मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात

प्रविष्टि तिथि: 10 MAR 2026 1:37PM by PIB Delhi

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में जानकारी दी कि भारत से समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात मूल्य के हिसाब से वर्ष 2020-21 के 43,720.98 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 62,408.45 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो लगभग 42.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार, निर्यात मात्रा वर्ष 2020-21 में 11.49 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 16.98 लाख मीट्रिक टन पहुंच गई, जो लगभग 47.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। अमेरिका को समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात मूल्य के हिसाब से वर्ष 2020-21 में 17,990.40 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 22,722.69 करोड़ रुपये हो गया है और मात्रा अनुसार वर्ष 2020-21 में 2.91 लाख मीट्रिक टन बढ़कर वर्ष 2024-25 में 3.46 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया। समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात का पिछले पांच वर्षों का विवरण, राज्यवार और बाजारवार, क्रमशः अनुलग्नक I और अनुलग्नक II में प्रस्तुत है।

(ग) तमिलनाडु का समुद्री खाद्य प्रदार्थ क्षेत्र राज्य की तटीय अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है। वहां झींगा पालन और इनका निर्यात रोजगार और आय सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वहां बड़ी संख्या में तटीय परिवार आजीविका के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य पालन, प्रसंस्करण और निर्यात गतिविधियों पर निर्भर हैं । तमिलनाडु ने वर्ष 2024-25 में 5,744.56 करोड़ रुपये मूल्य के 1,07,659 मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात की तुलना में वर्ष 2025-26 (अप्रैल से जनवरी, अनंतिम ) के दौरान, तमिलनाडु ने 6,323.79 करोड़ रुपये मूल्य के 1,25,332 मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया। यह वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद राज्य के समुद्री खाद्य क्षेत्र की निरंतर मजबूती वृद्धि को दर्शाता है।

(घ) सरकार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मांग में उतार-चढ़ाव, कीमतों में अस्थिरता और बढ़ते उत्पादन लागत से झींगा निर्यात क्षेत्र की चुनौतियों से अवगत है। भू-राजनीतिक परिवर्तनों और आयात करने वाले देशों द्वारा लगाए गए शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं के बावजूद, अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान भारत के झींगा निर्यात में मात्रा और मूल्य दोनों में 2024-25 की इस अवधि की तुलना में बढ़ोतरी हुई है । यह झींगा निर्यात में निरंतर सकारात्मक वृद्धि दर्शाता है। पिछले दो वर्षों और अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान जमाए गए झींगा निर्यात का विवरण नीचे प्रस्तुत है:

पदार्थ

 

2023-24

2024-25

2025-26*
(अप्रैल-जनवरी)

2024-25
(अप्रैल-जनवरी)

फ्रोजन (जमाए हुए)

झींगा

क्यू

716004

741529

659600

622182

वी

40013.54

43334.25

41018.30

36029.38

*अस्थायी ( स्रोत: समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण -एमपीईडीए )

समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देने और उसकी वृद्धि जारी रखने के लिए, केंद्र सरकार के मत्स्य विभाग ने हितधारकों के साथ कई परामर्श और आवश्यक बैठकें की हैं। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप द्वीप समूह में निवेशक सम्मेलन, तटीय राज्य मत्स्य सम्मेलन, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि सम्मेलन, समुद्री खाद्य निर्यातक सम्मेलन और "भारत का नीला रूपांतरण: समुद्री खाद्य निर्यात में मूल्यवर्धन सुदृढ़ीकरण" विषय पर विश्व मत्स्य दिवस आयोजन शामिल है। इसी सिलसिले में 39 देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ समुद्री खाद्य निर्यात प्रोत्साहन पर गोलमेज सम्मेलन भी आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य राजनयिक संबंध सुदृढ़ करना, सतत मत्स्य पालन में सहयोग को बढ़ावा देना, व्यापारिक संबंधों को बढ़ाना और मत्स्य पालन और जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों और उभरते क्षेत्रों को आगे बढ़ाना था। सरकार समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख आयातकों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित करती है। वैश्विक स्तर पर भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए, सरकार नियमों में संशोधन, आयात सुव्यवस्थित कर और प्रमुख जलीय आहार सामग्री, जलीय कृषि लागत और मछली प्रसंस्करण सामग्री पर आयात शुल्क घटा कर व्यापार सुगम बना रही है। इसके अतिरिक्त, समुद्री खाद्य पदार्थ निर्यात में मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए, सरकार ने हाल के बजट में समुद्री खाद्य प्रसंस्करण में उपयोग होने वाले कुछ विशिष्ट लागत सामग्री की शुल्क-मुक्त आयात सीमा पिछले वर्ष के फ्रेट ऑन बोर्ड -एफओबी निर्यात मूल्य के 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दिया है। सतत विकास प्रयासों के तहत, केंद्र सरकार का मत्स्य विभाग ट्रॉल नेट में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (ट्रॉल जालों में लगी एक विशेष जालीनुमा ग्रिड जो मछलियों/झींगों को रोककर कछुओं को बाहर निकलने का रास्ता देती है) लगाने को बढ़ावा दे रहा है, समुद्री स्तनधारी परियोजना का समर्थन कर रहा है तथा एंटीबायोटिक अवशेष नियंत्रण मजबूत करने के साथ ही व्यापक ट्रेसिबिलिटी फ्रेमवर्क शुरू कर रहा है जो डिजिटल प्रणाली मछली उत्पादन को 'जलीय स्रोत/समुद्र से प्लेट तक' ट्रैक करती है, जिससे खाद्य सुरक्षा, पारदर्शिता, गुणवत्ता और निर्यात में वृद्धि होगी)। साथ ही, अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप द्वीपों में उच्च मूल्य वाले निर्यात-उन्मुख मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन संबंधी नियम, 2025 अधिसूचित किए गए हैं।

केंद्र सरकार के मत्स्य विभाग की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) और मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) जलीय कृषि के विस्तार, प्रौद्योगिकी युक्त प्रणाली, रोग प्रबंधन, आधुनिक उत्पादन उपरांत अवसंरचना और मछली प्रसंस्करण सुविधाओं को बढ़ावा देते हैं जिससे उत्पादन, उत्पादकता और मूल्यवर्धन में वृद्धि हो सके। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने समुद्री उत्पादों के निर्यात को सुगम बनाने के लिए समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) की स्थापना की है। एमपीईडीए ब्रांड प्रचार, निर्यातकों के पंजीकरण और आयातकों के साथ संपर्क द्वारा भारतीय मत्स्य उत्पादों को बढ़ावा दे रहा है। वह प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान, कार्यशालाओं और चिंतन शिविरों द्वारा उद्योग की क्षमता बढ़ाता है । एमपीईडीए नए बाजारों की खोज के लिए, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेता है, क्रेता-विक्रेता बैठकें (बीएसएम) और विपरीत क्रेता-विक्रेता बैठकें (रिवर्स बायर-सेलर मीट) आयोजित करता है और इस हेतु विदेशों में भारतीय दूतावासों के साथ सहयोग करता है। अंतर्राष्ट्रीय मानक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए, वाणिज्य विभाग का निर्यात निरीक्षण परिषद समूचे मूल्य श्रृंखला से संबंधित हितधारकों के लिए समय-समय पर जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।

अनुलग्नक I और II लगाएं

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पीके/केसी/एकेवी /केएस


(रिलीज़ आईडी: 2237520) आगंतुक पटल : 41
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