मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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मत्स्य अनुसंधान संस्थान और क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र

प्रविष्टि तिथि: 10 MAR 2026 1:57PM by PIB Delhi

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से दी गई रिपोर्ट के अनुसार देश भर में आठ विशिष्ट संसाधनों वाले मत्स्य अनुसंधान संस्थान संचालित होते हैं जिन्हें  विविध पारिस्थितिकी वाले क्षेत्रों में स्थित उनके अनुसंधान स्टेशनों और केंद्रों (तीस अनुसंधान स्टेशन/केंद्र) से सहयोग मिलता है (अनुलग्नक-1)।

(ख): आईसीएआर ने बताया है कि आंध्र प्रदेश में वर्तमान में चार क्षेत्रीय मत्स्य अनुसंधान केंद्र कार्यरत हैं। इनमें आईसीएआर-केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई) का काकीनाडा क्षेत्रीय केंद्र शामिल है जिसका बालाभद्रपुरम में एक फील्ड सेंटर भी है, विजयवाड़ा में आईसीएआर-केंद्रीय मीठे जल का मत्स्य पालन संस्थान (सीआईएफए) का क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, विशाखापत्तनम में आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) का क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र और विशाखापत्तनम में ही स्थित आईसीएआर-केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईएफटी) का क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र शामिल हैं। आईसीएआर ने यह भी बताया है कि आंध्र प्रदेश में आईसीएआर के अंतर्गत अतिरिक्त केंद्र स्थापित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

(ग): आईसीएआर के मत्स्य अनुसंधान संस्थानों ने राष्ट्रीय स्तर पर उपयुक्त प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं जो उत्पादकता, सतत जल उपयोग, प्रजाति और प्रणाली विविधीकरण, सस्ते फ़ीड, मछलियों के स्वास्थ्य प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार, एएमआर शमन, उत्तरदायित्वपूर्ण मत्स्य उद्योग और मूल्यवर्धन को सशक्त बनाती हैं।

आंध्र प्रदेश में विगत तीन वर्षों में उनका कार्य विशेष रूप से प्रभावशाली रहा है। आनुवंशिक रूप से उन्नत मीठे पानी की प्रजातियां जैसे जयंती रोहू, एएचआर जयंती रोहू, अमृत कैटला, महामगुर और सीआईएफए जीआई स्कैम्पी किसानों तक पहुंचाई गई हैं। व्यावसायिक स्तर पर उनकी स्वीकृति को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर-सीआईबीए और एनएफडीबी की ओर से मूलापोलम, श्रीकाकुलम में अति-गहन परिशुद्ध झींगा पालन पर प्रमुख पहल शुरू की गई है। किसानों और उद्यमियों के बीच पैंगेशियस प्रजनन और बीज उत्पादन प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया है जबकि पूर्वी गोदावरी में स्वदेशी सजावटी मछली प्रजनन का प्रदर्शन किया गया है। राज्य में विशेष रूप से श्रीकाकुलम में ग्रैसिलारिया सैलिकोर्निया और पी. वन्नामेई की सह-खेती सहित एकीकृत समुद्री शैवाल-झींगा शीतकालीन फसल को भी बढ़ावा दिया गया है जिससे विविधीकरण को बढ़ावा मिला है और तटीय क्षेत्रों में आजीविका की स्थिति मजबूत हुई है।

(घ): आंध्र प्रदेश सरकार ने बताया है कि राज्य ने मत्स्यपालन को विनियमित करने और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण अधिनियम बनाए हैं जिनमें आंध्र प्रदेश राज्य मत्स्यपालन विकास प्राधिकरण अधिनियम 2020 भी शामिल है। सरकार पीएमएमएसवाई के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम, क्षेत्र प्रदर्शन, किसान क्षेत्र विद्यालय, एक्सपोजर विजिट और क्षमता निर्माण पहल आयोजित करती है। तकनीकी साहित्य और सलाह के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई जाती है जिसे आईसीएआर के क्षेत्रीय केंद्रों, राज्य मत्स्य विभाग, मत्स्य विश्वविद्यालय और आंध्र प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से लागू किया जाता है। आईसीएआर ने यह भी बताया है कि उसके मत्स्य अनुसंधान संस्थान और केंद्र अन्य सरकारी विभागों/एजेंसियों के साथ मिलकर मत्स्य पालन और मत्स्यपालन के विभिन्न पहलुओं में आवश्यकता-आधारित प्रौद्योगिकियों का विकास और प्रसार कर रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में आंध्र प्रदेश सहित 40,000 से अधिक हितधारकों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और प्रदर्शन की व्यवस्था की गई है।

(ई): आंध्र प्रदेश सरकार ने बताया है कि मत्स्य विभाग सार्वजनिक-निजी अनुसंधान भागीदारी के लिए राज्य के विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के साथ सहयोग करता है। मत्स्य विभाग जलीय पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, रोग निदान और निर्यात मानकों के अनुपालन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय जलीय पशु रोग निगरानी कार्यक्रम (एनएसपीएएडी) और राष्ट्रीय अवशेष नियंत्रण कार्यक्रम (एनआरसीपी) जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ काम करता है। इसके अतिरिक्त, काकीनाडा स्थित राज्य मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (एसआईएफटी) के माध्यम से यह प्रौद्योगिकी सत्यापन, उच्च गुणवत्ता वाली मछलियों के उत्पादन और विकास, कौशल विकास और सर्वोत्तम तौर-तरीकों को अपनाने के लिए आईसीएआर के संस्थानों, राज्य मत्स्य विश्वविद्यालय और निजी संस्थाओं के साथ साझेदारी करता है।

अनुलग्नक- 1

' मत्स्य पालन अनुसंधान संस्थान और क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र' संबंधी विवरण:

संस्थान

प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य

मुख्यालय

क्षेत्रीय/अनुसंधान केंद्र

सम विश्वविद्यालय

  1. केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान (सीआईएफई), मुंबई

महाराष्ट्र

  • मध्य प्रदेश (पोवारखेड़ा)
  • आंध्र प्रदेश (काकीनाडा)
  • हरियाणा (रोहतक)
  • पश्चिम बंगाल (कोलकाता)
  • बिहार (मोतीपुर)

अनुसन्धान संस्थान

  1. केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई), कोच्चि

केरल

  • तमिलनाडु (मंडपम, चेन्नई और तूतीकोरिन)
  • आंध्र प्रदेश (विशाखापत्तनम)
  • गुजरात (वेरावल)
  • महाराष्ट्र (मुंबई)
  • कर्नाटक (कारवार और

मैंगलोर)

  • केरल (कालीकट और विझिंजम)
  • पश्चिम बंगाल (दीघा)
  1. केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई), कोलकाता

पश्चिम बंगाल

  • कर्नाटक (बैंगलोर)
  • उत्तर प्रदेश (इलाहाबाद)
  • असम (गुवाहाटी)
  1. केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईएफटी), कोच्चि

केरल

  • महाराष्ट्र (मुंबई)
  • आंध्र प्रदेश (विशाखापत्तनम)
  • गुजरात (वेरावल)
  1. केंद्रीय मीठे जल का मत्स्य पालन संस्थान (सीआईएफए), भुवनेश्वर

ओडिशा

  • कर्नाटक (बैंगलोर)
  • पश्चिम बंगाल (राहड़ा)
  • आंध्र प्रदेश (विजयवाड़ा)
  • पंजाब (बठिंडा)
  1. सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रैकिशवाटर एक्वाकल्चर (सीआईबीए), चेन्नई

तमिलनाडु

  • पश्चिम बंगाल (काकद्वीप)
  • गुजरात (नवसारी)
  1. केंद्रीय शीतजल मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईसीएफआर), भीमताल

उत्तराखंड

  • उत्तराखंड के चंपावत में प्रायोगिक केंद्र
  1. राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएफजीआर), लखनऊ

उतार प्रदेश।

  • केरल (कोच्चि)

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने आज लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

 

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पीके/केसी/केके/एसके


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