्नत रसायन सेल बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम लागू कर रहा है। इसके तहत उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के अंतर्गत 18 हजार 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका उद्देश्य 50 गीगावाट बैटरी उत्पादन क्षमता स्थापित करना है, जिसमें ग्रिड-स्तरीय भंडारण के लिए 10 गीगावाट (एसीसी) शामिल है।
केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (तृतीय संशोधन) विनियम, 2025 के लिए सम्पर्क और सामान्य नेटवर्क पहुंच द्वारा सौर-घंटे और गैर-सौर-घंटे कनेक्टिविटी आरंभ की है, जिससे पारेषण बुनियादी अवसंरचना का महत्तम उपयोग हो सकेगा और सौर, पवन और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली को मिलाकर मिश्रित नवीकरणीय परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा। देशभर में रूफटॉप सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए, नवीन और नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय फरवरी 2024 से पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजी: एमबीवाई) लागू कर रहा है। इस योजना का लक्ष्य 75,021 करोड़ रुपये के व्यय से वित्तीय वर्ष 2026-27 तक आवासीय क्षेत्र के एक करोड़ घरों में रूफटॉप सौर ऊर्जा पैनल स्थापित करना है। सरकार ने पीएमएसजी: एमबीवाई के तहत देशभर में इसे अपनाने की प्रक्रिया सरल बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- आवेदन से लेकर सब्सिडी का वितरण राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से सीधे आवासीय उपभोक्ता के बैंक खाते में ऑनलाइन किया जाता है।
- राष्ट्रीयकृत बैंकों से रियायती ब्याज दर पर 10 वर्ष की अवधि के लिए बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध है। ऑनलाइन ऋण प्राप्त करने के लिए जनसमर्थ पोर्टल को योजना के राष्ट्रीय पोर्टल के साथ समेकित किया गया है।
- तकनीकी व्यवहार्यता की आवश्यकता समाप्त कर और 10 किलोवाट तक ऑटो लोड वृद्धि आरंभ करके नियामक अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
- योजना के तहत फरवरी 2026 तक रूफटॉप सोलर पैनल लगवाने से कुल 31.04 लाख परिवार लाभान्वित हुए हैं।
हरित ऊर्जा गलियारा योजना का विकास और अंतरराज्यीय पारेषण लाइन का विस्तार बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए आवश्यक आधार प्रदान कर रहे हैं। साथ ही, बीईएसईएस, पीएसपी और हाइब्रिड/चौबीसों घंटे चलने वाली नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने से ग्रिड में अनुकूलता बढ़ रही है, विद्युत की अनियमित आपूर्ति को नियंत्रित किया जा रहा है और प्रतिस्पर्धी मूल्य पर स्थिर और वितरण योग्य हरित ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। इसके अतिरिक्त सरलीकृत प्रक्रियाओं और वित्तीय प्रोत्साहनों द्वारा रूफटॉप सौर ऊर्जा प्रणालियों के लिए सरकार द्वारा दिया गया समर्थन किफायती वितरित उत्पादन को प्रोत्साहित कर रहा है और ग्रिड पर बोझ कम करने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े पारेषण तंत्रों की योजना पहले ही बना ली जाती है, और देश भर में बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के सुचारू एकीकरण को सुविधाजनक बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रिड को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। जनवरी 2026 तक, आरंभ की गई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 263 गीगावाट है। आगामी लगभग 207 गीगावाट पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता के एकीकरण के लिए, अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली नेटवर्क कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में है। इसके अलावा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की हरित ऊर्जा गलियारा योजना के तहत अंतर-राज्यीय नेटवर्क में लगभग 18 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के एकीकरण का विचार है। वर्ष 2030 तक लगभग 19 गीगावाट की अतिरिक्त जलविद्युत क्षमता प्राप्त करने की भी योजना है।
***.
पीके/केसी/एकेवी/जीआरएस
(रिलीज़ आईडी: 2237192)
आगंतुक पटल : 34