सूचना और प्रसारण मंत्रालय
विज्ञापन कोड उत्पादों के चमत्कारिक या अलौकिक गुणों का दावा करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाते हैं
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के दिशानिर्देशों में अनुमोदन के लिए उचित सावधानी अनिवार्य की गई है और विज्ञापनों के लिए शर्तें भी निर्धारित की गई हैं
प्रविष्टि तिथि:
11 MAR 2026 3:28PM by PIB Delhi
मौजूदा नियामक ढांचे के अनुसार, निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले सभी विज्ञापनों को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत निर्धारित विज्ञापन संहिता का पालन करना अनिवार्य है। विज्ञापन संहिता के नियम 7(5) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान है कि 'किसी भी विज्ञापन में ऐसे संदर्भ नहीं होने चाहिए, जिनसे जनता को यह लगे कि विज्ञापित उत्पाद या उसके किसी घटक में कोई विशेष, चमत्कारी या अलौकिक गुण है, जिसे सिद्ध करना कठिन है।' विज्ञापन संहिता के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन पाए जाने पर निजी टीवी चैनलों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाती है। मंत्रालय समय-समय पर प्रसारकों को विज्ञापन संहिता का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सलाह भी जारी करता है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 10 के तहत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की स्थापना उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार प्रथाओं और झूठे या भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित मामलों को विनियमित करने और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें लागू करने के लिए की गई है।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 18 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए "भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम और भ्रामक विज्ञापनों के लिए अनुमोदन पर रोक हेतु दिशानिर्देश, 2022" जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश भ्रामक न होने वाले और वैध विज्ञापन, लुभावने विज्ञापन, छद्म विज्ञापनों पर प्रतिबंध, बच्चों के लिए लक्षित विज्ञापनों, विज्ञापनों में डिस्क्लेमर और निर्माता, सेवा प्रदाता, विज्ञापनदाता और विज्ञापन एजेंसी के कर्तव्यों के लिए शर्तें निर्धारित करते हैं।
उपरोक्त दिशा-निर्देशों के खंड 13 में आगे यह प्रावधान है: विज्ञापनों को दिखाए जाने से पहले उचित सावधानी बरतनी ज़रुरी है, यानी किसी विज्ञापन में किया गया कोई भी दावा उस व्यक्ति, समूह या संगठन की वास्तविक और वर्तमान राय को दर्शाने वाला होना चाहिए, जो इसका प्रतिनिधित्व कर रहा है और साथ ही यह संबंधित वस्तुओं, उत्पादों या सेवाओं के बारे में पर्याप्त जानकारी या अनुभव पर आधारित होना चाहिए तथा भ्रामक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, दिशा-निर्देशों में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी भी कानून के तहत भारतीय पेशेवरों को किसी भी पेशे से संबंधित किसी भी विज्ञापन में समर्थन करने से प्रतिबंधित किया गया है, तो उसी पेशे के विदेशी पेशेवरों को भी ऐसे विज्ञापन में समर्थन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यह जानकारी आज लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन द्वारा श्री डॉ. एम. के. विष्णु प्रसाद के प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रस्तुत की गई।
पीके/केसी/एनएस
(रिलीज़ आईडी: 2238403)
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