भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय
प्रधानमंत्री की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सलाहकार परिषद (पीएम-एसटीआईएसी) की 29वीं बैठक में उन्नत विनिर्माण प्रणालियों पर चर्चा हुई
प्रविष्टि तिथि:
10 MAR 2026 7:01PM by PIB Delhi
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने 10 मार्च 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-3 में आयोजित 29वीं प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (पीएम-एसटीआईएसी) की बैठक की अध्यक्षता की। इसमें उन्नत विनिर्माण प्रणालियों पर चर्चा की गई।

पीएम-एसटीआईएसी के सदस्य डॉ. ए.एस. किरण कुमार, पूर्व अध्यक्ष, इसरो; सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानिटकर, पूर्व उप प्रमुख एकीकृत रक्षा स्टाफ (चिकित्सा); प्रो. संघमित्रा बंद्योपाध्याय, पूर्व निदेशक, भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता; प्रो. सुभाष काक, प्रोफेसर, ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी; श्री बाबा कल्याणी, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, भारत फोर्ज और नीति आयोग के सदस्य (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी), डॉ. वी.के. सारस्वत बैठक में उपस्थित थे। इस बैठक में प्रमुख सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भारत के उन्नत विनिर्माण प्रणाली इकोसिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया।
बैठक में डॉ. परविंदर मैनी, वैज्ञानिक सचिव, पीएसए कार्यालय; श्री एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय; प्रो. अभय करंदीकर, सचिव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. (श्रीमती) एन. कलैसेल्वी भी शामिल हुए। परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत मोहंती; डीआरडीओ के अध्यक्ष श्री समीर वी. कामत; अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन; बीआईएस के महानिदेशक श्री संजय गर्ग; एएनआरएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शिवकुमार कल्याणरामन; ग्राइंड मास्टर मशीन्स प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक और आईएमटीएमए की अध्यक्ष सुश्री मोहिनी केलकर; ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री पी.जी. जडेजा और भारत फ्रिट्ज वर्नर लिमिटेड (बीएफडब्ल्यू) के प्रबंध निदेशक श्री रवि राघवन भी बैठक में उपस्थित थे।

प्रो. सूद ने अपने आरंभिक भाषण में इस बात का उल्लेख किया कि विनिर्माण आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक स्वायत्तता का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उच्च परिशुद्धता मशीन टूल्स, सीएनसी नियंत्रण प्रणाली, रोबोटिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और परीक्षण एवं मेट्रोलॉजी अवसंरचना सहित उन्नत विनिर्माण प्रणालियाँ आधुनिक औद्योगिक उत्पादन और उद्योग 4.0 का आधार तैयार करते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और तकनीकी निर्भरता कम करने के लिए इन प्रौद्योगिकियों में घरेलू क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है। प्रो. सूद ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य एक समन्वित राष्ट्रीय दृष्टिकोण के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करना है ताकि भारत उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों के मुख्य रूप से आयातक होने से आगे बढ़कर इन प्रणालियों का डिज़ाइनर, डेवलपर और उत्पादक बन सके।
पीएम-एसटीआईएसी के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत ने कहा कि उत्पाद जीवनचक्र प्रबंधन, डिजिटल डिज़ाइन प्लेटफॉर्म और बहु-विषयक डिज़ाइन अनुकूलन जैसे डिजिटल इंजीनियरिंग उपकरणों ने आधुनिक इंजीनियरिंग और विनिर्माण प्रणालियों को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि कनेक्टेड मशीनों, रोबोटिक्स और डिजिटल सिमुलेशन प्लेटफॉर्म सहित उन्नत विनिर्माण की ओर भारत का संक्रमण अपेक्षित गति से धीमा रहा है। उन्होंने उद्योग 4.0 प्रणालियों को आधार प्रदान करने वाले आयातित प्लेटफॉर्म, उपकरण और प्रौद्योगिकियों पर निरंतर निर्भरता का उल्लेख किया। उन्होंने विनिर्माण प्रौद्योगिकियों, प्लेटफार्मों, एल्गोरिदम और उपकरणों में घरेलू क्षमताओं के विकास के महत्व पर जोर दिया और स्वदेशी विनिर्माण समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान किया।
ओपीएसए की सलाहकार/वैज्ञानिक डॉ. राकेश कौर ने हाल के घटनाक्रमों और भू-राजनीतिक बदलावों के मद्देनजर स्वदेशी उन्नत विनिर्माण प्रणालियों के महत्व को दोहराते हुए बैठक का संदर्भ प्रस्तुत किया, जिनके कारण प्रौद्योगिकी नीति पर पुनर्विचार करना आवश्यक हो गया है। इसका उद्देश्य भारत की विस्तारित नवाचार प्रणाली, उन्नत कौशल विकास और मानव संसाधनों की शक्ति का लाभ उठाते हुए रणनीतिक दिशा में आगे बढ़ना और इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) के संयुक्त सचिव श्री विजय मित्तल ने इस बात का उल्लेख किया कि मशीन टूल्स एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसका विनिर्माण और जीडीपी पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। सीएमटीआई में हाल ही में हुए हितधारक परामर्श के बारे में उन्होंने कहा कि उन्नत विनिर्माण प्रणालियों में एक बड़े राष्ट्रीय हस्तक्षेप के लिए वर्तमान समय उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि पूंजीगत वस्तु योजनाओं के अंतर्गत पहले किए गए प्रयासों से प्रगति हुई है, लेकिन अब एक अधिक एकीकृत राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम की आवश्यकता है। उन्होंने सीएमटीआई, उद्योग और अन्य मंत्रालयों के साथ मिलकर इस अवधारणा को एक औपचारिक योजना में विकसित करने और व्यापक अंतर-मंत्रालयी समर्थन के साथ इसे आगे बढ़ाने के लिए मंत्रालय की तत्परता व्यक्त की।
बेंगलुरु स्थित केंद्रीय विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएमटीआई) के निदेशक डॉ. नागहनुमैया ने उन्नत विनिर्माण प्रणालियों पर एक प्रस्तुति दी। महत्वपूर्ण मशीन टूल उपप्रणालियों, विशेष उच्च-परिशुद्धता मशीनों, रोबोटिक्स उपप्रणालियों और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग उपकरणों और सामग्रियों में भारत की आयात पर निरंतर निर्भरता पर प्रस्तुति में प्रकाश डाला गया। इसमें स्वदेशी विकास के साथ-साथ परीक्षण, सत्यापन और प्रमाणन अवसंरचना की आवश्यकता पर बल दिया गया और स्थानीयकरण, रोबोटिक्स को अपनाने और घरेलू मूल्यवर्धन के लिए स्पष्ट लक्ष्यों के साथ एक मिशन-उन्मुख कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा गया।

तीन विषयगत : (i) सीएनसी मशीन टूल कंट्रोल सिस्टम, एग्रीगेट्स, उन्नत/विशेष प्रयोजन मशीनें, परीक्षण और मेट्रोलॉजी; (ii) औद्योगिक रोबोटिक्स और स्वचालन; और (iii) उन्नत एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3डी और 4डी प्रिंटिंग) पर प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं। पहले विषय पर, आईआईटी मद्रास के एएमटीडीसी के केंद्र प्रमुख डॉ. रमेश बाबू और बेंगलुरु स्थित प्रगति ऑटोमेशन के निदेशक श्री दीपक जोगलेकर ने प्रस्तुतियाँ दीं; दूसरे विषय पर, आईआईएससी बेंगलुरु के एफएसआईडी के निदेशक प्रो. बी. गुरुमूर्ति और ओमरोन ऑटोमेशन इंडिया के प्रबंध निदेशक डॉ. समीर गांधी ने प्रस्तुतियाँ दीं। तीसरे विषय पर, आईआईटी बंबई के प्रो. के. पी. करुणाकरण और वीएसएससी, इसरो के वैज्ञानिक एसजी और डीजीएम डॉ. अनिल कुमार वेसांगी ने प्रस्तुतियाँ दीं। प्रस्तुतियों में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और उपप्रणालियों के स्वदेशी विकास, सशक्त अनुसंधान एवं विकास, साझा परीक्षण, सत्यापन और प्रमाणन अवसंरचना, विशिष्ट प्रतिभा विकास, मजबूत उद्योग-अकादमिक साझेदारी और भारत में उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यिक कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
विशेष आमंत्रितों और पीएम-एसटीआईएसी सदस्यों के संबोधनों ने मंत्रालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच समन्वित कार्रवाई द्वारा समर्थित उन्नत विनिर्माण प्रणालियों पर एक बड़े और अधिक एकीकृत राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम की आवश्यकता पर बल दिया। पीएम-एसटीआईएसी सदस्यों ने साझा राष्ट्रीय अवसंरचना, मानकों और प्रमाणन ढाँचों, मजबूत नीतिगत समर्थन और देश भर में क्षमताओं, सुविधाओं, प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता का मानचित्रण करने के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस या पोर्टल के महत्व पर जोर दिया।

ओपीएसए की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी ने चर्चा का सारांश प्रस्तुत करते हुए कहा कि विचार-विमर्श से प्रोटोटाइप स्तर की क्षमता से वाणिज्यिक स्तर पर तैनाती की आवश्यकता पर एक मजबूत राष्ट्रीय सहमति का पता चलता है। उन्होंने विश्व स्तरीय परीक्षण, सत्यापन और प्रमाणन सुविधाओं, साझा राष्ट्रीय अवसंरचना, स्वदेशी सीएडी/सीएएम और संबंधित सॉफ्टवेयर उपकरणों, विशेष कौशल विकास और आरडीआई और एएनआरएफ जैसे वित्तीय साधनों के प्रभावी उपयोग की निरंतर आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्नत विनिर्माण प्रणालियों में चल रहे प्रयासों को ध्यान में रखते हुए, डॉ. मैनी ने क्षमताओं, सुविधाओं, प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता के एक औपचारिक राष्ट्रीय डेटाबेस या भंडार की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रोफेसर सूद ने अपने समापन भाषण में कहा कि भारत के पास संस्थानों, उद्योग और रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण तकनीकी क्षमताएं पहले से ही मौजूद हैं, लेकिन ये अभी भी खंडित और अपर्याप्त रूप से एकीकृत हैं। उन्होंने कहा कि अब इन क्षमताओं को उन्नत विनिर्माण प्रणालियों पर एक सुसंगत राष्ट्रीय मिशन में समेकित करने की आवश्यकता है, जिसका नेतृत्व भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा किया जाएगा और संबंधित विभागों की समन्वित भागीदारी होगी। आगे बढ़ने के तरीके के रूप में, उन्होंने सुझाव दिया कि अगले तीन महीनों के भीतर, हितधारक संयुक्त रूप से एक व्यावहारिक कार्य योजना तैयार कर सकते हैं जिसमें प्रस्तावित मिशन के दायरे, प्राथमिकताओं, संस्थागत संरचना और वित्तपोषण आवश्यकताओं की रूपरेखा तैयार की गई हो।
****
पीके/केसी/एमकेएस/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2237892)
आगंतुक पटल : 52