सहकारिता मंत्रालय
सहकारी बीमा
प्रविष्टि तिथि:
10 MAR 2026 5:11PM by PIB Delhi
बीमा प्रसार एवं वित्तीय समावेशन में सहकारी समितियों की भूमिका को सुदृढ़ करने हेतु, “वर्ष 2047 तक सबके लिए बीमा” के लक्ष्य तथा “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण के अनुरूप, सहकारिता मंत्रालय द्वारा एक विशेष अभियान चलाया गया है।
इस अभियान के अंतर्गत सहकारी बैंकों को कॉरपोरेट एजेंट के रूप में पंजीकृत होकर बीमा उत्पादों के वितरण हेतु सक्षम बनाया जा रहा है, जिससे विशेषकर ग्रामीण, अर्ध-शहरी एवं वंचित क्षेत्रों में अंतिम छोर तक पहुंच सुदृढ़ हो।
इसके अतिरिक्त, सहकारिता मंत्रालय ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के लिए मॉडल उपविधियाँ तैयार कर सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को प्रसारित की हैं। परिणामस्वरूप, PACS को बीमा उत्पादों के वितरण का कार्य करने हेतु सक्षम बनाया गया है। PACS कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में भी कार्य कर रही हैं तथा जमीनी स्तर पर विभिन्न बीमा उत्पादों के वितरण में सहयोग कर रही हैं। दिनांक 24 फरवरी, 2026 तक देश में 52,369 PACS कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में सक्रिय हैं।
इसके अतिरिक्त, IRDAI के अनुसार दिनांक 03 मार्च, 2026 तक 150 से अधिक सहकारी बैंक एवं समितियाँ बीमा उत्पादों के वितरण हेतु कॉरपोरेट एजेंट के रूप में पंजीकृत हैं।
सहकारी बैंक 22 करोड़ से अधिक जमा खातों का संचालन करते हैं तथा PACS के माध्यम से 13 करोड़ से अधिक कृषक सदस्य जुड़े हुए हैं, जिससे मजबूत जमीनी उपस्थिति एवं व्यापक पहुंच सुनिश्चित होती है।
बीमा अधिनियम, 1938, जिसे “सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025” द्वारा संशोधित किया गया है, निम्नलिखित अधिनियमों के अंतर्गत पंजीकृत सहकारी समितियों को भारत में बीमा सहकारी समिति स्थापित करने हेतु पात्र इकाई के रूप में मान्यता प्रदान करता है:
(i) सहकारी समितियाँ अधिनियम, 1912 के प्रावधान;
(ii) किसी राज्य में सहकारी समितियों से संबंधित वर्तमान में प्रभावी अन्य कानून/विधि; अथवा
(iii) बहु-राज्य सहकारी समितियाँ अधिनियम, 2002 के प्रावधान।
अतः IRDAI (कॉरपोरेट एजेंटों का पंजीकरण) विनियम, 2015 के प्रावधानों के अनुसार सहकारी समितियों को कॉरपोरेट एजेंट के रूप में पंजीकरण की अनुमति है तथा वे बीमा उत्पादों का वितरण कर सकती हैं।
IRDAI द्वारा डिजिटलीकरण एवं इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसी सेवा को प्रोत्साहित करने हेतु विनियम जारी किए गए हैं, जिससे कॉरपोरेट एजेंट के रूप में कार्यरत सहकारी संस्थाएँ बीमाकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म का उपयोग कर निर्बाध पंजीकरण एवं पॉलिसी सेवा प्रदान कर सकें।
इसके अतिरिक्त, सहकारिता मंत्रालय ने ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए सहकार सारथी प्राइवेट लिमिटेड (SSPL) तथा शहरी सहकारी बैंकों के लिए राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम (NUCFDC) की स्थापना को प्रोत्साहित किया है। ये संस्थाएँ सहकारी बैंकों के तकनीकी उन्नयन, क्षमता निर्माण तथा प्रणाली एकीकरण में सहयोग प्रदान करती हैं, जिससे वे प्रभावी रूप से बीमा उत्पादों के वितरक के रूप में कार्य कर सकें।
कॉरपोरेट एजेंट के रूप में पंजीकृत सहकारी संस्थाओं के कर्मचारियों हेतु व्यावसायिक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण तथा IRDAI मान्यता प्राप्त संस्थानों, जैसे भारतीय बीमा संस्थान, से प्रमाणन प्राप्त करना आवश्यक है।
यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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AK/AP
(रिलीज़ आईडी: 2237673)
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