रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : उर्वरक विभाग
भारतीय कृषि में पोषक तत्त्व उपयोग दक्षता: नाइट्रोजन 30–45%, फॉस्फोरस 15–25%, पोटैशियम 50–60% — संतुलित उपयोग और अधिक कृषि लाभ पर सरकार का जोर: श्रीमती अनुप्रिया पटेल
आईसीएआर ने पोषक तत्त्व असंतुलन के कारण उर्वरकों के प्रति घटती प्रतिक्रिया के रुझानों को रेखांकित किया; दक्षता में सुधार और मूल्य संवर्धन हेतु पहलें जारी हैं
प्रविष्टि तिथि:
10 MAR 2026 5:47PM by PIB Delhi
पोषक तत्त्व उपयोग दक्षता (न्यूट्रिएंट यूज़ एफिशिएंसी - एनयूई) से अभिप्राय उस अनुपात से है, जिसमें उर्वरकों के रूप में डाले गए पोषक तत्त्वों को फसलें प्रभावी रूप से अवशोषित कर अपने विकास और उपज के लिए उपयोग करती हैं। एनयूई का स्तर अनेक कारकों से प्रभावित होता है, जिनमें फसल का प्रकार, मृदा की स्थिति, कृषि-जलवायु संबंधी विविधताएँ, उर्वरक का स्रोत तथा उसके प्रयोग की विधियाँ, सिंचाई पद्धतियाँ तथा समग्र फसल प्रबंधन शामिल हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा अन्य अनुसंधान संस्थानों द्वारा किए गए प्रायोगिक अध्ययनों के अनुसार भारत में एनयूई का अनुमानित स्तर सामान्यतः नाइट्रोजन (एन) के लिए 30–45 प्रतिशत, फॉस्फोरस (पी) के लिए 15–25 प्रतिशत तथा पोटैशियम (के) के लिए 50–60 प्रतिशत आंका गया है।
फार्म स्तर पर मूल्य संवर्धन के संदर्भ में, कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों से औसत सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) का अनुमान लगभग ₹2–3 लाख प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष लगाया जाता है, हालांकि इसमें फसलों, क्षेत्रों तथा बाज़ार परिस्थितियों के अनुसार व्यापक रूप से भिन्नता पाई जाती है। बागवानी फसलें सामान्यतः अनाज की फसलों की तुलना में प्रति हेक्टेयर कहीं अधिक मूल्य संवर्धन उत्पन्न करती हैं। सरकार निम्नलिखित प्रमुख योजनाओं के माध्यम से मूल्य संवर्धन को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है:
- प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (पीएमकेएसवाई)
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (पीएलआईएसएफपीआई)
- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमई)
- आईसीएआर ने अवगत कराया है कि समय के साथ यह अनुपात मृदा में पोषक तत्त्वों के असंतुलन, नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग तथा मृदा में कार्बनिक पदार्थ की कमी जैसे कारकों के कारण फसलों पर इन उर्वरकों के असर की घटती प्रवृत्ति दर्शाता रहा है। विभिन्न क्षेत्रीय प्रयोगों से संकलित प्रायोगिक परिणामों के आधार पर, हाल के वर्षों में देश में उर्वरक-से-अनाज पर असर का अनुपात प्रति किलोग्राम प्रयुक्त उर्वरक पर लगभग 9.55 से 11.05 किलोग्राम अनाज के बीच रहा है।
वर्ष 2025 (जनवरी–दिसंबर) के दौरान सब्सिडी युक्त यूरिया की कुल बिक्री 399.40 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) रही।
आईसीएआर ने अवगत कराया है कि सामान्य न्यूट्रिएंट यूज़ एफिशिएंसी (एनयूई) स्तर (एन: 30–45%, पी: 15–25%, के: 50–60%) के आधार पर डाले गए उर्वरकों का एक महत्वपूर्ण भाग फसलों द्वारा तत्काल उपयोग नहीं किया जाता। शेष पोषक तत्त्व लीचिंग, वाष्पीकरण तथा बहाव के माध्यम से नष्ट हो सकते हैं या मृदा में अवशिष्ट अथवा स्थिरित पोषक तत्त्वों के रूप में संचित रहकर आगामी फसलों के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।
यह जानकारी आज राज्य सभा में एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री, श्रीमती अनुप्रिया पटेल द्वारा प्रदान की गई।
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पीके/केसी/पीके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2237805)
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