ग्रामीण विकास मंत्रालय
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सामाजिक समावेश और विविधता में एकता को बढ़ावा देना : जनजातीय और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) से संबंधित स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिला सदस्यों ने राष्ट्रपति भवन में अमृत उद्यान का विशेष दौरा किया

प्रविष्टि तिथि: 10 MAR 2026 8:33PM by PIB Delhi

सामाजिक समावेश को मजबूत करने और महिला नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत 10 मार्च 2026 को राष्ट्रपति भवन में स्थित अमृत उद्यान में जनजातीय समुदायों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) से संबंधित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिला सदस्यों के लिए विशेष यात्रा का आयोजन किया।

देश के सबसे दूर दराज क्षेत्रों से 150 से अधिक स्वयं सहायता समूह की दीदियों ने इस यात्रा में भाग लिया, जो कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विविध जनजातीय और पीवीटीजी समुदायों का प्रतिनिधित्व करती हैं। विभिन्न भौगोलिक, संस्कृतियों और भाषाओं की महिलाओं को एक साथ लाते हुए इस यात्रा ने डीएवाई-एनआरएलएम के तहत पोषित महिला संस्थानों की सामूहिक ताकत को प्रदर्शित करते हुए विविधता में भारत की एकता की भावना को प्रतिबिंबित किया।

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यह यात्रा भारत के राष्ट्रपति कार्यालय के निमंत्रण पर आयोजित की गई थी। इसके तहत 3 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक विशेष श्रेणी के आगंतुकों के लिए अमृत उद्यान खोला गया था। गौरतलब है कि 10 मार्च को महिलाओं और आदिवासी महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए नामित किया गया, जो जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने, वित्तीय समावेश और सामुदायिक नेतृत्व में महिला समूहों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है।

यात्रा पर आए कई स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों के लिए यह अनुभव राष्ट्रीय राजधानी और देश के सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्थलों में से एक की उनकी पहली यात्रा थी। अमृत उद्यान के जीवंत पुष्प प्राकृतिक दृश्य से गुजरते हुए दीदी अपने साथ भारत की ग्रामीण विविधता, अनुकूलता और आकांक्षाओं के रंग लेकर आईं।

उद्यानों की ओर जाते समय स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों ने इंडिया गेट का भी दौरा किया और देश के सबसे प्रमुख स्मारकों में से एक के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व का अनुभव किया। इस यात्रा ने प्रतिभागियों को गर्व और खुशी से भर दिया, जिससे राष्ट्र की साझा विरासत के साथ उनका जुड़ाव और भी गहरा हो गया।

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देश के विभिन्न हिस्सों से स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों के बीच हुई बातचीत ने एकजुटता, आपसी ज्ञानवर्धन और साझा आकांक्षाओं की भावना को बढ़ावा दिया। विभिन्न समुदायों की महिलाओं ने अपनी आजीविका, संस्थानों और सामाजिक उपक्रमों से जुड़े अनुभवों का आदान-प्रदान किया, जिससे यह पता चलता है कि जमीनी स्तर के समूह किस प्रकार अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को सामान्य लक्ष्यों की दिशा में काम करने के लिए एक साथ ला सकते हैं।

यह पहल ग्रामीण विकास मंत्रालय की सामाजिक समावेशिता, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक समृद्धि और विविधता की मान्यता के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। भारत भर से स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाओं को राष्ट्रीय महत्व के ऐसे स्थानों पर एक साथ लाकर यह कार्यक्रम विविधता में एकता के विचार का भी उत्सव मनाता है। साथ ही गरिमा, अपनेपन और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करता है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने यात्रा का सुचारू और सफल संचालन सुनिश्चित होने पर राष्ट्रपति सचिवालय, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम), राज्य समन्वयक, संपर्क अधिकारियों के प्रति आभार प्रकट किया।

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पीके/केसी/आरकेजे


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