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ईएएसई 8.0 सुधार एजेंडा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के रूपांतरण को आगे बढ़ाता है


ईएएसई राइज सुधार चार प्रमुख विषयों—जोखिम प्रबंधन और लचीलापन, नवाचार, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव तथा उत्कृष्टता—पर केंद्रित थे

सुधारों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल ऋण, एआई को अपनाना, वित्तीय समावेशन और परिचालन उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित करना है ताकि लचीले व ग्राहक-केंद्रित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बनाए जा सकें

प्रविष्टि तिथि: 10 MAR 2026 3:30PM by PIB Delhi

ईएएसई सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ग्राहक शिकायत निवारण, परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार और परिचालन दक्षता बढ़ाने सहित विभिन्न मापदंडों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

ये सुधार निम्नलिखित हैं:

i. शिकायतों को बैंक के ग्राहक संबंध प्रबंधन पोर्टल में एकीकृत करके और निवारणात्मक कार्रवाई टैगिंग को सक्षम करके ग्राहक शिकायत निवारण तंत्र में सुधार किया गया है।

ii. बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता: ईएएसई सुधार कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अपनी ऋण प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए कई उन्नत क्षमताओं को शामिल किया है। इनमें ब्यूरो विश्लेषण उपकरणों का उपयोग, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के पोर्टल से वित्तीय विवरणों की स्वचालित प्राप्ति, खाता एग्रीगेटर के माध्यम से बैंक स्टेटमेंट का एकीकरण, डेटा-आधारित अंडरराइटिंग मॉडल तथा जीएसटी एकीकरण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप ऋण पोर्टफोलियो की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा संभावित ऋण संकटों के प्रति बैंकों की लचीलापन क्षमता भी और मजबूत हुई है।

iii. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के पास चालू खाता बचत खाता अधिग्रहण के लिए समर्पित बिक्री टीम है, जो ग्राहकों की सुविधा और पहुंच के लिए डिजिटल माध्यमों से सेवाएं प्रदान करती है।

iv.  11 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसबी) ने आईटी प्रशासन और आईटी अवसंरचना की मजबूती बढ़ाने के लिए रेजिलिएंसी ऑपरेशंस सेंटर स्थापित किए हैं।

v. सात सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसबी) ने परिचालन दक्षता और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाने के लिए कम से कम एक जनरेशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जेन-एआई) का उपयोग किया है।

vi. सात सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने बाजार की क्षमता का सक्रिय रूप से आकलन करने और आउटबाउंड फील्ड सेल्स तथा शाखाओं के लिए संभावित ग्राहकों की पहचान करने के लिए केंद्रीकृत बिजनेस इंटेलिजेंस यूनिट स्थापित की हैं।

vii. पांच सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसबी) में ग्राहक सेवा प्रकोष्ठ और शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में दिव्यांगजनों के प्रतिनिधित्व के साथ-साथ डिजिटल अभिगम्यता प्रकोष्ठ की स्थापना तथा नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के साथ एक शासन ढांचा मौजूद है।

viii. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ब्रेल-सक्षम डेबिट और क्रेडिट कार्डों की शुरुआत, प्रशिक्षित एजेंटों को प्राथमिकता के आधार पर कॉल रूटिंग, क्षेत्रीय भाषा इंटरफेस तथा समर्पित सेवा प्रकोष्ठों सहित कई पहलों के माध्यम से दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों के ग्राहकों के लिए पहुंच को मजबूत किया है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सहानुभूति व समावेशिता पर अधिक जोर देने को दर्शाता है।

ix. ग्राहक-विशिष्ट और उत्पाद-वार वसूली रणनीतियों के माध्यम से विभिन्न डिजिटल चैनलों पर एक प्रभावी वसूली तंत्र विकसित किया गया है। इसके अतिरिक्त, 11 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने वसूली परिचालन लागत को कम करने तथा बेहतर निगरानी और अनुवर्ती कार्रवाई को सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किए हैं।

x. 10 सार्वजनिक क्षेत्र के सरकारी उपक्रमों (पीएसबी) में वसूली संबंधी कार्यों के लिए एआई-संचालित वॉइस बॉट और व्हाट्सएप चैटबॉट मौजूद हैं। पीएसबी के पास एसएआरएफएईएसआई/ डीआरटी/ एनसीएलटी मामलों की निगरानी के लिए डिजिटल उपकरण/पोर्टल/प्लेटफ़ॉर्म मौजूद हैं।

xi. ईएएसई ने सुधारों के लिए अपने सुनियोजित दृष्टिकोण के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के परिवर्तन की यात्रा में उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है।

आरबीआई के 31.12.2025 तक के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, निम्नलिखित प्रमुख बिंदु इस उल्लेखनीय यात्रा के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा देखे गए महत्वपूर्ण प्रभाव को दर्शाते हैं।

i. वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसबी) ने लाभ कमाया और उनका कुल शुद्ध लाभ अब तक का उच्चतम स्तर 1.78 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में पीएसबी को 85,371 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में पीएसबी का शुद्ध लाभ 1.46 लाख करोड़ रुपये रहा।

ii. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए अनुपात दिसंबर 2025 में घटकर 2.10% (2.54 लाख करोड़ रुपये) के नए निचले स्तर पर आ गया है, जो मार्च 2015 में 4.97% (2.79 लाख करोड़ रुपये) और मार्च 2018 में 14.58% (8.96 लाख करोड़ रुपये) के उच्चतम स्तर से काफी कम है।

iii. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के जोखिम-भारित परिसंपत्तियों के अनुपात (सीआरएआर) में पूंजी पर्याप्तता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो मार्च 2015 में 11.45% से बढ़कर दिसंबर 2025 में 15.46% हो गया है, यानी इसमें 401 बीपीएस का सुधार हुआ है।

iv. वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान, कोई भी सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक आरबीआई की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे में नहीं था, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में 21 में से 11 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पीसीए के दायरे में थे।

v. वित्त वर्ष 2024-25 में, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने खुदरा, कृषि और एमएसएमई क्षेत्रों में डिजिटल माध्यमों की सुविधा शुरू कर दी है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

vi अब सभी पीएसबी के पास एक केंद्रीकृत एकीकृत शिकायत निवारण पोर्टल है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में मैनुअल शिकायत निवारण प्रणाली लागू थी।

vii. वित्त वर्ष 2024-25 में, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कुल परिसंपत्तियों पर 1.10% का वार्षिक प्रतिफल हासिल किया है, जो वित्त वर्ष 2017-18 में -0.87% था।

वित्त वर्ष 2025–26 में ईएएसई 8.0 के अंतर्गत कॉमन रिफॉर्म्स को ‘ईएएसईराइज’ के रूप में शुरू किया गया है, जिसमें चार प्रमुख विषय—जोखिम और लचीलापन, नवाचार, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव तथा उत्कृष्टता शामिल हैं। यह व्यापक सुधार एजेंडा जोखिम प्रबंधन और लचीलापन को सुदृढ़ करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तथा एजेंटिक एआई को अपनाने, समावेशी बैंकिंग को बढ़ावा देने, स्थिरता, बेहतर ग्राहक अनुभव एवं परिचालन उत्कृष्टता पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अधिक चुस्त, भविष्य के लिए तैयार और ग्राहक-केंद्रित संस्थानों के रूप में सशक्त बनाना है।

ईएएसई 8.0 के अंतर्गत शुरू की गई या संशोधित की गई प्रमुख गतिविधियों का विवरण इस प्रकार है:

1. प्रशासन:

i. ग्राहक सेवा समितियों, शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में दिव्यांगजनों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए समावेशी शासन ढांचा और एक समर्पित अभिगम्यता प्रकोष्ठ की स्थापना जिसमें अभिगम्यता विशेषज्ञ शामिल हों।

ii. समर्पित आउटबाउंड बिक्री टीम शासन संरचनाएं।

iii. उन्नत शिक्षण व विकास प्रबंधन पर्यावरण, सामाजिक एवं शासन स्कोरकार्ड का एकीकरण और समर्पित ग्राहक प्रतिधारण दल प्रबंधन ढांचा।

iv. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रोडमैप और परिचालन दक्षता के लिए इसके उपयोग के मामलों का लाभ उठाना।

2. ग्राहक सेवा:

i. गिग/प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स, युवाओं, महिलाओं और स्टार्टअप्स के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए एसेट तथा लायबिलिटी उत्पाद।

ii. क्षेत्रीय भाषाओं में बहुभाषी ग्राहक सेवा (डिजिटल चैनल और सेवा प्रपत्र)।

iii. खुदरा और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) ग्राहकों के लिए उन्नत मोबाइल-ऐप क्षमताएं।

iv. ग्राहक ऑनबोर्डिंग के लिए परिसंपत्ति और देयता से संबंधित उत्पादों हेतु डिजिटल रूप से समर्थित ग्राहक यात्रा।

v. ग्राहकों के लिए वर्चुअल रिलेशनशिप मैनेजर।

vi. व्यापार वित्त समाधानों के लिए संपूर्ण डिजिटल व्यवस्था।

vii. दिव्यांगजनों के लिए स्व-सेवा संपर्क बिंदु

3. डिजिटल ऋण:

i. खुदरा, एमएसएमई और कृषि ऋण उत्पादों के लिए डिजिटल सेवाएं।

ii. ग्राहक सुविधा के लिए डिजिटल सहायता प्राप्त ढांचा।

iii.  एमएसएमई अंडरराइटिंग के लिए ऋण प्रबंधन प्रणाली में उन्नत क्षमताओं का एकीकरण।

iv. खाता एग्रीगेटर इकोसिस्टम के साथ एकीकरण।

v. क्रेडिट मूल्यांकन की स्वचालित जनरेशन क्षमता और अंडरराइटिंग में एनालिटिक्स/एआई का उपयोग।

4. जोखिम प्रबंधन:

i. अपेक्षित क्रेडिट हानि मॉडल पर ध्यान केंद्रित करना।

ii. परिचालनात्मक जोखिम वर्गीकरण और प्रारंभिक चेतावनी संकेतों की निगरानी के लिए डिजिटल पोर्टल/प्लेटफ़ॉर्म।

iii. मौजूदा और नए बैंक ग्राहकों की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी की रोकथाम व मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी जांच।

iv. बिचौलियों के खातों की पहचान और ग्राहकों की उचित जांच-पड़ताल को बेहतर बनाने के लिए उन्नत मॉडल।

v. रेजिलिएंसी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना और कुशल तृतीय-पक्ष जोखिम प्रबंधन के माध्यम से प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण और आईटी अनुप्रयोगों की मजबूती सुनिश्चित करना।

vi. साइबर घटनाओं के लिए डिजिटल फोरेंसिक तत्परता।

vii. ऐप/प्लेटफार्म/पोर्टल-आधारित पुनर्प्राप्ति और संग्रह निगरानी तंत्र।

उन्नत पहुंच और सेवा उत्कृष्टता (ईएएसई) सुधार एजेंडा को भारतीय बैंक संघ के तत्वावधान में, सदस्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ईएएसई संचालन समिति के मार्गदर्शन में प्रत्येक वित्तीय वर्ष की शुरुआत में वार्षिक रूप से अंतिम रूप दिया जाता है। इस सुधार एजेंडा के क्रियान्वयन की प्रगति का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन और समीक्षा ईएएसई संचालन समिति द्वारा त्रैमासिक आधार पर की जाती है।

ईएएसई सुधारों के तहत सामान्यतः वित्तीय वर्ष के भीतर स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जाती है। संरचित और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए मेट्रिक्स को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष के दौरान, अप्रैल से आगे उन्हें परिचालन में लाने की योजना बनाई जाती है।

सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसबी) के हितधारकों से बनी ईएएसई संचालन समिति द्वारा एक संरचित त्रैमासिक मूल्यांकन की देखरेख की जाती है, ताकि परिभाषित मापदंडों, त्रैमासिक डेटा प्रस्तुतियों/समीक्षा और पीएसबी के बीच सापेक्ष प्रदर्शन के आधार पर प्रगति और सुधारों का आकलन किया जा सके।

मूल्यांकन ढांचा परिभाषित सुधार संकेतकों के आधार पर सुधारों की प्रगति को मापते हुए प्रदर्शन परिणामों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करता है। प्रगति का आकलन आवधिक डेटा प्रस्तुतियों, प्रवृत्ति विश्लेषण व सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच सापेक्ष प्रदर्शन की तुलना के माध्यम से किया जाता है, जिससे मूल्यांकन में वस्तुनिष्ठता और तुलनीयता सुनिश्चित हो सके।

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एनके/एसएस  


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