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महिला सशक्तिकरण की आधारशिला
प्रविष्टि तिथि:
06 MAR 2026 10:06AM by PIB Delhi
परिचय
किसी राष्ट्र की आर्थिक शक्ति उसकी महिलाओं और बच्चों के कल्याण और उनकी सहभागिता से गहराई से जुड़ी होती है। जब लड़कियाँ स्वस्थ, शिक्षित और सुरक्षित वातावरण में बड़ी होती हैं, तो वे बेहतर तरीके से सीखने, काम करने और समाज में सार्थक योगदान देने में सक्षम होती हैं। इसके विपरीत, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा और शिक्षा तक पहुँच में कमी न केवल व्यक्तियों के अवसरों को सीमित करती है, बल्कि समुदायों और पूरी अर्थव्यवस्था की प्रगति को भी प्रभावित करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने सशक्तिकरण के लिए जीवन-चक्र - प्रारंभिक बाल्यावस्था से शुरू होकर किशोरावस्था और वयस्कता तक जारी रहने -पर आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी है।
इस दृष्टिकोण के केंद्र में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय है, जो पोषण, देखभाल, संरक्षण और सहयोग से संबंधित बुनियादी सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई लक्षित हस्तक्षेपों को लागू करता है। प्रमुख छत्र पहलों में पोषण संबंधी परिणामों और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल में सुधार लाने हेतु सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने हेतु मिशन शक्ति तथा बाल संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ बनाने वाला मिशन वात्सल्य शामिल हैं।1 इसके अतिरिक्त, महिलाओं और बच्चों की शैक्षिक तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा भी विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। ये सभी कार्यक्रम मिलकर समावेशी सामाजिक और आर्थिक विकास की मजबूत आधारशिला रखते हुए महिलाओं और बच्चों को स्वस्थ, जागरूक और सुरक्षित जीवन जीने में सक्षम बनाने के प्रति लक्षित हैं।
पोषण और स्वास्थ्य: मूलभूत आधार
स्वस्थ और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए अच्छा पोषण और मजबूत स्वास्थ्य सेवाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत सरकार ने इस बात को स्वीकार करते हुए कि सुपोषित नागरिक सतत विकास और सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है।
सरकार स्टंटिंग, कम वजन, एनीमिया और जन्म के समय कम वजन के मामलों में कमी लाने पर विशेष ध्यान देते हुए मिशन मोड और डेटा-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से बच्चों, किशोरियों और माताओं में कुपोषण की समस्या से निपट रही है।
सामुदायिक स्तर पर एकीकृत सेवाओं, सशक्त फ्रंटलाइन प्रणालियों और रियल-टाइम निगरानी के माध्यम से ठोस सुधार हो रहे हैं, जिससे अधिक स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी तैयार हो रही है।
सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0
मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 एक एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य बच्चों (0–6 वर्ष), किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं में कुपोषण से निपटना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत एकीकृत तरीके से पूरक पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई), नियमित स्वास्थ्य जांच तथा स्वच्छता, स्तनपान और पूरक आहार संबंधी जागरूकता प्रदान की जाती है।
आंगनवाड़ी केंद्र आवश्यक पोषण सेवाएँ प्रदान करने के साथ-साथ आनंदमय प्रारंभिक शिक्षण के केंद्र के रूप में भी कार्य करते हैं। यहाँ 3–6 वर्ष के बच्चों को खेल-खेल में स्कूल-पूर्व शिक्षा दी जाती है, जिससे उनके बुनियादी कौशल, सामाजिक आदतों का विकास और विद्यालय के लिए तैयारी होती है। इससे बच्चों का प्राथमिक विद्यालय में सहज रूप से जाना सुनिश्चित होता है और भविष्य में पढ़ाई छोड़ने की आशंका भी कम होती है। सक्षम आंगनवाड़ी बेहतर बुनियादी ढाँचे वाले उन्नत आंगनवाड़ी केंद्र हैं।
कार्यक्रम के अंतर्गत मिशन पोषण 2.0 घटक कुपोषण में कमी लाने तथा स्वास्थ्य, कल्याण और प्रतिरक्षा क्षमता में सुधार लाने की दिशा में कार्य करता है। इसके अंतर्गत सेवाएँ तीन प्रमुख घटकों के माध्यम से प्रदान की जाती हैं:

आंगनवाड़ी सेवाएँ
पात्र लाभार्थियों को एकीकृत सेवाओं का पैकेज प्रदान किया जाता है, जिसमें पूरक पोषण, स्कूल-पूर्व अनौपचारिक शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच तथा रेफरल सेवाएँ शामिल हैं। इनमें से टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और रेफरल सेवाएँ स्वास्थ्य से संबंधित हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे के माध्यम से प्रदान किया जाता है। साथ ही, देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों में वाटिकाएँ या न्यूट्री-गार्डन भी विकसित की जा रही हैं, ताकि फलों, सब्जियों, औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों तक आसान और किफायती पहुँच सुनिश्चित हो सके तथा आहार में विविधता और स्थानीय खाद्य पदार्थों के सेवन को प्रोत्साहन मिले।
पोषण अभियान
8 मार्च, 2018 को आरंभ किया गया पोषण अभियान भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं में पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करना है। इसका लक्ष्य एक समेकित, बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण के माध्यम से कुपोषण से निपटना है, जो सेवाओं की प्रदायगी को मजबूती प्रदान करता है, स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करता है और स्वास्थ्य, कल्याण एवं प्रतिरक्षा को समर्थन देने वाला पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करता है।
पोशन ट्रैकर ऐप2 के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी संभव होती है, जो लाभार्थियों का डेटा, सेवाओं की प्रभावी उपलब्धता और आंगनवाड़ी केंद्रों के प्रदर्शन को ट्रैक करता है।

किशोरियों के लिए योजना (एसएजी)
यह योजना पूर्वोत्तर के सभी जिलों और अन्य राज्यों के आकांक्षी जिलों3 में14–18 वर्ष की लड़कियों को लक्षित करती है। यह योजना लड़कियों के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार लाते हुए अंतर-पीढ़ीगत कुपोषण को कम करती है। इसके तहत पोषण सहायता और गैर-पोषण सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें आयरन-फॉलिक एसिड (आईएफए) सप्लीमेंटेशन, स्वास्थ्य जांच,रेफरल सेवाएँ, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा औरकौशल विकास कार्यक्रम शामिल है ।
पोषण भी पढ़ाई भी
पोषण भी पढ़ाई भी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का एक प्रमुख अभियान है, जिसका उद्देश्य 0–6 वर्ष के बच्चों के लिए पोषण के साथ ही साथ खेल-खेल में पढ़ाई को भी शामिल करते हुए आंगनवाड़ी केंद्रों को आनंदमय प्रारंभिक शिक्षण केंद्र में बदलना है। यह अभियान एनईपी 2020 की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा संबंधी सिफारिशों के अनुरूप है। दिसंबर 2025 तक, देशभर में 8.55 लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और 41,645 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके साथ ही आधारशिला (0–3 वर्ष) और नवचेतना (3–6 वर्ष) पाठ्यक्रम 12 क्षेत्रीय भाषाओं में देशभर में लागू किए गए हैं—जिससे छोटे बच्चों को स्वस्थ, जिज्ञासु और स्कूल के लिए तैयार बनने में सशक्त बनाया जा रहा है।4
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पीएम पोषण
पीएम पोषण (पूर्व में मिड-डे मील योजना)5 के तहत पोषक स्कूल भोजन बच्चों—विशेषकर लड़कियों—को भूख से मुक्त रखने, नियमित रूप से कक्षा में आने, ध्यान केंद्रित करने और कक्षा में सफल होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह एक केन्द्रीय प्रायोजित योजना है, जिसे शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है, जिसमें सरकारी और सरकार-समर्थित स्कूलों में कक्षा I–VIII के बच्चों के लिए एक गर्म, पोषक युक्त भोजन प्रदान किया जाता है।

यह पहल कम आय वाले परिवारों पर आर्थिक बोझ को कम करने और स्कूली शिक्षा अधूरी छोड़ने के जोखिमों को घटाने के साथ-साथ बच्चों के स्कूली शिक्षा जारी रखने, बेहतर सीखने और स्वस्थ भविष्य को प्रोत्साहित करती है।
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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई)
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई)6, मिशन शक्ति की सामर्थ्य उप-योजना के तहत एक प्रमुख मातृत्व लाभ योजना है। यह पात्र गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को उनके प्रथम जीवित बच्चे के लिए नकद प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिससे मजदूरी के नुकसान को कम करने और बेहतर देखभाल को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। मिशन शक्ति78 के दिशानिर्देशों के तहत 1 अप्रैल 2022 से प्रभावी पीएमएमवीवाई 2.0 के तहत पात्र लाभार्थियों को उनके प्रथम जीवित बच्चे के लिए दो किस्तों9 में कुल 5,000 रुपये की राशि प्रदान की जाती है।
इसके अतिरिक्त, बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, जन्मजात लिंग अनुपात में सुधार लाने और कन्या भ्रूणहत्या को रोकने के लिए इस योजना के तहत दूसरे जीवित बच्चे के बालिका होने पर, जन्म के बाद 6,000 रुपये की राशि एकमुश्त प्रदान की जाती है।10
ये लाभ आधार-लिंक्ड खातों में डीबीटी माध्यम से सीधे वितरित किए जाते हैं और गर्भपात / मृत शिशु के जन्म11 के मामलों में नई पात्रता का प्रावधान भी रखा गया है। यह योजना पूरे देश में प्रभावी नामांकन और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर लागू की जा रही है।
स्वास्थ्य से संबंधित अन्य प्रयास
प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एक महत्वपूर्ण शाखा है। यह महिलाओं और बच्चों को प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य के पाँच स्तंभों के माध्यम से समग्र देखभाल प्रदान करता है। जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम जैसी प्रमुख योजनाएँ मातृ और नवजात जोखिम में कमी लाने के लिए विशेषकर अच्छा प्रदर्शन न करने वाले राज्यों में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को नकद सहायता, मुफ्त दवाएँ, जांच, रक्त और आहार प्रदान करते हुए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देती हैं। 2019 में शुरू की गई सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) सभी मौजूदा मातृ और नवजात स्वास्थ्य योजनाओं को समेकित कर समग्र और सुसंगत पहल तैयार करती है, जो सेवाओं की सुनिश्चितता प्रदान करती है।
मिशन इंद्रधनुष12 : एक प्रमुख टीकाकरण अभियान है, जिसका उद्देश्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए पूर्ण टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित करना है। यह योजना विशेष रूप से सेवाओं से वंचित क्षेत्रों को लक्षित करती है और नियमित तथा पूरक टीकाकरण के माध्यम से बच्चों के जीवन रक्षा दर को बढ़ावा देती है।
ये योजनाएँ सामूहिक रूप से स्वास्थ्य परिणामों में राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण प्रगति में योगदान देती हैं। प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
- सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस ) द्वारा प्रकाशित स्पेशल बुलेटिन ऑन मैटर्नल मॉर्टेलिटी (2019-21) के अनुसार, देश की मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 2014-16 में प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर 130 से 37 अंक की गिरावट के साथ 2019-21 में प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर 93 हो गई।13
- यूएन इंटर-एजेंसी ग्रुप फॉर चाइल्ड मॉर्टेलिटी एस्टिमेशन (आईजीएमई) की 25 मार्च 2025 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2023 के बीच भारत में पाँच वर्ष से कम आयु वाले बच्चों मृत्यु दर 48 से घटकर 28 प्रति 1,000 जीवित जन्म हो गई और नवजात शिशु मृत्यु दर 28 से घटकर 17 प्रति 1,000 जीवित जन्म तक पहुँच गई।14
ये प्रगति पोषण तक बेहतर पहुँच, सुरक्षित प्रसव, टीकाकरण और सामुदायिक निगरानी में सुधार को दर्शाती है—जो स्वस्थ पीढ़ियों के निर्माण के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।
दीर्घकालिक सशक्तिकरण के लिए शिक्षा और कौशल विकास
शिक्षा एक शक्तिशाली साधन है, जो विशेष रूप से लड़कियों और युवतियों के लिए बेहतर अवसर, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता के द्वार खोलती है । शिक्षा महिलाओं में आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्हें बेहतर निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करती है।
सभी स्तरों पर लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाएँ, कार्यक्रम और पहल संचालित करती है। इनमें लड़के-लड़कियों की समानता को बढ़ावा देना, लड़कियों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था और किशोरावस्था में सीखने और विकास में मदद करना, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना, छात्रवृत्ति और होस्टल प्रदान करना, अवसंरचना में सुधार लाना, कौशल विकास, एसटीईएम और उच्च शिक्षा के लिए सहायता देना जैसे लगातार प्रयास शामिल हैं। ये हस्तक्षेप दीर्घकालिक विकास और सशक्तिकरण के लिए मजबूत आधार तैयार करने में मदद कर रहे हैं।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी)15
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 22 जनवरी 2015 को आरंभ की गई बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुकी है। यह योजना मानसिकता में बदलाव लाने, लड़के-लड़कियों में समानता और बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों पर केंद्रित है। इसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है। बीते वर्षों में इस योजना ने लगातार प्रगति दिखाई है:
- जन्म के समय लिंग अनुपात (एसआरबी): स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की नवीनतम स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर यह 2014–15 में 918 (लड़कियाँ प्रति 1,000 लड़के) से बढ़कर 2024–25 में 929 हो गया।16
- शिक्षा मंत्रालय के शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई+) डेटा के अनुसार माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। यह आँकड़ा लड़कियों की स्कूल में उच्च भागीदारी और स्कूल में बने रहने को दर्शाता है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी)
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) एससी, एसटी, ओबीसी जैसे सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईडीजी) और अन्य वर्गों विशेष रूप से शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े ब्लॉकों में 10–18 वर्ष की आयु की लड़कियों को सुरक्षित, आवासीय शिक्षा प्रदान करते हैं । कक्षा VI से XII तक के पाठ्यक्रम को कवर करने वाले ये आवासीय विद्यालय अच्छा वातावरण प्रदान करते हैं, जहाँ लड़कियाँ सीख सकती हैं, आगे बढ़ सकती हैं और सहज रूप से प्राथमिक से उच्च माध्यमिक शिक्षा का रूख कर सकती हैं।


शिक्षा मंत्रालय लड़कियों को सशक्त बनाने, उन्हें डिजिटल रूप से सक्षम बनाने और उनके सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत सभी केजीबीवी और छात्रावासों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) लैब्स और स्मार्ट क्लासरूम प्रदान करता है। विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग ने 03.07.2024 को समग्र शिक्षा के मानकों के अनुसार सभी क्रियाशील केजीबीवी को आईसीटी लैब्स और स्मार्ट क्लासरूम से सुसज्जित किए जाने की घोषणा की। इसके अनुरूप, वित्त वर्ष 2024–25 में 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 3,564 आईसीटी लैब्स और 3,655 स्मार्ट क्लासरूम स्थापित करने के लिए 28,841.96 लाख रुपये आवंटित किए गए ।
इनकी स्थापना के बाद पहली बार वर्ष 2024–25 में केजीबीवी वार्डन्स के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया और इसे डीएसईएल द्वारा राष्ट्रीय शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। एनआईईपीए द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सभी आधिकारिक भाषाओं में इन प्रशिक्षण कार्यशालाओं के आयोजन के लिए केजीबीवी वार्डन प्रशिक्षण हैंडबुक अंग्रेजी और हिंदी संस्करण में विकसित की गई है और इसका अनुवाद भी किया जा रहा है।
उच्च शिक्षा में महिलाएँ 17
भारत में उच्च शिक्षा में महिला सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा है, जो लिंग समानता में सुधार को दर्शाता है। हाल के आँकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक महिलाओं और लड़कियों की पहुँच बढ़ाने हेतु सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

पीएच.डी. डिग्री में महिलाओं का नामांकन
पीएच.डी. में महिला शोधार्थियों का नामांकन 135.6% की असाधारण वृद्धि (2014–15 से 2022–23 तक) के साथ दोगुना से अधिक बढ़ गया है, जिससे 64,724 अतिरिक्त महिला शोधकर्ता जुड़ी हैं । यह आँकड़ा उन्नत शैक्षणिक भागीदारी में महिलाओं की मजबूत प्रगति को दर्शाता है।1819

लड़कियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएँ
केंद्र और राज्य सरकारों दोनों द्वारा लड़कियों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्तियाँ और अन्य प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं। केंद्र सरकार की कुछ प्रमुख छात्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं:
कॉलेज और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय क्षेत्र की छात्रवृत्ति योजना
यह छात्रवृत्तियाँ भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा उच्चतर माध्यमिक /कक्षा XII बोर्ड परीक्षा के परिणामों के आधार पर प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य गरीब परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इन छात्रवृत्तियों का 50% हिस्सा लड़कियों के लिए आरक्षित है।
स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति
यह केंद्रीय क्षेत्र योजना 2023–24 में शुरू की गई, जो पहले की चार स्नातकोत्तर छात्रवृत्तियों को एकीकृत करती है और 10,000 वार्षिक सीटें प्रदान करती है,(जिनमें 30% लड़कियों के लिए आरक्षित-3,000 चयनित) सीटों को एसटीईएम और मानविकी में समान रूप से विभाजित किया गया है। चयनित अध्येताओं को प्रति वर्ष 1,50,000 रुपये की राशि प्रदान की जाती है। इस पहल का समर्थन करते हुए, महिला स्नातकोत्तर नामांकन वर्ष 2014–15 के 19.86 लाख से 61.3% बढ़कर वर्ष 2022–23 में 32.03 लाख हो गया (एआईएसएचई डेटा), जिससे उच्च शिक्षा में 12 लाख से अधिक नई छात्राएँ शामिल हुईं।20
एआईसीटीई प्रगति छात्रवृत्ति योजना
एआईसीटीई प्रगति छात्रवृत्ति ने वर्ष 2014-15 से तकनीकी शिक्षा में मेधावी लड़कियों को मज़बूत बनाया है। यह 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में हर साल 10,000 छात्रवृत्तियाँ (डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रमों के लिए 5,000-5,000) प्रदान करती है और इसे पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर तक बढ़ाया गया है। वर्ष 2024–25 में, यह योजना 35,998 लड़कियों तक पहुँची—इससे मेधावी लड़कियों को ज़रूरी आर्थिक सहायता मिली ताकि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें और बिना किसी चिंता के सफल करियर बना सकें।21
एसटीईएम शिक्षा के लिए महिलाओं की सहायता
विज्ञान ज्योति योजना
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा संचालित विज्ञान ज्योति योजना IX–XII कक्षा की विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की मेधावी लड़कियों को एसटीईएम क्षेत्रो में अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करती है। इसका उद्देश्य देश में विभिन्न विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की कमी को दूर करना है। यह योजना व्यक्तिगत परामर्श, प्रयोगशाला दौरे, प्रायोगिक कार्यशालाएँ, महिला रोल मॉडल के साथ संवाद, विज्ञान शिविर और अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता के माध्यम से लड़कियों में आत्मविश्वास बढ़ाती है और एसटीईएम करियर की राह खोलती है। इसके शुभारंभ के बाद से, इसने 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 300 जिलों में 80,000 से अधिक मेधावी लड़कियों के जीवन को प्रभावित किया है, इससे लड़कियों और लड़कों के अंतर को कम करने और लड़कियों को यह दिखाने में मदद मिली है कि एसटीईएम में उनकी भी जगह है।22
महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें
एसटीईएम क्षेत्रों में और अधिक लड़कियों को प्रोत्साहित करने के लिए आईआईटी और एनआईटी में लड़कियों के लिए अतिरिक्त सीटें शुरु की गईं, जिससे महिला भागीदारी 10% से बढ़कर 20% से अधिक हो गई। इस पहल ने देश भर के इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा संस्थानों में लिंग संबंधी विविधता को बढ़ावा दिया है।23 आईआईटी मद्रास के विद्या शक्ति योजना24 जैसे कार्यक्रम ग्रामीण और महिला छात्राओं को एसटीईएम में सफल होने में मदद करते हैं। ये प्रयास लड़कियों और महिलाओं के लिए समावेशी और समान उच्च शिक्षा की दिशा में लगातार प्रगति को दर्शाते हैं।
युवा किशोरियों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से आकांक्षाओं का पोषण (नव्या)
24 जून 2025 को लॉन्च की गई नव्या योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की सहयोगपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (पीएमकेवीवाई 4.0) के तहत कम से कम कक्षा 10 की योग्यता रखने वाली 16–18 वर्ष की किशोरियों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से लड़कियों को डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सिक्योरिटी, एआई-समर्थित सेवाओं, और ग्रीन जॉब्स जैसे उभरते और गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में व्यावहारिक व्यावसायिक कौशल के साथ-साथ जीवन कौशल, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल क्षमता भी सिखाई जाती है। इस योजना की शुरुआत 19 राज्यों के 27 आकांक्षी और पूर्वोत्तर जिलों में कुल 3,850 लड़कियों को प्रशिक्षित करने के लक्ष्य के साथ की गई। इसके पायलट चरण में 9 राज्य और 9 जिले शामिल हैं।25 दिसंबर 2025 तक, इस योजना में 1,295 लड़कियों का नामांकन हुआ है, जिनमें से 671 लड़कियों को पहले ही प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।26
सुरक्षा और संरक्षा: जीवन और सम्मान की रक्षा
सुरक्षा और संरक्षा ही सही मायनों में सशक्तिकरण की आधारशिला है। जब महिलाएँ और बच्चे हिंसा या नुकसान के भय के बिना जी सकते हैं, कार्य कर सकते हैं और प्रगति कर सकते हैं, तो वे अपनी शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत लक्ष्यों को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ा सकते हैं। भारत सरकार इसे लक्षित योजनाओं के माध्यम से सुनिश्चित करती है, जो तत्काल सहायता, आपातकालीन मदद, दीर्घकालीन सुरक्षा और सामुदायिक स्तर पर बदलाव प्रदान करती हैं। ये प्रयास निवारण, प्रतिक्रिया और पुनर्वास पर केंद्रित हैं, ताकि लिंग-आधारित हिंसा को कम किया जा सके और सभी के लिए सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।
मिशन शक्ति: महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए समग्र ढांचा
मिशन शक्ति महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीय छत्र योजना है। यह महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण को दो स्पष्ट उप-योजनाओं के तहत एकीकृत करती है:
- संबल— सुरक्षा और संरक्षा पर केंद्रित
- सामर्थ्य— आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण पर केंद्रित

संबल
संबल उप-योजना महिलाओं को हिंसा से बचने और उबरने में मदद करने के लिए व्यावहारिक, जमीनी स्तर पर सुरक्षा तंत्र प्रदान करती है।
संबल के अंतर्गत कुछ प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:
इन्हें सखी सेंटर भी कहा जाता है। ये किसी भी तरह की हिंसा (घरेलू, यौन, एसिड अटैक, तस्करी आदि) की शिकार महिलाओं और लड़कियों को एक ही छत के नीचे समग्र और तत्काल मदद देते हैं। इनकी सेवाओं में आपातकालीन चिकित्सा सहायता, कानूनी परामर्श, पुलिस सहायता, मनो-सामाजिक समर्थन और अस्थायी आश्रय के लिए रेफरल शामिल हैं।
यह एक 24×7 टोल-फ्री आपातकालीन सेवा है, जो परामर्श, जानकारी और पुलिस, चिकित्सा या कानूनी सहायता के लिए त्वरित रेफरल प्रदान करती है। संकट की स्थिति में यह पहले संपर्क बिंदु के तौर पर काम करती है। यह हेल्पलाइन हर महीने हज़ारों कॉल हैंडल करती है, तुरंत मदद देती है और महिलाओं को नजदीकी ओएससी, आश्रय और कानूनी मदद जैसी सेवाएँ देती है।
नारी अदालतें सामुदायिक स्तर की अनौपचारिक अदालतें हैं, जो घरेलू हिंसा और उत्पीड़न से जुड़े विवादों को मध्यस्थता और जागरूकता के माध्यम से हल करती हैं।
सामर्थ्य
सामर्थ्य उप-योजना सहायता सेवाओं, कौशल विकास और संस्थागत देखभाल के माध्यम से महिलाओं की दीर्घकालिक स्वतंत्रता, लचीलेपन और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी को मजबूत करने पर केंद्रित है।
सामर्थ्य के अंतर्गत प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:
- शक्ति सदन : यह एक एकीकृत सहायता योजना है, जो तस्करी या कठिन परिस्थितियों से बचाई गई महिलाओं और लड़कियों को आश्रय, देखभाल, परामर्श, कानूनी सहायता और पुनर्वास प्रदान करती है।
- सखी निवास: कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और किफायती होस्टल आवास, जिसमें सुरक्षित रहने की सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं, ताकि उनको अपने रोजगार और आवागमन में आसानी हो सकें।
- राष्ट्रीय क्रेच योजना (पालना): यह योजना कामकाजी माताओं के बच्चों (6 महीने से 6 साल) के लिए डेकेयर की सुविधा देती है, जिससे कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी संभव हो पाती है।
- संकल्प: महिला सशक्तिकरण केंद्र (एचईडब्ल्यू): यह राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर समन्वय और सुविधा प्रदान करने के तंत्र के रूप में कार्य करता है, जो महिलाओं को सरकारी योजनाओं, कौशल विकास, क्षमता निर्माण और आजीविका के अवसरों तक बेहतर पहुँच दिलाने में सहायता करता है।
शी-बॉक्स पोर्टल : महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमओडब्ल्यूसीडी) ने 29 अगस्त 2024 को एक सिंगल-विंडो, केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के रूप में सेक्सुअल हैरासमेंट इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स (शी बॉक्स) लॉन्च किया, जो कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों को ट्रैक करने के लिए एक नेशनल रिपॉजिटरी बनाता है। इससे कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (एसएच अधिनियम) के क्रियान्वयन पर नजर रखना आसान हो जाता है, जो 9 दिसम्बर, 2013 को लागू हुआ था।
यह उपयोग सुलभ पोर्टल सार्वजनिक, निजी, संगठित या असंगठित क्षेत्रों की महिलाओं को सुरक्षित रूप से शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है, जिसमें शिकायतें स्वचालित रूप से संबंधित आंतरिक समिति (आईसी) या स्थानीय समिति (एलसी) को अग्रेषित कर दी जाती हैं।
शी-बॉक्स में रीयल-टाइम स्टेटस ट्रैकिंग, बहुभाषी सहायता, मजबूत गोपनीयता सुरक्षा और प्रशिक्षण सामग्री व मार्गदर्शन वाला संसाधन हब शामिल है। यह त्वरित शिकायत निवारण, अधिक जवाबदेही, सुरक्षित कार्यस्थल, और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक प्रगति को बढ़ावा देता है।
मिशन वत्सल्य: बच्चों के लिए समर्पित सुरक्षा
- मिशन वत्सल्य27 एक छत्र योजना है, जो विशेष रूप से बाल कल्याण और सुरक्षा पर केंद्रित है। यह कमजोर बच्चों—जिनमें दुरुपयोग, उपेक्षा, तस्करी, या माता-पिता की देखभाल से वंचित बच्चे शामिल हैं—को संस्थागत और गैर-संस्थागत देखभाल, प्रायोजन, पालक देखभाल, दत्तक ग्रहण और आफ्टर केयर के माध्यम से सहायता प्रदान करती है।
- यह योजना जहाँ संभव हो पारिवारिक देखभाल, पुनर्वास और सामान्य जीवन में वापसी पर जोर देती है।
- यह बाल देखभाल संस्थाओं, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्डों, और विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसियों के माध्यम से संचालित होती है।
- इसके परिणामस्वरूप, हर साल हजारों बच्चों को सुरक्षित वातावरण में रखा जाता है, साथ ही बाल विवाह, तस्करी और शोषण को रोकने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- मिशन वत्सल्य पोर्टल सभी बाल कल्याण प्रणालियों के लिए एक संगठित कार्यस्थल के रूप में कार्यरत है। गोद लेने से संबंधित प्लेटफ़ॉर्म केयरिंग को दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए एमवी पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है।28
- बाल हेल्पलाइन सभी 36 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित है और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए ईआरएसएस -112 के साथ एकीकृत है। 1 जनवरी 2026 तक, इसे 728 जिलों में स्थापित किया जा चुका है, जिससे एकीकृत राष्ट्रीय बाल प्रतिक्रिया तंत्र सक्षम हुआ है।29
ये पहलें—मिशन शक्ति (संबल) और मिशन वात्सल्य—साथ मिलकर महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित घर, कार्यस्थल और समुदाय बनाने का कार्य करती हैं। ये लिंग-आधारित हिंसा को कम करती हैं, संकट के समय त्वरित सहायता प्रदान करती हैं, तथा सम्मान और समानता को बढ़ावा देती हैं। आपातकालीन प्रतिक्रिया, कानूनी सहायता, सामुदायिक भागीदारी और बाल-केंद्रित सुरक्षा को मिलाकर, ये पहलें महिलाओं और बच्चों के लिए बेफिक्र होकर जीने और समाज में पूर्ण भागीदारी निभाने की मजबूत नींव तैयार करती हैं।
निष्कर्ष: सशक्त भविष्य का निर्माण
भारत ने महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और संरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया है। सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 तथा मिशन शक्ति आदि जैसे प्रमुख समग्र कार्यक्रम मंत्रालयों के बीच सशक्त समन्वय सुनिश्चित करते हैं, जिससे जमीनी स्तर पर अधिकतम पहुँच और प्रभाव संभव हो पाता है। पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पारदर्शिता, जवाबदेही और सेवाओं की कुशल डिलीवरी को बढ़ाते हैं।
महिलाओं और लड़कियों के कल्याण, शिक्षा और सुरक्षा में निवेश करके ये पहलें परिवारों को मजबूत बनाती हैं, समुदायों का उत्थान करती हैं, और मानव संसाधन तैयार करती हैं। ये समावेशी विकास, महिला-पुरुष समानता और दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास में सीधे तौर पर योगदान देती हैं। जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ रहा है, महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाने पर निरंतर ध्यान केंद्रित करना परिवर्तनकारी और स्थायी बदलाव हासिल करने के लिए आवश्यक है।
संदर्भ :
पत्र सूचना कार्यालय :
https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2100642®=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1703147®=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2212747®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2082323®=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2212747®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2113279®=3&lang=2
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
https://www.poshantracker.in/statistics
https://pmmvy.wcd.gov.in/
https://missionvatsalya.wcd.gov.in/
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय :
https://nhm.gov.in/index1.php?lang=1&level=3&lid=309&sublinkid=841
https://nhm.gov.in/index1.php?lang=1&level=2&lid=220&sublinkid=824
https://www.mohfw.gov.in/?q=en/pressrelease/india-witnesses-steady-downward-trend-maternal-and-child-mortality-towards-achievement
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ):
https://www.unicef.org/india/press-releases/un-report-highlights-great-strides-india-under-five-child-survival
शिक्षा मंत्रालय :
https://www.education.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/statistics-new/UDISE%2BReport%202024-25%20-%20NEP%20Structure.pdf
https://pmposhan.education.gov.in/
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU2395_XUtMv0.pdf?source=pqals
https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/jan/doc2026123765001.pdf
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU2310_FmCOE8.pdf?source=pqals
https://sansad.in/getFile/annex/269/AU339_sh2ONP.pdf?source=pqars
https://sansad.in/getFile/annex/266/AU1777_3tO520.pdf?source=pqars
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