पंचायती राज मंत्रालय
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अच्छा काम करने वाली पंचायतें

प्रविष्टि तिथि: 10 MAR 2026 3:53PM by PIB Delhi

पंचायती राज मंत्रालय ने 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को 9 विषयों में समेकित करके, पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। जमीनी स्तर पर एलएसडीजी के कार्यान्वयन की प्रक्रिया को मापने के लिए, मंत्रालय ने नौ विषयों में ग्राम पंचायतों/ग्राम पंचायतों के समकक्षों के क्रमिक कार्य-निष्पादन को मापने के लिए एक समग्र मूल्यांकन फ्रेमवर्क के रूप में पंचायत विकास सूचकांक (पीएआई) तैयार किया है। पीएआई के अंतर्गत स्कोरकार्ड और डैशबोर्ड के माध्यम से विषयवार तथा समग्र अंक प्रदान किए जाते हैं, जिससे पंचायत स्तर पर प्रदर्शन की कमियों, तुलनात्मक मजबूत पक्षों तथा विशेष ध्यान देने वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है। पीएआई राज्य में नौ विषयों के अंतर्गत मापने योग्य संकेतकों पर कार्य-निष्पादन का मूल्यांकन करने के लिए एक साक्ष्य-आधारित फ्रेमवर्क प्रदान करता है, और पीएआई स्कोर के आधार पर ग्राम पंचायतों को पांच श्रेणियों के अंतर्गत अर्थात् अचिवर(क+), फ्रन्ट रनर (क: 75 से 90 से कम), परफ़ॉर्मर (ख: 60 से 75 से कम), ऐस्पीरन्ट (ग: 40 से 60 से कम) और बीगिनर (घ: 0 से 40 से कम) श्रेणियों में वर्गीकृत करता है।

जहां तक कुपोषण मुक्त भारत की दिशा में प्रगति को तेज करने के लिए 1,000 उच्च कार्य-निष्पादन करने वाली ग्राम पंचायतों की पहचान करने का संबंध है, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) ने 26 दिसंबर 2024 को सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान शुरू किया, जो पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन से डेटा के आधार पर उच्च कार्य-निष्पादन करने वाली ग्राम पंचायतों की पहचान करता है और उन्हें प्रोत्साहित करता है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने कार्यात्मक आंगनवाड़ी केंद्र, लाभार्थी कवरेज, बुनियादी अवसंरचना और विकास मापन कार्यदक्षता से संबंधित विशिष्ट पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले अपने 10% तक के ग्राम पंचायतों को शीर्ष 1,000 योग्य ग्राम पंचायतों के चयन के लिए नामित किया। 

प्रोत्साहन, मान्यता और सहायता: पीएआई (PAI) स्कोर राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को एलएसडीजी के नौ विषयों में श्रेष्ठ कार्य करने वाले ग्राम पंचायतों को पहचानने में मदद करते हैं, ताकि उन्हें बढ़ावा दिया जा सके और सम्मानित किया जा सके।

सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान के तहत शीर्ष 1,000 योग्य ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन अनुदान दिया जाता है, जिसे 25% आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को, 25% सामुदायिक जागरूकता और लाभार्थी नामांकन के लिए, तथा 50% पोषण-केंद्रित आंगनवाड़ी केंद्र की गतिविधियों, जैसे पोषण वाटिका और पूरक पोषण को मजबूत करने के लिए आवंटित किया जाता है।

पोषण और अवसंरचना के परिणामों में मापन योग्य सुधार: एलएसडीजी फ्रेमवर्क में, विषय 2: स्वस्थ पंचायत में गांव के लोगों की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े पहलुओं को शामिल किया गया है, और विषय 6: आत्मनिर्भर बुनियादी अवसंरचना वाली पंचायत में गांव की बुनियादी आवश्यकताओं पर फोकस किया गया है, जिसमें ग्रामीण कनेक्‍टिविटी, सामाजिक संस्थाएँ, ग्राम पंचायत भवन और उपयोगिता केंद्र आदि शामिल हैं। पीएआई अपने विषयगत और समग्र स्कोर के ज़रिए, नौ विषयों के तहत मापने योग्य संकेतकों पर साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन फ्रेमवर्क प्रदान करता है, जिसमें स्वास्थ्य/ पोषण और अवसंरचना से जुड़े विषय शामिल हैं, जिससे पंचायत स्तर पर कार्य-निष्पादन में अंतर और उन क्षेत्रों की पहचान हो पाती है जिन पर फोकस करने की ज़रूरत है।

सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान के तहत, मूल्यांकन फ्रेमवर्क परिणाम-उन्मुख और डेटा-संचालित है तथा यह कुपोषण संकेतकों (गंभीर तीव्र कुपोषण, मध्यम स्तर का तीव्र कुपोषण, बौनापन, कम वजन), मातृ पोषण, पूरक पोषण कवरेज, आंगनवाड़ी केंद्र अवसंरचना और विकास निगरानी कार्यदक्षता में सुधार को मापता है।

सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों का विस्तार: पीएआई, एलएसडीजी के नौ विषयों पर ग्राम पंचायतों के बीच परस्पर शिक्षण और शिक्षण के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायतों की सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों को प्रोत्‍साहन देने के लिए एक फ्रेमवर्क प्रदान करता है।

इसके अतिरिक्त, सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान के अंतर्गत केवल मान्यता प्रदान करने के अलावा यह पहल सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है, सतत पोषण प्रथाओं को प्रोत्साहित करती है तथा श्रेष्ठ प्रथाओं के दस्तावेजीकरण और उनके व्यापक स्तर पर प्रसार को बढ़ावा देती है, ताकि उन्हें अन्य स्थानों पर भी लागू किया जा सके।

यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 10 मार्च 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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