वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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भारत-ईएफटीए टीईपीए समझौते के दो वर्ष पूरे हुए; व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी संबंधी सहयोग को मजबूती मिली


भारत ने 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते का एक रणनीतिक नेटवर्क बनाया है, जिससे वैश्विक बाजार तक पहुंच का विस्तार हुआ है: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी

भारत-ईएफटीए टीईपीए समझौते ने उच्च आय वाले बाजारों के द्वार खोले और अगले 15 वर्षों में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा

भारत-ईएफटीए टीईपीए ने महिलाओं, युवाओं, किसानों और एमएसएमई को वैश्विक बाजारों से जोड़ते हुए समावेशी विकास को बढ़ावा दिया

प्रविष्टि तिथि: 10 MAR 2026 2:43PM by PIB Delhi

भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के सदस्य देशों, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे तथा स्विट्जरलैंड के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) पर हस्ताक्षर किए जाने के दो वर्ष बाद, यह साझेदारी 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी रूप से बातचीत के स्तर से कार्यान्वयन की दिशा में अग्रसर हो गई है। यह समझौता भारत और उन्नत यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं के एक समूह को एक ऐसे ढांचे में एक साथ लाता है जो व्यापार, निवेश, सेवाओं, प्रौद्योगिकी संबंधी सहयोग और दीर्घकालिक औद्योगिक विकास को समर्थन प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा: पिछले कुछ वर्षों में, हमने मुक्त व्यापार समझौतों का एक रणनीतिक और उद्देश्यपूर्ण नेटवर्क बनाया है। अब हमारे 38 साझेदार देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते हैं, जो भारतीय व्यापार के इतिहास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। इन व्यापार समझौतों की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि ये विभिन्न महाद्वीपों तक फैले हुए हैं और इनमें विभिन्न आर्थिक शक्तियों वाले देश शामिल हैं। इससे हमारे निर्माताओं और उत्पादकों को विभिन्न बाजारों में अपने उत्पादों को बेचने हेतु पर्याप्त विविधता और क्षमता मिलती है। हमारा सेवा क्षेत्र और इसके पेशेवर विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं। उन्होंने पहले ही भारत को विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित वैश्विक क्षमता केन्द्रों का हब बना दिया है। इन व्यापार समझौतों ने हमारे विभिन्न साझेदार देशों में नियामकीय निश्चितता, पारस्परिक रूप से लाभकारी ढांचों और अधिक गतिशीलता के साथ उनके अवसरों को और अधिक बढ़ावा दिया है। हमारा मैन्यूफैक्चरिंग  क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है और ये व्यापार समझौते भारत व भारतीय उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और अधिक गहराई से समाहित करने में मदद करेंगे। इनसे भारतीय उत्पादकों और निर्माताओं को बेहतर लाभ मिलेगा और साथ ही हमारे लोगों की समृद्धि में भी वृद्धि होगी।

दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर, केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा, “भारत-ईएफटीए टीईपीए एक दीर्घकालिक आर्थिक उद्देश्य वाला समझौता है। यह भारतीय निर्यातकों को उच्च आय वाले बाजारों तक पहुंच प्रदान करता है, 15 वर्षों में 100 बिलियन  अमेरिकी डॉलर के निवेश का मार्ग प्रशस्त करता है और विशेष मशीनरी, गुणवत्तापूर्ण इनपुट एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी तक पहुंच को बेहतर बनाता है जो भारत में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को मजबूत कर सकता है। यह उत्पादन बढ़ाने, मानकों में सुधार करने, मूल्यवर्धन को गहरा करने और भारत के 2030 के निर्यात संबंधी लक्ष्य की ओर बढ़ने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

भारत-ईएफटीए टीईपीए समझौता उच्च आय वाले और नवाचार से प्रेरित अर्थव्यवस्थाओं के समूह के साथ हुए भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों में से एक है। ईएफटीए की प्रतिबद्धताएं 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कवर करती हैं, जो भारत के निर्यात का 99.6 प्रतिशत है। इसमें गैर-कृषि उत्पादों का पूर्ण कवरेज और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों पर टैरिफ संबंधी रियायतें शामिल हैं। भारत की प्रतिबद्धताएं 82.7 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कवर करती हैं, जो ईएफटीए के निर्यात का 95.3 प्रतिशत है। डेयरी, सोया, कोयला और चुनिंदा कृषि उत्पादों सहित संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण प्राप्त है, जबकि सोना पर प्रभावी शुल्क अपरिवर्तित है।

भारत की दृष्टि से, टीईपीए का महत्व बाजार की सुलभता और क्षमता के विकास, दोनों में निहित है। यह समझौता उच्च क्रय शक्ति वाले बाजारों में भारत की निर्यात से जुड़ी उपस्थिति को मजबूत करता है और फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग के सामान, रसायन, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और समुद्री उत्पादों सहित विभिन्न क्षेत्रों में बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं को सुनिश्चित करता है। साथ ही, यह विशिष्ट मध्यवर्ती वस्तुओं, उन्नत मशीनरी, सटीकता संबंधी घटकों और चुनिंदा उच्च-मानक वाले औद्योगिक उत्पादों की सुलभता को बेहतर करता है जो उत्पादन संबंधी क्षमता, उत्पादों की गुणवत्ता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण में सहायक साबित हो सकते हैं।

यह भारत के औद्योगिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों और विशेष इनपुट तक बेहतर पहुंच से भारतीय उद्यमों को मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी प्रक्रियाओं को उन्नत करने, लागत संबंधी अनावश्यक नुकसानों को कम करने, मानकों के अनुपालन में सहायता करने और निर्यात-उन्मुख उत्पादन के नेटवर्क में भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। विश्वसनीयता, पता लगाने की क्षमता और गुणवत्ता जिन क्षेत्रों में बाजार की हिस्सेदारी को निर्धारित करते हैं, वहां इस प्रकार के सुधार भारतीय उद्योग के लिए निर्यात से जुड़े व्यापक लाभ सुनिश्चित करते हैं।

टीईपीए भारत की 2030 तक की व्यापार से जुड़ी व्यापक महत्वाकांक्षा को भी समर्थन प्रदान करता है। सरकार ने 2030 तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के माल के निर्यात और एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के सेवाओं के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है। टीईपीए उन्नत बाजारों तक पूर्वानुमानित पहुंच को निवेश-आधारित क्षमता निर्माण और मजबूत औद्योगिक संबंधों के साथ जोड़कर इस उद्देश्य में योगदान देता है।

इस समझौते में 15 वर्षों में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता और दस लाख प्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन को शामिल किया गया है। निवेश का यह आयाम व्यापार की संभावनाओं को मैन्यूफैक्चरिंग संबंधी क्षमता, प्रौद्योगिकी से जुड़ी साझेदारी, अनुसंधान एवं विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, जीवन विज्ञान, इंजीनियरिंग और डिजिटल बदलाव से जोड़कर टीईपीए को एक व्यापक आर्थिक भूमिका प्रदान करता है।

टीईपीए सेवाओं के क्षेत्र में भी नए अवसरों के द्वार खोलता है। यह आईटी और आईटी-आधारित सेवाओं, पेशेवर सेवाओं और अन्य ज्ञान-प्रधान क्षेत्रों में मजबूत सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करता है। यह नर्सिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और आर्किटेक्चर जैसी चिन्हित पेशेवर सेवाओं में पारस्परिक मान्यता समझौतों को संभव बनाता है और सेवाओं की आपूर्ति से जुड़े प्रमुख कर्मियों के प्रवेश और अस्थायी प्रवास के संबंध में अधिक निश्चितता प्रदान करता है।

इस समझौते में समावेशी विकास का एक आयाम भी शामिल है। महिलाओं एवं युवा उद्यमियों, किसानों, मछुआरों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्टअप को यूरोपीय बाजारों तक पहुंच से लाभ होगा। महाराष्ट्र में अंगूर, कर्नाटक में कॉफी, केरल में मसाले एवं  समुद्री भोजन तथा पूर्वोत्तर राज्यों में बागवानी सहित विभिन्न भारतीय राज्यों में अवसरों का विस्तार होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय उत्पादक वैश्विक बाजारों से और अधिक निकटता से जुड़ सकेंगे।

जैसे-जैसे कार्यान्वयन आगे बढ़ेगा, भारत और ईएफटीए के सदस्य देश संस्थागत तंत्रों, व्यावसायिक सहयोग और हितधारकों के साथ परामर्श के जरिए इस समझौते को मजबूत व्यापार प्रवाह, सार्थक निवेश और घनिष्ठ आर्थिक सहयोग में परिणत करने हेतु निरंतर प्रयासरत रहेंगे। टीईपीए निर्यात के विस्तार, घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को सुदृढ़ करने, भारतीय कंपनियों को उन्नत मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के व्यापक सपने को साकार करने के साधन के रूप में व्यापार नीति के प्रति भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है।

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पीके/केसी/आर 


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